बिजनेस स्टैंडर्ड - रोमांच के सफर पर फुटबॉल की दुनिया
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रोमांच के सफर पर फुटबॉल की दुनिया

ध्रुव मुंजाल /  June 13, 2018

उस शाम चल रहे रोमांचक फुटबॉल मुकाबले में अचानक कुछ ऐसा हुआ कि हर कोई अवाक रह गया। सर्जियो रामोस ने हमें बानगी दिखा दी थी कि कुछ ही दिन बाद शुरू होने वाले विश्व कप में कैसे हालात हो सकते हैं? चैंपियंस लीग के खिताबी मुकाबले में रियल मैड्रिड के कप्तान रामोस ने जापानी जूडो खिलाडिय़ों को भी मात देने वाले अंदाज में लिवरपूल के मोहम्मद सालेह को इस तरह दबोचा कि उनका दाहिना कंधा बुरी तरह चोटिल हो गया। अब सालेह कुछ हफ्तों के लिए मैदान से बाहर बैठने को मजबूर हैं। इसका यह मतलब है कि मिस्र की टीम को विश्व कप में अपने इस दिग्गज खिलाड़ी के बगैर ही अभियान शुरू करना होगा। हालांकि समूचे मिस्र को यकीन है कि सालेह जल्द ही फिट होकर विश्व कप टूर्नामेंट के बीच में मैदान पर लौट आएंगे। 

 
हालांकि मिस्र को यह ध्यान रखना होगा कि फुटबॉल विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में अपने दिग्गज खिलाडिय़ों की फिटनेस को लेकर जल्दबाजी करना उल्टा भी पड़ सकता है। सालेह की टीम 2006 के विïश्व कप में इंगलैंड की तरफ से अपने स्टार खिलाड़ी वेन रूनी को लेकर बरती गई जल्दबाजी के नतीजों को सबक के तौर पर याद रख सकती है। थोड़ी सी जल्दबाजी ने रूनी और इंगलैंड दोनों का विश्व कप अभियान निराशाजनक ढंग से खत्म कर दिया था। वैसे सालेह का मामला अकेला नहीं है। ब्राजील के स्टार खिलाड़ी नेमार के पैर में लगी चोट को लेकर भी काफी आशंकाएं जताई जाने लगी थीं। हालांकि ब्राजील के लिए राहत की बात यह थी कि नेमार को यह चोट विश्व कप शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले लगी थी और उनके पास फिट होने के लिए अच्छा-खासा वक्त बाकी था। जो थोड़ी बहुत आशंका उनकी चपलता को लेकर थी, उसे भी नेमार ने गत दिनों क्रोएशिया के खिलाफ खेले गए मैच में शानदार गोल दागकर गलत साबित कर दिया।
 
फुटबॉल विश्व कप का ग्रुप-ए वाकई में अभियान शुरू करने के लिए एक रोचक जगह है। इस ग्रुप में रूस और सऊदी अरब को छोड़कर कोई भी कथित दमदार टीम मौजूद नहीं है।  वैसे रूस की भी हालत कोई खास अच्छी नहीं दिख रही है। विश्व कप के सफल आयोजन की कोशिशों में जुटे नगर निगम कर्मचारी आवार कुत्तों की समस्या से दो-चार हो रहे हैं। आवारा कुत्तों को बेहोश कर पकडऩे के लिए निगम कर्मचारी सड़कों पर ट्रैक्वलाइजर के साथ देखे जा सकते हैं। रूस की अर्थव्यवस्था की ही तरह यहां के फुटबॉल की भी हालत डांवाडोल ही लग रही है। अलेक्सान्द्र गोलोविन, डेनिस चेरिशेव और एलेन जागोएव निश्चित रूप से अच्छे खिलाड़ी हैं लेकिन एक टीम के तौर पर यह रूस की सबसे कमजोर टीमों में से एक मानी जा रही है। इसका साफ मतलब है कि उरुग्वे ही ऐसी टीम होगी जिसे हराना हर किसी का मकसद रहेगा। लातिन शैली वाले खेल के साथ उरुग्वे के स्टार स्ट्राइकर लुई सुआरेज के अजीबोगरीब अंदाज से पार पाना टीमों के लिए आसान नहीं होगा। भले ही इस ग्रुप में स्टार खिलाडिय़ों की मौजूदगी कम हो लेकिन जमीनी स्तर पर इस ग्रुप की टीमें बेहद रोमांचक फुटबॉल का प्रदर्शन करने की काबिलियत रखती हैं। आम तौर पर बड़े मुकाबलों में टीमें चालाकी भरा खेल दिखाने को तरजीह देती हैं जबकि दर्शकों को तो रोमांचक खेल की चाहत होती है।
 
