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कंपनियों के लिए कामधेनु बन गया आईपीएल
आईपीएल को लेकर भले ही हाल में विवादों का दौर चल रहा हो लेकिन कंपनियों के लिए तो यह अपने प्रचार का बड़ा मंच साबित हुआ। कैसे बता रहे हैं
ऋषभ कृष्ण सक्सेना /  April 26, 2010

बॉलीवुड की किसी पल-पल रंग बदलती 'थ्रिलर' की तरह आईपीएल भी दर्शकों के लिए चटखारे का सबब हो गया है और राजनीतिक पलटन के लिए 'अछूत'।

लेकिन आईपीएल की चकाचौंध के पीछे सब कुछ स्याह ही नहीं है। इसके दीवाने दर्शकों की जेब पर नजर रखने वाली कंपनियां इसे हाथोहाथ लेती रही हैं और यह टूर्नामेंट उनके लिए दुधारू गाय साबित हुआ है।

कंपनियों की पसंद

आईपीएल का कोई भी मैच याद कीजिए, एक के बाद एक ब्रांड की भरमार है। कभी सैमसंग और एलजी के 3 डी टेलीविजन की झलकी स्क्रीन पर दिखती है तो कभी इन्हीं कंपनियों के फोन की घंटी बजने लगती है। कभी नोकिया आती है और कभी एयरटेल।

वोडाफोन के जूजू एक बार फिर अपनी खिलखिलाहट भरी शरारतों के साथ आईपीएल के मुरीदों के सामने नमूंदार होते हैं और आइडिया सेल्युलर 'उंगली क्रिकेट' का शगल परोसती है। वीडियोकॉन, माइक्रोमैक्स, मैक्स, कार्बन, जी फाइव जैसी देसी हैंडसेट कंपनियों के विज्ञापन भी कमोबेश हर 5 मिनट में टेलीविजन पर दोहरा दिए जाते हैं।

मार्केटिंग की पिच पर घमासान

तीसरे दौर के आईपीएल में विज्ञापन की पिच पर कंपनियां एक दूसरे से इक्कीस साबित होने की फिराक में जुटी रहीं। आईपीएल की सह प्रायोजक सैमसंग इंडिया के उप प्रबंध निदेशक रवींद्र जुत्शी इसे सही भी मानते हैं।

वह कहते हैं कि उनकी कंपनी ने अपने 3 डी टेलीविजन आईपीएल के समय में ही उतारे ताकि खेल की स्पर्धाओं को इसके साथ देखने का अनुभव दर्शकों को इसकी अहमियत समझा सके। कंपनी ने अपने मार्केटिंग बजट का अच्छा खासा हिस्सा आईपीएल पर खर्च किया है और इस दौरान 6 नए मार्केटिंग अभियान पेश किए।

एलजी इंडिया भी इस मामले में पीछे नहीं है। कंपनी के 3 डी टेलीविजन अभी बाजार में नहीं आए हैं, लेकिन अक्षय कुमार इसके टीजन विज्ञापनों में आईपीएल के दौरान ही दिखने लगे।

कंपनी के मुख्य मार्केटिंग अधिकारी एल के गुप्ता कहते हैं, 'आईपीएल के पास दर्शकों की कोई कमी नहीं है, इसलिए विज्ञापन के लिहाज से यह शानदार मौका है। हमने आईपीएल के लिए पहले जो मार्केटिंग बजट रखा था, उसमें 10 फीसदी इजाफा कर दिया है।'

सबसे आगे दूरसंचार

वैसे तो तकरीबन हर क्षेत्र की कंपनी आईपीएल के दौरान प्रचार अभियान चलाने को तवाो दे रही है। लेकिन जानकारों के मुताबिक आईपीएल में इस बार दूरसंचार कंपनियों ने सबसे ज्यादा रकम खर्च की, जो पिछले साल के मुकाबले डेढ़ गुना है।

एफएमसीजी, वित्त और बीमा भी इसमें खर्च के मामले में पीछे नहीं रहीं।  इसका सबसे बड़ा फायदा फायदा आईपीएल और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को हो भी रहा है। विश्लेषक बताते हैं कि इस साल 45 दिन के टूर्नामेंट से आईपीएल को 634 करोड़ रुपये की कमाई होगी और बोर्ड को 500 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का मुनाफा होगा।

बहरहाल कंपनियों के आक्रामक विज्ञापन अभियान की वजह से टूर्नामेंट के आधिकारिक प्रसारणकर्ता सेट मैक्स के भी वारे न्यारे हैं। कहा जा रहा है कि इस सत्र में आईपीएल से सेट मैक्स को तकरीबन 1,000 करोड़ रुपये की कमाई होगी।

पहले तीन सत्रों में उसकी कुल कमाई 2,100 करोड़ रुपये के करीब पहुंचने की उम्मीद है। इस बार 10 सेकंड के विज्ञापन के लिए उसने 4 से 5 लाख रुपये वसूले। आईपीएल की टीवी रेटिंग भी बेनजीर रही। टैम मीडिया रिसर्च के मुताबिक रेटिंग 4.7 के आसपास रही और कुछ मैचों में तो 7.9 तक पहुंच गई है।

