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नई रणनीति से उबरने का हौसला
आईसीआईसीआई बैंक की नर्ई रणनीति का फायदा धीरे-धीरे दिख रहा है
शरत चेल्लुरी / मुंबई January 31, 2010

भारत में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई के तिमाही नतीजों में एक बार फिर मुनाफे में  कमी नजर आ रही है। दिसंबर तिमाही में मुनाफे में 13.5 फीसदी की कमी आई है। यह गिरावट पिछली सात तिमाहियों में सबसे अधिक है। मुनाफे  में कमी के पीछे मुख्य वजह बैंक द्वारा बांटे जाने वाले कर्जों में कमी और पिछले साल बैंक की ट्रेजरी इनकम घटना है। कर्र्ज लेने की र$फतार कम होने और एनपीए पर नियंत्रण लगाने की कोशिशों के चलते पांचवीं बार बैंक का कारोबार घटा है।

 तीसरी तिमाही नतीजों से भले ही बाजार में उत्साह नहीं है, लेकिन व्यापारिक माहौल में स्थिरता जरूर आ रही है। चौथी तिमाही के लिए बैंक ने अपनी योजनाओं पर काम करना शुरू कर दिया है। इस तिमाही में बैंक का मुख्य जोर लागत कम करने, सीएएसए अनुपात सुधारने, साख की गुणवत्ता में सुधार और पूंजी की बचत पर है, और इसका असर होने लगा है। बैंक का परिचालन व्यय काबू में है। कम लागत वाली सीएएसए जमाओं के अनुपात में बढ़त होने से बैंक के मुनाफे में सुधार होने लगा है। अगर सब कुछ सही रहता है, तो बैंक अगले वित्त वर्ष में मुनाफे में कमी के क्रम को पलटने में कामयाब हो सकता है। इसका असर बैंक के शेयर मूल्यांकन पर भी होगा।

उम्मीदें बरकरार
खुदरा ऋण में ग्राहकों की तरफ से भुगतान और ओवरसीज पोर्टफोलियो की वजह से दिसंबर तिमाही में बैंक के ऋण वितरण में गिरावट आई। पिछले दो सालों में बैंक केकुल ऋण में औसत रूप में 8.8 फीसदी की गिरावट रही है। इस अवधि में बैंक की शुद्घ ब्याज आय में 2.5 फीसदी की मामूली बढ़त हुई। बैंक के कुल ऋण उठाव में कमी आई है, लेकिन बैंक का जोर सुरक्षित ऋण साधनों पर है। जमा के मामले में बैंक इस तिमाही में भी कोई खास प्रदर्शन नहीं दिखा सका। पिछले दो सालों में बैंक की जमा में औसत रूप में 7.25 फीसदी की कमी आई है। बैंक ने कम लागत वाली जमाओं पर अपना ध्यान लगाया है। इस वजह से सीएएसए जमाओं में पिछले दो सालों में 16 फीसदी की औसत उछाल आई है। दिसंबर 2009 तक बैंक की कुल जमा में सीएएसए जमा की हिस्सेदारी 39. 6 फीसदी हो गई। हाल ही में बैंक अपनी कुछ उच्च लागत वाली बड़ी जमाओं को हटाने में सफल रहा है। होम लोन और कार लोन के वितरण में बढ़ोतरी हुई है। इसके आगे भी बने रहने की संभावना है। आने वाली कुछ तिमाहियों में प्राथमिक  क्षेत्रों और कॉरपोरट ऋणों के बढऩे से बैंक के कुल ऋण वितरण में बढ़ोतरी होगी।

गैर-ब्याज आमदनी
बॉन्ड आय के मामले में बैंक को दिसंबर 2009 तिमाही में 26 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। एक साल पहले इसी तिमाही में बैंक को 976 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। बैंक के गैर-ब्याज आमदनी में 33.5 फीसदी की गिरावट आई है जिसका असर बैक के कुल मुनाफे पर हुआ है। बैंक की लागत-आय (कॉस्ट टू इनकम) अनुपात में दिसंबर तिमाही में 36.5 फीसदी का सुधार आया है। बैंक का शुद्घ मुनाफा साल दर साल आधार पर इस तिमाही में 13 फीसदी घटकर 1,101 करोड़़ रुपये हो गया।

Keyword: ICICI Bank, Q3 results,
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