बिजनेस स्टैंडर्ड - बेल्लारी की दीवारों पर लिखी इबारत
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बेल्लारी की दीवारों पर लिखी इबारत

राष्ट्र की बात
शेखर गुप्ता /  May 11, 2018

कर्नाटक विधानसभा चुनावों के बारे में आसानी से कोई दावा नहीं किया जा सकता है। मैंने दशकों तक चुनावों की कवरेज की है लेकिन मेरा सामना कभी ऐसे अभियान से नहीं हुआ। न तो कोई पोस्टर , न बैनर, न ही कोई झंडा नजर आया। यहां तक कि सर्वव्यापी हो चले होर्डिंग और कटआउट भी देखने को नहीं मिले। परंतु यह सादगी उस समय समाप्त हो जाती है जब आप 2,000 किलोमीटर राजमार्ग और अंदरूनी सड़कों की यात्रा के दौरान आंध्र प्रदेश की पूर्वोत्तर सीमा से लगे बेल्लारी में प्रवेश करते हैं। 

 
एक संकरी लेकिन खूबसूरत सड़क हमें मोलकलमुरु गांव ले जाती है। यहां एक पुलिस चौकी है जहां केंद्रीय अद्र्घसैनिक बल के जवान हालात पर नजर रखे हैं। उनकी रुचि गांव के अंदर जाने वालों से ज्यादा बाहर आने वालों में है। इसकी वजह आपको आगे पता चल जाएगी।  सड़क पर महज कुछ सौ मीटर आगे यह सूखा इलाका दाहिने हाथ की ओर हरियाली में तब्दील हो जाता है। यहां वे तमाम होर्डिंग और कट आउट नजर आते हैं जिनकी कमी हमें अब तक खल रही थी। सामने भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार येदियुरप्पा और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का कट आउट नजर आता है। शाह इस फार्महाउस के निवासियों के साथ रिश्तों से चाहे जितनी दूरी बरतें लेकिन यहां उनका भी कट आउट है। इसके बाद श्रीरामुलू का फिल्मी सितारे जैसा कट आउट नजर आता है। वह मौजूदा मुख्यमंत्री कांग्रेस के सिद्घरमैया के खिलाफ बदामी सीट से भाजपा उम्मीदवार हैं। इस घर के दो भाई करुणाकरन और सोमशेखर रेड्डी भी चुनाव मैदान में हैं। परंतु, इन चुनावों में जनार्दन रेड्डी की चर्चा है। वह बेल्लारी के बादशाह और इस चुनाव के भाग्य विधाता कहे जा रहे हैं। भाजपा को उम्मीद है कि देश में किसी भी अन्य राजनेता की तुलना में कहीं अधिक मामलों में आरोपी रेड्डी यहां की 23 में से अधिकांश सीटों पर पार्टी के लिए मददगार साबित होंगे। कर्नाटक चुनाव में जीत के लिए बेकरार भाजपा संगठित राजनीतिक अपराध और भ्रष्टïाचार के साथ साफतौर पर समझौता करती दिख रही है। तीनों रेड्डी बंधुओं में जनार्दन रेड्डी सबसे छोटे हैं। उनके बड़े भाई करुणाकरन और सोमशेखर रेड्डी हैं। येदियुरप्पा की पिछली सरकार में जनार्दन और करुणाकरन रेड्डी और श्रीरामुलू को बुनियादी विकास, पर्यटन, स्वास्थ्य और कल्याण तथा राजस्व जैसे अहम विभाग मिले थे। इनके अलावा चौथे सोमशेखर रेड्डी को कर्नाटक दुग्ध संघ का चेयरमैन बनाया गया। मेरी सहयोगी रोहिणी स्वामी इस संघ को दुधारू गाय कहती हैं। 
 
ये चारों एक वक्त जेल में रहे हैं और जनार्दन को इस शर्त पर जमानत मिली कि वह बेल्लारी जिले में प्रवेश नहीं करेंगे। पुलिस की सतर्कता इसीलिए है, वह मोलकलमुरु में डेरा डाले जनार्दन को बेल्लारी नहीं जाने दे सकती। शोले फिल्म में असरानी पर फिल्माया एक मशहूर संवाद, 'हमारे आदमी चारों तरफ फैले हुए हैं', जनार्दन रेड्डी पर मुफीद बैठता है। वह बेल्लारी भले न जा पाएं लेकिन उनके लोग और भाई वहीं हैं। सोमशेखर बेल्लारी में घर-घर प्रचार करते नजर आते हैं। जंगमा समुदाय के करीब 70 लोग अनुसूचित जाति का दर्जा मांग रहे हैं और रेड्डी उनसे इत्तफाक रखते हैं। जंगमा दरअसल लिंगायत समुदाय के पुजारी हैं। जाहिर है वे काम नहीं करते बल्कि श्रद्घालुओं की दक्षिणा पर जीते हैं। उनका दावा है कि चूंकि उनकी आजीविका मांग कर चलती है इसलिए उन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा दिया जाए। यानी एक उच्च जाति का और उच्च वर्ग अनुसूचित जाति का दर्जा मांग रहा है। सिद्घरमैया लिंगायतों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का वादा कर चुके हैं। लब्बोलुआब यह कि कर्नाटक की जातीय राजनीति उत्तर प्रदेश या बिहार से काफी जटिल है। अवैध खनन के सवाल पर सोमशेखर कांग्रेस तथा प्रतिद्वंद्वियों द्वारा पीडि़त किए जाने का आरोप लगाते हैं। वह सर्वोच्च न्यायालय के खनन रोकने तथा नए सिरे से नीलामी के आदेश पर भी सवाल उठाते हैं। वह कहते हैं कि 10 लाख लोगों का रोजगार छिना और वे सड़क पर आ गए। वह कहते हैं कि बेल्लारी में सीमा से ज्यादा खनन हुआ है आपराधिक खनन नहीं। एक सवाल के जवाब में वह साफ कहते हैं कि उनके परिवार में जनार्दन ही मुखिया हैं। 
 
