| ..असली काम अब होगा | | दोबारा सत्ता में आने वाले नीतीश का कहना है कि वह प्रधानमंत्री बनने के बारे में नहीं सोचते। अभी उन्हें राज्य के लिए काम करना है और बेहतर प्रशासन के लिए उनका असली काम अब शुरू होगा | | | आदिति फडणीस / पटना November 24, 2010 | | | | |
बेहद खुशी की बात हो, तब भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संयम बनाए रखना पसंद करते हैं। आमतौर पर काफी सतर्क रहने वाले नीतीश के लिए 24 नवंबर यानी आज का दिन कुछ अलग ही है और खास भी। मतगणना के नतीजे घोषित होने के बाद नीतीश ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इसके बाद उनके घर पर इकट्ठा होने वालों में उनके सलाहकार एवं प्रवक्ता शिवानंद तिवारी, लालू प्रसाद के पूर्व समर्थक और अब जदयू के सदस्य रंजन यादव और दो-तीन पत्रकार और मौजूद थे। बेहद संघर्ष भरे विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने की राहत भरी खुशी नीतीश के चेहरे पर साफ झलक रही थी।
चाय के वक्त मजाकिया लहजे उन्होंने अपने चपरासी से कहा, 'मैंने चुनाव में जीत दर्ज की है और मुझे ही चाय नहीं दी गई है।' हालांकि उनका चपरासी यह समझ नहीं पाया कि वह मजाक कर रहे हैं या संजीदा हैं और जल्द ही वह उनके लिए भी चाय ले आया। हालांकि घर के बाहर पटाखों की आवाज सुनकर जरूर उन्हें कुछ गुस्सा आया और बोले, 'यह मुख्यमंत्री का घर है, कोई आम सड़क नहीं। यहां पटाखे फोडऩे की अनुमति नहीं है, बाहर जाकर उन्हें ये सब बंद करने के लिए बोलिए।'
एक पत्रकार ने नीतीश से पूछा, 'तो 2014 में दिल्ली?' इस पर नीतीश ने कहा, 'मैं रामचंद्र गुहा की काफी इज्जत करता हूं, लेकिन मुझे यह बताना होगा कि मैं उतनी दूर की नहीं सोचता हूं। मेरे लिए प्रशासन और वह भी अच्छा प्रशासन प्राथमिकता है। मेरा असली काम अब शुरू होता है।'
कुमार ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में दोबारा आती है, तो वह ऊर्जा क्षेत्र पर ध्यान देगी। इस बारे में उन्होंने कहा, 'जी हां! इस पर हमने काम करना भी शुरू कर दिया है। इसमें सबसे बड़ा मसला कोयला आपूर्ति है। लेकिन बरौनी संयंत्र के विस्तार के तहत उसमें 250 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयां और लगाई जाएंगी। कई और परियोजनाएं भी चल रही हैं। इनके पूरा होने के बाद बिहार में बिजली की किल्लत नहीं रहेगी।'
अचानक उनकी नजर टीवी पर पड़ी। नीतीश बोले, 'पशुपति (रामविलास के छोटे भाई) करीब 17,000 वोट से हारा है। मैं उनके चुनाव क्षेत्र में गया। वहां इतनी भीड़ थी कि मैं बता नहीं सकता। मैंने वहां लोगों से कहा कि आप लोग पशुपति को चुनकर बार-बार विधानसभा में भेज देते हैं। लेकिन उसने बदले में आपके लिए किया क्या है? फिर मैंने पूछा कि क्या आप लोग विकास चाहते हैं, तो भीड़ ने हां में जवाब दिया। लेकिन जब मैंने कहा कि जदयू के इस उम्मीदवार के लिए वोट कीजिए, तो भीड़ ने चिल्लाकर जवाब दिया 'नहीं, कभी नहीं'।' नीतीश ने कहा, 'इस चुनाव में लोगों ने उम्मीद को वोट दिया है।'
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