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तीसरे आयाम को कीजिए सलाम
मनोरंजन के नाम पर बड़े पर्दे पर फिल्में हैं या छोटे पर्दे पर सोप ओपेरा। लेकिन अब इसमें तीसरा आयाम जुड़ रहा है - रोमांच का। इसी रोमांच से मुनाफा निचोड़ने के लिए कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां 3 डी टेलीविजन ला रही हैं, जो उनके कारोबार को भी नया आयाम दे सकता है। बता रहे हैं
ऋषभ कृष्ण सक्सेना /  April 06, 2010

एक नामी आईटी कंपनी में काम करने वाले शिखर गुप्ता परेशान थे क्योंकि ब्लॉकबस्टर फिल्म 'अवतार' देखने की उनकी तमन्ना पूरी नहीं हो सकी।

दरअसल उन्हें यह फिल्म 3 डी स्क्रीन वाले थिएटर में ही देखनी थी और उसके लिए वह वक्त नहीं निकाल सके। लेकिन अब शिखर 'अवतार' 3 डी स्क्रीन पर देखने जा रहे हैं, वह भी अपने ड्रॉइंगरूम में। इसके लिए वह शुक्रिया अदा करते हैं 3 डी टेलीविजन का।

सबसे पहले भारतीय बाजार में ये टेलीविजन पेश करने वाली कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के उप प्रबंध निदेशक रवींद्र जुत्शी मुस्कराते हुए कहते हैं, 'मैं भी अब 'अवतार' देखूंगा। लेकिन शुरुआत 'क्लैश ऑफ द टाइटंस' से करूंगा, जो वार्नर ब्रदर्स की ओर से रिलीज हो रही है।'

किसी वक्त 3 डी फिल्म के नाम पर भारतीय दर्शक केवल 'छोटा चेतन' देखकर सब्र कर लेते थे, वह भी 2 डी स्क्रीन पर। लेकिन 'अवतार' जैसी फिल्मों ने 3 डी का चस्का भारत के दर्शकों को भी लगा दिया है और कंपनियों को नया बाजार मिल गया है।

हालांकि जुत्शी नहीं मानते कि उनकी कंपनी ने 'अवतार' की सफलता को भुनाने के लिए सबसे पहले 3 डी टेलीविजन बाजार में उतारा है। वह कहते हैं, 'यह महज इत्तफाक ही है कि हमारी 3 डी शृंखला 'अवतार' के फौरन बाद आई है। लेकिन इसका 'अवतार' से कोई लेना देना नहीं है क्योंकि इसे उतारने का फैसला हम पहले ही कर चुके थे। वैसे भी केवल एक फिल्म से बाजार का रुख नहीं बदलता।'

लेकिन आखिर 3 डी किस चिड़िया का नाम है और इससे टीवी देखने का अनुभव किस तरह बदल जाएगा। दरअसल आम तौर पर पर्दे पर हम किसी भी चित्र के दो आयाम लंबाई और चौड़ाई ही देखते हैं। लेकिन खास तकनीक की मदद से 3 डी में हमें मोटाई या गहराई का आभास भी होने लगता है, जिससे चित्र जीवंत लगने लगता है।

आयाम पर संग्राम

हालांकि सैमसंग ही नहीं, सोनी इंडिया और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की भी देसी बाजार में जल्द ही 3 डी टीवी उतारने की मंशा है। जापानी कंपनी पैनासॉनिक भी ऐसा ही इरादा जता रही है। 

लेकिन अभी मैदान में उतरने में वे कुछ वक्त लगाएंगी। एलजी जून में इस बाजार में उतरने जा रही है और सोनी भी इस साल मई या जून में इस बाजार में कदम रखेगी। अलबत्ता सैमसंग इस मामले में बाजी मार चुकी है। उसने एलईडी, एलसीडी और प्लाज्मा सेट में 3 डी के 10 मॉडल उतारे हैं। 

कंपनी को भरोसा है कि पहले उतरने की वजह से बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा उसके पास आ जाएगा। इसके लिए मार्केटिंग में भी वह कोताही नहीं बरत रही है। कंपनी देश भर में 400 चुनिंदा शोरूम में 3 डी जोन भी बनाने जा रही है। 

इनमें बड़े 3 डी पैनल लगाए जाएंगे और ग्राहक उसमें 3 डी का अनुभव लेंगे। इसके अलावा थिएटरों में भी वह प्रचार में कसर नहीं छोड़ेगी। कंपनी अपने कुल मार्केटिंग बजट का 3.25 से 4 फीसदी हिस्सा इसके प्रचार पर लगाएगी।

परवान चढ़े अरमान

सबसे पहले बाजार में उतरने की वजह से उत्पादन के मोर्चे पर भी सैमसंग हावी है। उसके नोएडा संयंत्र में 3 डी टीवी जोर शोर से बनाए जा रहे हैं और पिछले हफ्ते उनकी बिक्री भी शुरू हो गई।

जुत्शी यह नहीं बताते कि सालाना कितने 3 डी टीवी सेट बनाने की इस संयंत्र की क्षमता है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि पहले साल में कंपनी तकरीबन 30,000 सेट बेच लेगी, जो 3,00,000 एलईडी टीवी के उसके बिक्री लक्ष्य का 10 फीसदी है।

वैसे 3 डी टीवी की कीमत देखी जाए तो बिक्री का 30,000 का आंकड़ा आपको कम नहीं लगेगा। कंपनी का सबसे सस्ता 3डी एलसीडी 1,29,000 रुपये का है और सबसे महंगा 3 डी एलईडी 4,35,000 रुपये में आ रहा है।

