बिजनेस स्टैंडर्ड - अल्ट्राटेक की पेशकश मंजूर
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अल्ट्राटेक की पेशकश मंजूर

अभिषेक रक्षित / कोलकाता May 29, 2018

कर्जदाताओं की समिति ने अल्ट्राटेक की 79.60 अरब  रुपये बोली पर लगाई मुहर
बिनानी सीमेंट के लिए अल्ट्राटेक बनी नई एच1 बोलीदाता
प्रस्ताव सीधे भेजा जाएगा एनसीएलटी को
प्रस्ताव पर एनसीएलटी की लगी मुहर तो डालमिया भारत एनसीएलएटी में देगी फैसले को चुनौती

बिनानी सीमेंट के कर्जदाताओं की समिति ने अल्ट्राटेक की 79.60 अरब रुपये की पेशकश पर आज  मुहर लगा दी। बिनानी सीमेंट फिलहाल दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है और अल्ट्राटेक इसे खरीदने की कवायद में जुटी है। सूत्रों ने कहा कि अल्ट्राटेक सभी संबंधित पक्षों के दावों पर पूरा ध्यान दे रही है। उनके मुताबिक कंपनी का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ है।

अब अगले चरण में सीओसी अपनी योजना समाधान पेशेवर को सौंप देगी, जिसके बाद अल्ट्राटेक की पेशकश राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) को सौंप दी जाएगी। इस बारे में एक कर्जदाता ने कहा, 'मंशा पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी करने की कोई जरूरत नहीं है, इसलिए पेशकश सीधे एनसीएलटी को सौंपी जा सकती है।'

कर्जदाताओं की मुंबई में बैठक में हुई जिसमें अल्ट्राटेक की पेशकश पर मतदान हुआ। अग्रणी कर्जदाताओं में से एक ने सीओसी को मतदान प्रक्रिया के लिए मौजूद रहने को कहा था। मतदान में भाग लेने वाले सीओसी के सूत्रों ने बताया कि डालमिया सीमेंट की बोली स्वीकार किए जाने का निर्णय खारिज हो गया है। अब राजपूताना प्रॉपर्टीज (डालमिया के नेतृत्व वाला समूह) की जगह अल्ट्राटेक एच1 बोलीदाता बन गई है।

इससे पहले सीओसी ने डालमिया भारत का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था और प्रस्ताव एनसीएलटी के कोलकाता पीठ को सौंप दिया था। कई हिस्सेदारों ने इस पर हामी भी भर दी थी। इसके बाद एनसीएलटी ने सीओसी को आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी के प्रस्ताव पर विचार करने और 24 जून तक समाधान योजना चुनने का आदेश दिया था।

डालमिया भारत के सूत्रों ने कहा कि अगर एनसीएलटी अल्ट्राटेक की पेशकश स्वीकार करता है तो वह इस फैसले को अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती देगी। उन्होंने कहा कि कंपनी उच्चतम न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा सकती है। दूसरी तरफ उच्चतम न्यायालय ने डालमिया भारत की वह याचिका सुनवाई के लिए मंजूर कर ली है, जिसमें कंपनी ने आरोप लगाया है कि दिवालिया कानून की धारा 29 (ए) के तहत अल्ट्राटेक बोली लगाने के लिए योग्य नहीं है। यह मामला अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ है।

अल्ट्राटेक की योजना पर मुहर लगाने वाले कर्जदाताओं ने कंपनी को बोली के लिए योग्य बताया था और डालमिया भारत का दावा खारिज कर दिया था। एक कर्जदाता ने कहा, 'इस आदेश से स्पष्ट है कि सर्वाधिक रकम की पेशकश करने वाली इकाई एच1 बोलीदाता का दर्जा हासिल करेगी। हमने डालमिया भारत को अल्ट्राटेक  की बोली की बराबरी करने के लिए कहा था, लेकिन वह निर्धारित समय सीमा में ऐसा नहीं कर पाई।'

सोमवार को हुए मतदान के बारे में पूछे जाने पर अग्रणी कर्जदाताओं ने कहा कि इस मामले पर आगामी 4 जून को सुनवाई होगी और तब तक हमारा मानना है कि एक सफल बोलीदाता चुने जाने की जरूरत थी। 

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