देसी हैंडसेट निर्माता कंपनी माइक्रोमैक्स के कारोबार निदेशक विकास जैन कहते हैं, 'हिंदुस्तान में कोई भी टेलीविजन कार्यक्रम लगातार 45 दिन तक नहीं चलता है और उसमें लगातार दिलचस्पी तो किसी की भी नहीं रहती है। लेकिन आईपीएल को रोजाना रात 8 बजे दर्शक हर हाल में मिल रहे हैं।' जाहिर है कंपनियों के लिए विज्ञापन देने के लिए यह सबसे कारगर जरिया नजर आ रहा है।

नए-नए शाहकार

माइक्रोमैक्स ने अपने खास हैंडसेट आईपीएल के दौरान ही उतारे। इनमें गेमिंग हैंडसेट और यूनिवर्सल रिमोट वाला हैंडसेट शामिल है और उसने अपने ब्रांड ऐंबेसडर अक्षय कुमार पर से पर्दा भी आईपीएल में ही उठाया।

जैन कहते हैं, 'अपने कुल मार्केटिंग बजट का करीब 18 फीसदी हम इसी पर खर्च कर रहे हैं। इसमें हरेक मैच कम से कम 4 घंटे का होता है और कोई दर्शक दिन में केवल एक मैच देखेगा तो भी हम 4 घंटे उसे अपने उत्पाद दिखा सकते हैं।'

आईपीएल मैचों के दौरान नई हैंडसेट निर्माता कार्बन मैदान पर सबसे ज्यादा नजर आई, चाहे वह बाउंड्री वॉल हो या बाउंड्री रोप या पिच मैट, आपको कार्बन का नाम सभी 60 मैचों में नजर आ रहा है।

कंपनी के प्रबंध निदेशक प्रदीप जैन ने कहा, 'क्रिकेट से हम पहले से ही जुड़े हैं, इसलिए आईपीएल में चूकना मुमकिन ही नहीं है। इस स्पर्धा को सबसे ज्यादा टीवी दर्शक मिल जाते हैं। इसलिए हमने अपने मार्केटिंग बजट का 20 से 25 फीसदी हिस्सा इस साल आईपीएल पर ही खर्च किया है।'

इसी तरह वीडियोकॉन मोबाइल्स भी आईपीएल को भुनाने में पीछे नहीं ही। वीडियोकॉन समूह तो आईपीएल में ऑन-एयर प्रयोजक भी है और मुंबई इंडियंस का आधिकारिक साझेदार भी।

कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी राहुल गोयल ने बताया कि आईपीएल के दौरान कंपनी ने नए फोन उतारकर नया टीवी विज्ञापन अभियान शुरू किया और जैसे-जैसे आईपीएल की खुमारी बढ़ती गई। कंपनी का विज्ञापन अभियान भी तेजी पकड़ता गया।

विज्ञापन नए-नए

आईपीएल के साथ विज्ञापन अभियान शुरू करना कंपनियों में नया चलन नजर आया। वोडाफोन के जूजू तो खैर आईपीएल के दिनों में ही आपको गुदगुदाने आते हैं, लेकिन आइडिया का उंगली क्रिकेट नया तजुर्बा है। वोडाफोन ने इस बार के आईपीएल में जूजू के 20 नए विज्ञापन उतारे।

उंगली क्रिकेट में आइडिया के ब्रांड ऐंबेसडर अभिषेक बच्चन भी बेहद आसान सवाल पूछते दिखे, मसलन आज के मैच में चीयरलीडर्स कितनी बार नाचेंगी? या बल्लेबाज कितनी बार बल्ले बदलेंगे? या अंपायर कितनी नो बॉल देंगे?

इसी तरह कार्बन के ब्रांड ऐंबेसडर के तौर पर वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर की जोड़ी भी स्ट्रैटेजिक टाइम आउट के दौरान मैदान के विशालकाय स्क्रीन पर उभरी। मैक्स मोबाइल के साथ महेंद्र सिंह धोनी के जुड़ने का पता भी आईपीएल शुरू होने पर ही चला।

जुगलबंदी की जुगत

कंपनियां आईपीएल टीमों के साथ जुड़ने के लिए भी बेकरार दिखीं। विजय माल्या के यूबी समूह के पास रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम तो पहले ही है, उसके अलावा भी वह 4 टीमों से जुड़ गया।

इनमें किंग्स इलेवन पंजाब सबसे नई टीम है। इसी तरह आइडिया सेल्युलर की मुहर पिछले साल मुंबई इंडियंस के खिलाड़ियों की जर्सी पर थी। इस बार उसने इसके लिए डेक्कन चार्जर्स और डेल्ही डेयरडेविल्स को चुना।

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