सुआरेज के साथ बार्सिलोना क्लब में खेलने वाले लियोनल मेसी की राष्ट्रीय टीम अर्जेंटीना ने बढ़ते राजनीतिक दबावों के चलते पिछले हफ्ते इजरायल के खिलाफ होने वाले दोस्ताना मुकाबले को रद्द कर दिया। इस फैसले से फलस्तीन के लोग काफी खुश हैं जबकि यरूशलम में रहने वाले खेलप्रेमी निराश हैं। अनुभवी स्ट्राइकर गोन्जेलो हिगुआन की मानें तो 'अर्जेंटीना ने आखिरकार सही काम किया है।' हिगुआन 14 जून को रूस में इस विश्व कप का उद्घाटन मुकाबला खेलने के लिए उतरेंगे तो उन्हें 47 महीने पहले ïिवश्व कप के खिताबी मुकाबले में जर्मनी के हाथों मिली करारी शिकस्त की याद जरूर सताएगी। उस फाइनल में हिगुआन अर्जेंटीना की आक्रमण पंक्ति का हिस्सा नहीं बन पाए थे जिसने मेसी की टीम को ऐसा झटका दिया कि टीम अंत तक उबर ही नहीं पाई थी। लेकिन हिगुआन इस बार विश्व कप के लिए अधिक तैयार लग रहे हैं।
 
वैसे अर्जेंटीना के भीतर मेसी की श्रेष्ठता को चुनौती मिलने की उम्मीद कम ही है। मेसी ने पिछले चार वर्षों में ऐसा कोई काम नहीं किया है कि अर्जेंटीना के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के उनके ताज पर कोई खतरा पैदा हो। लेकिन फुटबॉल के दीवानों से भरे इस देश में मेसी की महानता पर मुहर लगाने के लिए विश्व कप की चमचमाती ट्रॉफी की दरकार जरूर है। पिछले एक दशक से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाडिय़ों में शुमार मेसी को भी पता है कि अपने खाते में विश्व कप को भी शामिल करने का यह संभवत: आखिरी मौका होगा।
 
दरअसल पिछले 50 वर्षों के 'वास्तव में महान' खिलाडिय़ों में से पेले, फ्रैंज बेकनबॉर, डिएगो मैराडोना, जिनेदिन जिदान और रोनाल्डो जैसे अधिकतर फुटबॉलर विश्व कप जीतने में सफल रहे हैं। इस लिहाज से अगर अर्जेंटीना या पुर्तगाल इस बार विश्व कप जीत पाने में नाकाम रहती हैं तो फिर मौजूदा दौर के दो सबसे बेहतरीन खिलाडिय़ों- मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो का करियर फुटबॉल की दुनिया का सबसे बड़ा खिताब अपने नाम किए बगैर  ही खत्म हो जाएगा। हालांकि अर्जेंटीना के मेसी को यह लग रहा होगा कि रोनाल्डो की तुलना में उनके विश्व चैंपियन बनने की संभावना थोड़ी अधिक है। इसकी वजह यह है कि अर्जेंटीना की टीम पुर्तगाल से बेहतर नजर आ रही है। क्रिस्टियानो रोनाल्डो भले ही क्लब स्तर पर गोल दागने के मामले में लगातार मेसी को चुनौती देते रहे हैं लेकिन पुर्तगाल की टीम में उनका साथ दे पाने वाले खिलाडिय़ों की कमी दिख रही है। नौ नंबर की जर्सी पहनने वाले रोनाल्डो को पुर्तगाल की तरफ से खेलते समय साथी खिलाडिय़ों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता है जिससे गोल दागने की उनकी क्षमता भी प्रभावित होती है। पुर्तगाल की समस्या इस बात से भी बढऩे वाली है कि उसे स्पेन, मोरक्को और ईरान जैसी टीमों के साथ एक ही ग्रुप में रखा गया है। वैसे पुर्तगाल के नॉकआउट दौर में पहुंचने की पूरी संभावना है। लेकिन ग्रुप चरण में स्पेन को पीछे छोड़ पाना उसके लिए भी काफी मुश्किल होगा। 
 
