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बैगपाइपर से उतारेगी डियाजिओ का सुरूर
बाजार में बैगपाइपर की पकड़ तेजी से मजबूत करने के लिए कंपनी ने इसकी ब्रांड इमेज पर काफी निवेश किया है
सीमा सिंधु /  November 02, 2009

उन दोनों में उतना ही फर्क है, जितना चाक और पनीर में। लेकिन दोनों में एक खास वजह से समानता भी है- 2 महीने पहले तक दोनों संभावित सहयोगी थे, लेकिन अब बाजार में जगह बनाने के लिए एक-दूसरे के कड़े प्रतिद्वंद्वी बन गए हैं।

कुछ ही महीने पहले तक यूनाइटेड स्पिरिट्स  लिमिटेड (यूएसएल) और डियाजिओ एक दूसरे को सहयोगी के रूप में देख रहे थे। लगभग एक वर्ष तक दोनों कंपनियां आपसी सहयोग के लिए बातचीत में मशगूल रहीं।

विजय माल्या की स्वामित्व वाली कंपनी यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (यूएसएल) ने शराब उत्पादन के क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी डियाजिओ को 14.9 प्रतिशत शेयर बेचने की इच्छा जताई थी। लेकिन मूल्यांकन मतभेद की वजह से बात बनते-बनते रह गई।

वैसे समान क्षेत्र की इन दोनों कंपनियों में कोई तुलना नहीं हो सकती। कम-से-कम आमदनी के मामले में तो यूएसएल डियाजिओे के आस-पास भी नहीं फटकती। डियाजिओ के प्रमुख ब्रांड जॉनी वाकर्स की दुनिया भर के बाजारों में सालाना बिक्री लगभग 21,000 करोड़ रुपये की होती है, जो यूएसएल के सबसे बड़े ब्रांड बैगपाइपर की बिक्री की तुलना में लगभग 7 गुनी है।

लेकिन मात्रा के मामले में यह अंतर ज्यादा नहीं है। दुनिया की सबसे बड़ी शराब कंपनी होने के नाते डियाजिओ सालाना 11 करोड़ पेटियों का उत्पादन करती है, जबकि दूसरे नंबर की कंपनी पेर्नो रिकार्ड सालाना 9.7 करोड़ पेटी उत्पादन करती है।

उत्पादन के मामले में यूएसएल दुनिया में तीसरे नंबर की कंपनी है, जिसका सालाना उत्पादन 9 करोड़ पेटी है, व्हाइट ऐंड मैके के अधिग्रहण के बाद इसकी उत्पादन क्षमता में खास इजाफा हुआ है। स्कॉच व्हिस्की बनाने वाली कंपनी बालाजी डिस्टिलरीज उत्पादन के मामले में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कंपनी है।

लेकिन यूएसएल की महत्वाकांक्षा अब बढ़ गई है। इस कंपनी ने तय किया है कि मार्च 2011 तक बिक्री के मामले में यह दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए यूएसएल ने बैगपाइपर ब्रांड की पहुंच बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

यूएसएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विजय के रेखी कहते हैं कि पिछले 3-5 वर्षों के दौरान कंपनी का कारोबार साल-दर-साल 20 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। यह दर आगे भी बरकरार रहने की उम्मीद है। इस हिसाब से अगले 2-3 वर्षों में यूएसएल दुनिया की सबसे बड़ी शराब कंपनी बन जाएगी।

रेखी कहते हैं, 'हमारी कोशिश प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और अपने ब्रांड को प्रोत्साहित करने की है। हम किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं और इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए हम बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के नए तरीके भी ईजाद कर रहे हैं।' रेखी यूएसएल की उत्पादन क्षमता, वितरण और विपणन कौशल के भरोसे यह दांव लगा रहे हैं।

कंपनी का दावा है कि इसके प्रमुख ब्रांड बैगपाइपर की बिक्री इस वर्ष 1.7 करोड़ पेटी तक पहुंच जाएगी, इससे जॉनी वाकर (1.68 करोड़ पेटी) बिक्री के मामले में पिछड़ जाएगा। इस हिसाब से यूएसएल  व्हिस्की की बिक्री के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष बैगपाइपर की बिक्री 1.5 करोड़ पेटी हुई थी। यह इसके पहले वाले साल हुई बिक्री की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है।

दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनने की राह में यूएसएल ने कई अहम कदम उठाए हैं। मसलन इसने बैगपाइपर ब्रांड का 60 मिली वाला पैक बाजार में उतारा है, जिसकी कीमत महज 22 रुपये हैं। यह रणनीति सस्ते एवं देसी शराब पीने वाले लोगों को भारतीय विदेशी शराब (आईएमएफएल) खंड की ओर मोड़ने के लिए अपनाई गई है।

बैगपाइपर की नई ब्रांड इमेज भी बनाई गई है, जिसे ब्रिटिश डिजाइन कंपनी ने तैयार किया है। बैगपाइपर की बाजार में पकड़ तेजी से मजबूत करने के लिए कंपनी ने इसके ब्रांड इमेज पर काफी निवेश किया है। रेखी कहते हैं, 'हमें पूरा भरोसा है कि आगामी कुछ वर्षों के दौरान बैगपाइपर बाजार में अपनी पहुंच तेजी से बढ़ाएगी।'

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