उत्तर प्रदेश के आलू किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। आलू के उत्पादन ने बेहतर मॉनसून और बढ़े हुए रकबे की वजह से इस बार सभी अनुमानों को झुठला दिया है। उत्तर प्रदेश में इस साल आलू के रिकॉर्ड उत्पादन होने की खबर है। बीते साल के 131 लाख टन के उत्पादन को पछाड़ते हुए राज्य में इस साल आलू का उत्पादन 150 लाख टन से ज्यादा होने की उम्मीद की जा रही है।
आलू के बंपर उत्पादन की खबर के चलते उत्तर प्रदेश के उद्यान विभाग के माथे पर चिंता की लकीरे हैं। सबसे बड़ी परेशानी का सबब राज्य में भंडारण क्षमता का न होना है। पर्याप्त
भंडारण क्षमता की कमी के चलते जहां पिछले साल राज्य में करीब 20 लाख टन आलू कोल्ड स्टोरों में नही पहुंच पाया था वहीं इस बार यह आंकड़ा करीब 40 से 50 लाख टन रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की भंडारण क्षमता 90 लाख टन आलू की है और बीते कई सालों से इसमे कोई इजाफा नही हुआ है। यह सरकार के साथ-साथ किसानों के लिए भी चिंता की वजह बना हुआ है। भंडारण क्षमता के ज्यों का त्यों बने रहने के चलते किसानों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत अपनी उपज का बेहतर दाम पाने की होती है। आलू के किसानों के साथ यह दिक्कत ज्यादा इसलिए होती है क्योंकि ज्यादा पैदावार होने के बाद उन्हें दाम सही न मिलने की परेशानी का सामना करना पड़ता है। भंडारण की व्यवस्था नहीं होने की वजह से उन्हें औने-पौने दाम में आलू बेचने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसी स्थिति में 130 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर कोल्ड स्टोर में माल रखना उन्हें घाटे का सौदा लगता है।
उद्यान विभाग में आलू का काम देख रहे उप निदेशक ए के पांडे का कहना है कि फिलहाल तो आलू किसानों के सामने कोई दिक्कत नहीं है। उनका कहना है सरकार हर हाल में आलू किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाने के लिए मदद करेगी।
दूसरी ओर विभाग के अन्य अधिकारियों का कहना है कि इस साल आलू का उत्पादन उम्मीद से बहुत ज्यादा होने जा रहा है। उनका कहना है कि आलू की फसल न केवल उत्तर प्रदेश में अच्छी हुई है बल्कि देश के अन्य हिस्सों से भी आलू की अच्छी फसल की खबर है। इन अधिकारियों का कहन है कि ऐसे में किसानों के सामने दाम की दिक्कत आने की पूरी संभावना है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 2008 में ज्यादा उत्पादन के चलते किसानों को अपना माल सड़क पर फेंकने को मजबूर होना पड़ा था। उस वक्त आलू उपजाने वाले किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। सरकार आलू किसानों की मदद के लिए बीते दो सालों से बाजार हस्तक्षेप योजना
लाकर किसानों से खुद उपज खरीदकर उनके नुकसान की भरपाई करती रही है।
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