भले ही स्पेन की रक्षात्मक पंक्ति अब पहले जितनी धारदार नहीं रही है लेकिन अब भी यह टीम गेंद को देर तक अपने पास रखने की रणनीति पर ही कायम है। हाल के दिनों में हमने यह भी देखा है कि स्पेन सीधे हमलावर रुख अख्तियार करने से भी परहेज नहीं करता। खेल जगत के लोकप्रिय मुहावरे का इस्तेमाल करें तो स्पेन में युवाओं एवं अनुभव का बेहतरीन सम्मिश्रण है। इस्को, थिएगो और कोके के रूप में स्पेन के पास ऐसी तिकड़ी है जो दुनिया को जीतने का दम रखते हैं। इनके अलावा आंद्रेस इनिएस्ता और डेविड सिल्वा के रूप में दो शानदार खिलाड़ी भी हैं जो मनचाहे तरीके से खेल की रफ्तार तय कर सकते हैं। 
 
अगर सर्गेई रामोस, सर्जियो बस्केट्स, गेरार्ड पिके और डेविड डी गिया की रक्षा पंक्ति पर गौर करें तो एक बेहतर डिफेंस भी नजर आता है। इन खिलाडिय़ों की व्यक्तिगत क्षमता और एक टीम के तौर पर स्पेन की खास शैली को देखते हुए अगर कोई इस टीम पर दांव लगाता है तो इसमें कोई भी अचरज नहीं होगा। इस संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता है कि स्पेन एक बार फिर से 2010 का इतिहास दोहराते हुए विश्व चैंपियन बन जाए। जहां तक अर्जेंटीना का सवाल है तो यह टीम अपने सुपरस्टार मेसी के जादुई खेल पर कुछ ज्यादा ही निर्भर नजर आती है। पॉलो दाएबला, मैनुअल लैंजिनी, जियोवेनी लो सेल्सो और एंजेल डी मारिया जैसे इसके अधिकतर आक्रामक खिलाड़ी अक्सर एक-दूसरे के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते हैं जिससे कोच जॉर्ज सैम्पॉली के लिए अंतिम एकादश चुन पाने का काम खासा मुश्किल हो गया है। सैम्पॉली को यह ध्यान रखना होगा कि किस तरह का टीम संयोजन मेसी की बेहतरीन क्षमताओं का बखूबी इस्तेमाल कर सकता है? इसी बात की संभावना अधिक दिख रही है कि अर्जेंटीना के कोच 4-4-2 के स्थापित टीम संयोजन पर ही चलें। 
 
टॉटनहैम क्लब की तरफ से खेलने वाले इंगलैंड के लेफ्ट बैक डैनी रोज ने हाल ही में कहा था कि वह अपनी चोट और परिवार में हुई त्रासदी के चलते अवसाद के दौर से गुजर रहे हैं। वैसे बड़े टूर्नामेंट से पहले वार्मअप मैचों में टीम की फॉर्म अधिक मायने रखती है और इंगलैंड की फॉर्म ठीक ही रही है। कोस्टारिका के खिलाफ वार्मअप मैच में मार्कस रैशफोर्ड ने बेहतरीन गोल कर इंगलैंड को 2-0 से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन मैदान पर टीम के प्रदर्शन से भी अधिक अहम है रोज की ईमानदार स्वाकारोक्ति। ये बातें इस युवा टीम की मनोदशा के बारे में संकेत देती हैं। टीम मैनेजर गैरेथ साउथगेट ने अपने खिलाडिय़ों के बीच एक तरह का आत्मविश्वास पैदा किया है कि वे दूसरों से कम नहीं हैं। इंगलैंड की पिछली कई टीमों में खिलाडिय़ों और कोच के बीच कभी भी इस तरह का विश्वास नहीं देखने को मिला है। ऐसे में इंगलैंड की यह टीम विश्व कप में बहुत आगे जा पाती है या नहीं, लेकिन उसके बारे में पसंद आने लायक बहुत सारी चीजें हमें देखने को मिलेंगी।
 