मैं प्रतिवाद में कहता हूं कि वह तो सबसे छोटे हैं। उत्तर मिलता है कि वह सबसे बुद्घिमान जो हैं। भाइयों में कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं। खनन को समझने के लिए हमने यहां जनता दल सेक्युलर यानी देवेगौड़ा के उम्मीदवार हाथुर मोहम्मद इकबाल के साथ वक्त बिताया। उनकी खुद तीन बड़ी खदान हैं। वह कहते हैं कि सन 2000 तक कोई समस्या नहीं थी। उस वक्त एक टन खुदाई का खर्च 150 रुपये था और इसका मूल्य 250 रुपये था। 16.50 रुपये प्रति टन की रॉयल्टी सरकार को देनी होती थी। बेल्लारी का अयस्क भी खराब था। इसके बाद चीन की मांग के चलते कीमतें अचानक 600, 1,000 से होते हुए 6,000 रुपये प्रति टन हो गईं। इससे अवैध खनन और काले धन में इजाफा हुआ (जाहिर है वह ऐसा नहीं कहते) और अचानक अति चालू हो गई। इसके बाद प्रतिबंध और नई नीलामी की बात आई जिसे वह अतार्किक बताते हैं। 
 
यहां भारी मात्रा में लौह अयस्क है जिसमें कुछ हिस्सा मैंगनीज का भी है। प्रतिबंध लगने तक यहां परमिट के साथ कोई भी खुदाई कर सकता था। यहां रसूखदारों ने बलात खनन भी किया। यहां सरकार अनुपस्थित थी और रेड्डी बंधुओं का राज था। खबरों के मुताबिक वे हर किसी से संरक्षण राशि लेते थे। एक अनुमान के मुताबिक तेजी के दिनों में यह राशि 100 करोड़ रुपये रोजाना तक थी। अधिक खनन के लिए रेड्डी बंधुओं ने अपनी खदान वाले इलाके में राज्य की सीमा तक को 5 किमी तक परिवर्तित कर दिया। लोकायुक्त संतोष हेगड़े की रिपोर्ट में इसका पूरा ब्योरा है। उनका अनुमान है कि वर्ष 2006 से 2010 के बीच कुल अवैध खनन और अयस्क निर्यात का मूल्य करीब 1.22 लाख करोड़ रुपये रहा। लोकायुक्त के मुताबिक रेड्डी बंधुओं के पास आंध्र प्रदेश में केवल एक खदान थी। उनका पूरा निर्यात कर्नाटक के अयस्क का था जबकि वहां उनके पास कोई लीज नहीं थी। सीबीआई ने चुनावी मौसम में प्रमाणों की कमी के चलते ये सारे मामले वापस ले लिए हैं। 
 
एक वरिष्ठï पुलिस अधिकारी ने बताया कि यहां के खनन माफिया की तुलना धनबाद के माफिया से हो सकती है लेकिन एक अंतर है कि यहां कोई हत्या नहीं होती। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत के चलते अगर हिस्सा नहीं चुकाया गया तो खनन से रोक दिया जाता है। ज्यादा से ज्यादा आईपीसी के तहत मामला दर्ज हो जाता है। लोकायुक्त ने जिले के 650 से अधिक अधिकारियों पर निशाना साधा। इनमें से 53 को बाहर कर दिया गया। इसके बाद रेड्डी ने येदियुरप्पा के खिलाफ बगावत कर दी और अपने समर्थक विधायकों को एक रिजॉर्ट में ले जाकर येदियुरप्पा के खिलाफ बयान जारी किया। भाजपा नेतृत्व शांति चाहता था। नतीजा: अधिकारियों की वापसी हुई, रेड्डी अहम मंत्रालयों में बने रहे और मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के करीब शोभा करांदलजे को इस्तीफा देना पड़ा। इसीलिए येदियुरप्पा कहते हैं कि रेड्डी बंधुओं का पुनर्वास उनका नहीं आला कमान का निर्णय था। 
 
अतिरिक्त धन अपने साथ अपराध भी लाता है। बेल्लारी अचानक चमचमाती कारों, निजी विमानों और हेलीकॉप्टरों से भर गया। अब इसमें काफी चीजें कम हो चुकी हैं। कांग्रेस प्रत्याशी अनिल लाड के दो हेलीकॉप्टर बिक चुके हैं। अधिकांश निजी विमान बिक चुके हैं। जनार्दन के पास अभी भी दो हेलीकॉप्टर हैं।  बेल्लारी के तीनों प्रमुख प्रत्याशी अतीत में खनन से जुड़े रहे हैं। जनता दल सेक्युलर के प्रत्याशी तीन में से दो खदान गंवा चुके हैं, कांग्रेस प्रत्याशी अपनी सभी खदानें गंवा चुके हैं। भाजपा प्रत्याशी के साथ ऐसा नहीं है क्योंकि उनके पास खदान थी ही नहीं। इन सभी को उम्मीद है कि चुनाव नतीजे उनके अच्छे दिन लाएंगे। वैश्विक बाजार में लौह अयस्क कीमतें फिर बढ़ रही हैं।
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