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तीन और बैंकों के कर्ज पर रोक!

सोमेश झा और अभिजित लेले / नई दिल्ली/मुंबई 05 16, 2018


परिसंपत्ति की गुणवत्ता और भी खराब हो जाने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई (पीसीए) की फेहरिस्त में जुड़ गए हैं। सूची में पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी), केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को भी जोड़ दिया गया है। इन तीनों बैंकों की गैर-निष्पादित आस्तियां (एपनीए) आरबीआई द्वारा तय 6 फीसदी की सीमा से ऊपर पहुंच गई हैं, जिसकी वजह से इन्हें किसी भी तरह का कर्ज देने से रोक दिया जाएगा। इस साल मार्च के अंत तक पीएनबी का एनपीए 11.2 फीसदी पर पहुंच गया है।

यूनियन बैंक का एनपीए 8.4 फीसदी और केनरा बैंक का एनपीए 7.5 फीसदी रहा। इक्रा में वित्तीय क्षेत्र की रेटिंग्स के ग्रुप हेड और वरिष्ठï उपाध्यक्ष कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा कि आरबीआई के प्रारूप के तहत एनपीए स्तर 6 फीसदी से अधिक रहने, लगातार दो साल तक घाटा होने और पूंजी पर्याप्तता अनुपात नियामकीय जरूरतों से कम रहने पर बैंक को पीसीए के दायरे में लाया जाता है।

श्रीनिवासन ने कहा, 'पीएनबी को वित्त वर्ष के नतीजे जारी करने से पहले ही पीसीए में शामिल कर लिया जाना चाहिए था क्योंकि इसका शुद्घ एनपीए 6 फीसदी से अधिक था। इसे पीसीए में नहीं लाने से समस्या और भी बढ़ गई।' आरबीआई ने फरवरी में बैंक के कार्याधिकारियों को कहा था कि वे कर्ज पुनर्गठन योजना को खत्म कर दें। इसकी वजह से मार्च, 2018 में सकल और शुद्घ एनपीए में काफी इजाफा हुआ।

ऐसे में आरबीआई आने वाली तिमाहियों में बैंक पर कई तरह की बंदिशेें लगा सकता है। 11 सार्वजनिक बैंक पहले से ही पीसीए के दायरे में हैं, जिनमें आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, देना बैंक, कॉर्पोरेशन बैंक और इलाहाबाद बैंक आदि शामिल हैं। आरबीआई ने देना बैंक को नए कर्ज देने से रोक दिया है और इलाहाबाद बैंक पर भी बंदिशें लगा दी हैं।

वित्तीय सेवा विभाग ने पीसीए में शामिल सभी 11 बैंकों के पूर्णकालिक निदेशकों की बैठक कल बुलाई है। इसमें बैंकों की समीक्षा की जाएगी। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस बैठक में यह देखा जाएगा कि आरबीआई की कार्रवाई के बाद बैंकों ने क्या कदम उठाए हैं। इसके बाद हम निर्णय करेंगे कि आरबीआई से इन्हें कुछ ढील देने के लिए कहा जा या नहीं।

मार्च, 2018 में पीएनबी का पूंजी पर्याप्तता अनुपात घटकर 9.2 फीसदी रह गया, जो एक साल पहले 11.66 फीसदी था। जनवरी-मार्च में पीएनबी का सकल एनपीए 18.4 फीसदी पर पहुंच गया, जो पिछली तिमाही में 12.11 फीसदी था। शुद्घ एनपीए भी 7.5 फीसदी से बढ़कर 11.2 फीसदी पर आ गया।  

केनरा बैंक पर 2017-18 के दौरान काफी दबाव देखा गया। 2018 की चौथी तिमाही में बैंक का शुद्घ घाटा 48.59 अरब रुपये रहा, जबकि मार्च, 2017 में समाप्त तिमाही में उसे 2.14 अरब रुपये का शुुद्घ मुनाफा हुआ था। पूरे वित्त वर्ष में बैंक को 42.22 अरब रुपये का शुद्घ घाटा हुआ, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में उसे 11.21 अरब रुपये का मुनाफा हुआ था।

केनरा बैंक का शुद्घ एनपीए 6.33 फीसदी से बढ़कर 7.84 फीसदी पहुंच गया। हालांकि केनरा बैंक की लोन बुक पहले से बेहतर दिख रही है। इसमें जोखिम भारांश वाली परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी मार्च, 2018 में घटकर 87 फीसदी रह गई, जो एक साल पहले 94-95 फीसदी थी। केनरा बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि बैंक ने हमेशा ही पूंजी पर्याप्तता अनुपात 13 फीसदी के स्तर पर बनाए रखा है।  

बैंक के शेयरधारकों ने इस साल जुलाई से पहले 45 अरब रुपये तक इक्विटी पूंजी जुटाने की मंजूरी दी है।एक अन्य बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की लोन बुक और ऋण पोर्टफोलियो में भी तेज गिरावट आई है। पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में बैंक को 25.6 अरब रुपये का शुद्घ घाटा हुआ था, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में उसे 1.08 अरब रुपये का शुद्घ मुनाफा हुआ था। दिसंबर तिमाही में भी बैंक को 12.5 अरब रुपये का घाटा हुआ था।

यूनियन बैंक को वित्त वर्ष 2018 में 52.5 अरब रुपये का शुद्घ घाटा हुआ, जबकि वित्त वर्ष 2017 में उसे 5.5 अरब रुपये का मुनाफा हुआ था। केनरा बैंक के मुख्य कार्याधिकारी एवं प्रबंध निदेशक राजकिरण राय ने कहा कि बैंक ने नुकसान के कारण बढ़ाए गए प्रावधान को वहन करने का निर्णय किया है। आने वाली तिमाहियों में प्रावधान बांटने की जो छूट केंद्रीय बैंक ने दी है, उसका फायदा उठाने की बैंक की कोई योजना नहीं है।

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