बिजनेस स्टैंडर्ड - दक्षिण और पूर्वोत्तर में कम बारिश!
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दक्षिण और पूर्वोत्तर में कम बारिश!

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 05 30, 2018

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून इस साल देश के दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में सामान्य से थोड़ा कम रह सकता है, लेकिन यह उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में सामान्य रहेगा। भारतीय मौसम विभाग ने आज अपने दूसरे चरण के पूर्वानुमान में यह बात कही। इस क्षेत्रवार पूर्वानुमान में 8 फीसदी घटत या बढ़त संभव है। मौसम विभाग ने कहा कि इस साल मॉनसून सामान्य रहने के आसार हैं। बारिश लंबी अवधि के औसत (एलपीए) की करीब 97 फीसदी रहने का अनुमान है। विभाग का यह पूर्वानुमान जून के पूर्वानुमान के समान ही है। इस पूर्वानुमान में 4 फीसदी की घटत-बढ़त संभव है। 

 

मौसम विभाग ने कहा कि महीनों के लिहाज से बारिश जुलाई में एलपीए की 101 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि अगस्त में यह एलपीए की 94 फीसदी रहने के आसार हैं। यह मासिक पूर्वानुमान 9 फीसदी घटत-बढ़त की मॉडल एरर पर आधारित है। जुलाई और अगस्त 4 महीनों के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के सबसे अहम महीने हैं क्योंकि ज्यादातर बारिश इन्हीं महीनों में होती है।  मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा कि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से थोड़ा कम रहने का कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि तमिलनाडु, रायलसीमा, कर्नाटक के दक्षिणी सीमावर्ती इलाकों और केरल में ज्यादातर बारिश उत्तर-पूर्वी मॉनसून से होती है, जिसे सर्दियों की बारिश भी कहा जाता है। 

 

मौसम विभाग के महानिदेशक के जे रमेश ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश की कुल मात्रा और दैनिक औसत 150 से 180 सेंटीमीटर है, इसलिए अगर बारिश 15 फीसदी कम भी होती है तो जमीनी स्तर और कुल बारिश पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।' उन्होंने कहा कि मौसमी पूर्वानुमान की अहम बात यह है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे बारिश पर अत्यधिक निर्भरता वाले राज्यों में इस साल बहुत अच्छी बारिश होने के आसार हैं।  देश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में अच्छी बारिश से खरीफ सीजन में दलहन, तिलहन और धान की बुआई करने में मदद मिलेगी। देश के इन हिस्सों के तहत पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्य आते हैं। लेकिन कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों में सामान्य से कम बारिश का दलहन सहित इन क्षेत्रों में उगाई जाने वाली फसलों पर कुछ असर पड़ेगा। यह असर कर्नाटक जैसे राज्यों में ज्यादा रह सकता है। कर्नाटक को लगातार सूखे का सामना करना पड़ रहा है। 

 

केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'दक्षिण भारत में सामान्य से कम बारिश का अनुमान कपास और दहलन जैसी फसलों के लिए मुख्य रूप से चिंताजनक है। पूर्वानुमान में यह भी दर्शाया गया है कि जुलाई में अच्छी शुरुआत के बाद मॉनसून अगस्त में कमजोर पड़ सकता है, जो खड़ी फसलों के लिए अहम समय होता है क्योंकि उनमें उस समय फूल आने लगते हैं।' हालांकि उत्तर-पूर्व में सामान्य से कम बारिश का कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वहां कुल बारिश की मात्रा शेष भारत से भी अधिक होती है। काफी कुछ इस पर निर्भर करेगा कि आने वाले दिनों में मॉनसून की चाल कैसी रहती है।  मौसम विभाग ने आज जारी अपने बयान में कहा, 'वैश्विक जलवायु मॉडल यह संकेत देते हैं कि मॉनसून सीजन में ज्यादातर समय प्रशांत क्षेत्र में स्थितियां तटस्थ रहेंगी। मॉनसून सीजन के बाद कमजोर अलनीनो की स्थितियां बनेंगी।' इस बीच मॉनसून मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों, केरल के शेष हिस्सों, तटीय कर्नाटक के ज्यादातर हिस्सों में पहुंच गया है। 
Keyword: monsoon, economy, farmer,,
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