हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह सीडी मामले में अदालत के सामने पेश हुए और उन्होंने तेज गति से सुनवाई करने की मांग की।
इस मामले ने एक विशेष न्यायाधीश ने वीरभद्र और उनकी पत्नी प्रतिभा के खिलाफ आरोप तय कर दिये हैं।
उधर, जन अभियोजक ने इन दोनों की जमानत रद्द करने की जोरदार वकालत की और आरोप लगाया कि अभियोजन पक्ष के पास उनकी जमानत रद्द करने की मांग को लेकर पर्याप्त सामग्री है।
विशेष न्यायाधीश बीएल सोनी ने बाद में इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 12 सितंबर की तारीख तय की।
अभियोजन पक्ष ने 25 जून को अदालत में आरोप पढकर सुनाए थे। सिंह और उनकी पत्नी इस दौरान अदालत में मौजूद नहीं थे। उस दिन विशेष न्यायाधीश ने आरोप तय किये थे।
दोनों ने आरोपों से इंकार किया और कहा कि वे सुनवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं।
यह मामला वर्ष 1989 का है जब वीरभद्र हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। यह आरोप एक आडियो सीडी पर आधारित हैं जिसमें कथित रूप से आईएएस अधिकारी मोहिंदर लाल और कुछ उद्योगपतियों के बीच राज्य में निवेश करने के लिए पैसे के लेने देन की बात शामिल थी।