ग्रुप-जी में इंगलैंड को बेल्जियम, पनामा और ट्यूनीशिया के साथ दो-दो हाथ करने हैं। पिछले दो बड़े टूर्नामेंट में इंगलैंड के प्रदर्शन के आधार पर कहा जा सकता है कि निडर खेल का प्रदर्शन करने और उबाऊ खेल से दूर रहने पर यह टीम हमें आनंदित कर सकती है। चार साल पहले हुए विश्व कप के सेमीफाइनल में मेजबान ब्राजील को करारी शिकस्त खानी पड़ी थी। नेमार और थिएगो सिल्वा की गैर-मौजूदगी में ब्राजील को जर्मनी ने 1-7 से मात दी थी। उसके बाद जर्मनी विश्व कप खिताब जीतने में भी सफल रहा। इस बार भी जर्मनी खिताब के प्रबल दावेदारों में शामिल है। वैसे इस बार ब्राजील की टीम का संयोजन बेहतर नजर आ रहा है। हालांकि नेमार पर बोझ काफी अधिक है लेकिन गैब्रिएल जीसस और रॉबर्टो फर्मिनो के रूप में दो बेहतरीन सहयोगी भी उन्हें मिले हुए हैं। सेंट्रल मिडफील्ड में इस टीम के पास गुïणवान खिलाडिय़ों की पूरी फौज है। कोच टिटे के लिए कैसेमिरो, रेनाटो ऑगस्तो, फर्नांडिन्हो, पॉलिन्हो और फ्रेड में से चयन करना आसान नहीं होगा। इसके अलावा विलियन और डगलस कोस्टा की तेजी भी ब्राजील को रफ्तार देगी। रफ्तार और गेंद पर नियंत्रण की अपनी खासियत के चलते विलियन को थाम पाना विरोधी टीमों के लिए आसान नहीं होगा। ब्राजील की टीम के बारे में इतना तो तय है कि वह फुटबॉल के दीवानों का पूरा मनोरंजन करेगी। सवाल उठता है कि क्या बाकी टीमें भी ऐसा कर पाएंगी?
 
वैसे यूरोपीय शैली वाली फुटबॉल संस्कृति के आकर्षण में बंधे लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय टीमों के मुकाबले देखना थोड़ा थकाऊ अनुभव हो सकता है। टीमों के पास इस चार-वर्षीय टूर्नामेंट के लिए तैयारी करने का अधिक वक्त नहीं होता है, न ही कोई खास सोच या मनोदशा ही होती है और उनकी खेल शैली में भी कोई अलहदा बात शायद ही होती है। अधिकांश मौकों पर यही देखने को मिलता है कि अपने-अपने क्लबों के लिए सुपरस्टार हैसियत रखने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में एक साथ खेलते समय दूसरे के साथ पूरी तरह जुड़ नहीं पाते हैं जिससे टीम भावना का भी जन्म नहीं हो पाता है। यह दर्शकों के लिए भी निराशाजनक अनुभव होता है।
 
यह आज के दौर की हकीकत है कि दुनिया में कोई भी ऐसी महान टीम नहीं है जो 1970 के शुरुआती वर्षों के ब्राजील, 1990 के दशक के अंतिम वर्षों के फ्रांस या पांच-छह साल पहले तक के स्पेन की तरह अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में दबदबा रखती हो। इससे अलावा अब अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल जगत के करिश्माई मैनेजरों को भी आकर्षित नहीं कर पाते हैं। पेप गॉर्डिओला, जोस मॉरिन्हो, जुर्गेन क्लॉप, एंतोनियो कोंते, मॉरिजियो सैरी और थॉमस तुशेल जैसे तमाम फुटबॉल मैनेजर यूरोप के नामचीन क्लबों से जुड़े हुए हैं।
 
अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को पिछले कुछ वर्षों में इन चुनौतियों से जूझना पड़ा है। हालांकि ब्राजील में हुआ पिछला विश्व कप दागे गए गोलों के मामले में खासा रोचक रहा था। उस बार प्रति मैच 2.7 गोल दागे गए थे जबकि 2010 के दक्षिण अफ्रीका विश्व कप में औसतन 2.23 गोल ही हुए थे। हालत यह हो गई थी कि विश्व कप जीतने वाली टीम स्पेन ने अपने अधिकांश मुकाबले केवल एक गोल से ही जीता था।  बहरहाल पिछले कुछ महीनों के प्रदर्शन और मौजूदा हालात को देखते हुए रूस में आज से शुरू होने जा रहे इस विश्व कप में रोमांचक मुकाबले खेले जाने की पूरी संभावना नजर आ रही है। दुनिया भर में फैले अरबों प्रशंसकों को मेसी, रोनाल्डो और नेमार जैसे दिग्गज खिलाडिय़ों के अलावा अपनी पसंदीदा टीमों के लिए भी मोर्चाबंदी करते हुए देखा जाएगा। उम्मीद यही है कि फुटबॉल का रोमांच फिर से सिर चढ़कर बोलेगा।
Keyword: fifa world cup, football,,
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