दिलचस्प है कि देश में ये टीवी बनाने वाली वह अकेली कंपनी है। एलजी इंडिया के कारोबार प्रमुख (होम एंटरटेनमेंट) रोहित पंडित ने बताया कि शुरुआत में कंपनी ये टीवी कोरिया से आयात करेगी और सोनी ने बाजार में उतरने से पहले कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। पंडित यह भी नहीं बताते कि उनकी कंपनी इन टेलीविजन की कीमत क्या रखेगी।

पर ग्राहक हैं कहां

सवाल यह है कि इतना महंगा टीवी कोई क्यों खरीदेगा? जुत्शी को लगता है कि उनके कई एलसीडी और एलईडी ग्राहक इस टीवी की तरफ खिंच जाएंगे।

वह कहते हैं, 'महंगे उपकरण खरीदने वाले ग्राहक इसे पसंद कर सकते हैं। आजकल का युवा बेहतर तकनीक पसंद करता है। एलसीडी खरीदने वाले भी इसकी ओर खिंच सकते हैं क्योंकि सबसे महंगे एलसीडी और सबसे सस्ते 3 डी एलसीडी की कीमत में खास फर्क नहीं है।'

एलजी का भी मानना है कि 3 डी का बाजार उभर रहा है। कंपनी को उन ग्राहकों से भी खासी उम्मीद है, जिन्हें नई नवेली तकनीक या उपकरण को सबसे पहले घर लाने का जुनून है। हालांकि बिक्री के बारे में कंपनी ने अभी कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है। लेकिन कंपनी प्रवक्ता कुल मार्केटिंग बजट का तकरीबन 4 फीसदी इसके प्रचार पर हिस्सा खर्च करने की बात कह रहे हैं।

धुंधली सी है तस्वीर

अलबत्ता विश्लेषकों को इस बाजार की बुनियाद कुछ कमजोर लग रही है। उनके मुताबिक जुनून भी बिक्री कब तक बढ़ाएगा, जब 3 डी कंटेंट ही बाजार में मौजूद नहीं है।

मुंबई की एक विश्लेषक ने तो यहां तक कहा, 'नई नवेली  तकनीक से कंपनियां अपनी ब्रांड छवि उजली करने की कोशिश कर रही हैं। 3 डी इसी की कवायद है।' वैसे भी 3 डी कंटेंट तैयार करना 2 डी कंटेंट के मुकाबले महंगा पड़ता है और भारत में इसके लिए शायद ही कोई तैयार हो।

लेकिन इस कमी को पूरा करने के लिए लिए ज्यादातर कंपनियों को इस साल होने वाली खेल स्पर्धाओं पर भरोसा है। आईपीएल के सेमी फाइनल और फाइनल मैच फुल हाई डेफिनिशन 3 डी तकनीक में प्रसारित किए जाएंगे। इसके बाद फुटबॉल विश्व कप आने वाला है और अंत में दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेल हैं, जिन्हें फुल एचडी फॉर्मेट में प्रसारित करने की मंशा शीला दीक्षित सरकार जता रही है।

फिर भी 3 डी कंटेंट की कमी होती है, तो सैमसंग के पास उसका इलाज है। जुत्शी '3 डी प्रोसेसर' का नाम लेते हैं, जो उनके मुताबिक जादू की छड़ी है। कंपनी के 3 डी टीवी रिमोट में एक खास बटन लगा होगा, जिसे दबाते ही 2 डी कंटेंट भी 3 डी फॉर्मेट में दिखने लगेगा।

जुत्शी कहते हैं, 'अगर आपके पास हमारा 3डी टीवी है तो यह बटन दबाते ही आप किसी भी सामान्य कार्यक्रम या फिल्म को 3 डी के अंदाज में देखने लगेंगे। बेशक यह पूरी तरह 3 डी नहीं होगा, लेकिन उसके 85 फीसदी करीब तक होगा।' जुत्शी का दावा है कि कोई प्रतिस्पर्द्धी कंपनी इस तकनीक के साथ नहीं आ रही है।

लेकिन दिक्कतें दूसरी भी हैं। सैमसंग एक 3डी टीवी के साथ 3 डी ऐक्टिव ग्लासेज यानी चश्मे का एक सेट दे रही है। परिवार बड़ा है, तो आपको ऐसे हरेक चश्मे के एवज में कम से कम 8,000 रुपये खर्च करने होंगे। आप पुराने एलईडी टीवी के बदले 3 डी टीवी पर छूट पाने की ख्वाहिश भी न रखें क्योंकि आपको पूरी कीमत देकर यह टीवी खरीदना होगा।

क्या है 3 डी

जब हमें चित्र में लंबाई और चौड़ाई के साथ गहराई या मोटाई भी दिखने लगे, तो वह त्रिआयामी या 3 डी चित्र हो जाता है। इसके लिए खास कैमरे या कंप्यूटर तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे हमारी आंखें एक ही तस्वीर को दो अलग कोणों से देखने लगती हैं।

हाल ही में अवतार, एलिस इन वंडरलैंड, मॉन्सटर्स वर्सज एलियंस और क्लैश ऑफ द टाइटंस जैसी फिल्मों ने इसे चर्चा में ला दिया है। इस साल खेलों का लंबा कैलेंडर है, जिससे 3 डी टीवी कंपनियों को खासी उम्मीद है।

आईपीएल के अंतिम 4 मैच 3 डी तकनीक में प्रसारित किए जाएंगे। फुटबॉल विश्व कप का प्रसारण इसी तरह होगा और अक्टूबर में दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों का भी 3 डी प्रसारण होने की उम्मीद है।

किसकी पिक्चर आएगी कब

कंपनी                     कब उतारेगी 3 डी
सैमसंग                     उतार चुकी
एलजी                           जून
सोनी                          मई-जून
पैनासॉनिक           अभी तय नहीं
हायर                           जून
स्त्रोत : कंपनी एवं उद्योग सूत्र

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