| निर्यात पर नियंत्रण चाहता है कपड़ा उद्योग | | कपास की कीमतें स्थानीय बाजार में 15 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में 24 प्रतिशत बढीं | | | चंदन किशोर कांत / मुंबई November 12, 2009 | | | | |
कपास निर्यात के लिए बुकिंग जारी है। अगर यही गति रही तो चालू कपास वर्ष में भारत से करीब 80 लाख गांठ (1 गांठ 170 किलो का) कपास निर्यात होने का अनुमान है।
टेक्सटाइल उद्योग ने इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उसका कहना है कि अगर निर्यात होता रहा तो 2007-08 की स्थिति हो जाएगी, जब कुल निर्यात 100 लाख गांठ तक पहुंच गया था और कपास के दाम ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गए थे। इसके चलते उस साल स्थानीय कारोबारियों के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से मुकाबला करना कठिन हो गया था।
इसका मतलब यह हुआ कि भारत इस साल के अंत तक पिछले साल की 35 लाख गांठ निर्यात की तुलना में 125 प्रतिशत ज्यादा कपास का निर्यात कर सकता है। निर्यात में बढ़ोतरी की वजह है कि इस साल वैश्विक कपास उत्पादन में कमी आई हैऔर खपत में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
अभी तक जो संकेत मिल रहे हैं, उससे घरेलू बाजार में स्थिति गंभीर लग रही है। पिछले साल की तुलना में कपास की कीमतों में 15 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। भारत में कपास वर्ष 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक चलता है।
कॉन्फेडरेशन आफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री के चेयरमैन शिशिर जयपुरिया ने कहा, 'निर्यात पर कम से कम तीन महीने के लिए (फरवरी तक) प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, जिससे मौजूदा हालात में सुधार आ सके। निर्यात के लिए पहले ही 15 लाख गांठ कपास की खरीद हो चुकी है। इसकी वजह से हाजिर बाजार में कीमतें 25,000 प्रति कैंडी पर पहुंच गई हैं। अगर इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाता है तो निर्यात बढ़कर 80 लाख गांठ पर पहुंच सकता है।'
पिछले साल अक्टूबर-नवंबर के दौरान कपास की कीमतें 21,000-22,000 रुपये प्रति कैंडी थीं। कपड़ा मंत्रालय के कपास सलाहकार समिति (सीएबी) के मुताबिक 2009-10 में उत्पादन 305 लाख गांठें रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 290 लाख गांठ की तुलना में 5.17 प्रतिशत ज्यादा है।
कपड़ा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'कपास के निर्यात पर रोक लगाने की कोई योजना नहीं है। अंतरराष्ट्रीय दामों में बढ़ोतरी की वजह से स्थानीय बाजार में दाम बढ़ रहे हैं। देश में इस सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में कपास है और अग्रिम स्टॉक भी 70 लाख गांठ है।' स्थानीय बाजार में कपास की खपत 240 लाख गांठ के करीब है।
अधिकारी ने कहा, 'अगर हम 80 लाख गांठ कपास का निर्यात कर भी देते हैं तो घरेलू उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।' हालांकि उद्योग जगत के जानकार इससे सहमत नहीं हैं। वे गुणवत्ता और मात्रा के आधार पर अग्रिम स्टॉक की कपास पर सवाल उठा रहे हैं, जो उनके मुताबिक केवल कागजों पर है।
इंटरनैशनल कॉटन एडवाइजरी कमेटी (आईसीएसी) के हाल के आंकड़ों के मुताबिक क पास के वैश्विक उत्पादन में 4.53 प्रतिशत की कमी के अनुमान हैं, जो पिछले 5 साल की तुलना में सबसे कम है। वहीं वैश्विक खपत में 2.16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कपास उत्पादन में गिरावट की प्रमुख वजह चीन में उत्पादन में 16 प्रतिशत की कमी है।
भारत, अमेरिका, पाकिस्तान और आस्ट्रेलिया में उत्पादन में बढ़ोतरी के अनुमान हैं, जबकि चीन, ब्राजील, तुर्की और मैक्सिको में उत्पादन में कमी आएगी। वैश्विक बाजार में इस समय कपास की कीमतें 63.9 यूएस सेंट प्रति पाउंड है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 24 प्रतिशत ज्यादा है।
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