बिजनेस स्टैंडर्ड - मोदी के प्रचार का कर्नाटक पर नहीं होगा असर
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मोदी के प्रचार का कर्नाटक पर नहीं होगा असर

अर्चिस मोहन /  04 30, 2018

कर्नाटक की चुनावी जंग के बीच देश के पूर्व प्रधानमंत्री और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने अर्चिस मोहन से जनता दल (सेक्युलर) की चुनावी संभावनाओं पर बात की। पेश है बातचीत के संपादित अंश 

 
कांग्रेस ने आपकी पार्टी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 'बी' टीम होने का आरोप लगाया है। इस पर आपकी क्या टिप्पणी है?
 
वे कुंठा और निराशा में ऐसी टिप्पणी कर रहे हैं। कांग्रेस ऐसी बातों के जरिये मुसलमानों और दूसरे अल्पसंख्यकों को डराने की कोशिश कर रही है ताकि वे जद (एस) को वोट न दें। उन्होंने कुछ जगहों पर यह झूठा प्रचार भी किया है कि जद (एस) को वोट देने का मतलब भाजपा को वोट देना है। हम इस भ्रम को दूर करने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। 
 
ओपिनियन पोल में त्रिशंकु विधानसभा का पूर्वानुमान लगाया गया है। ऐसे में चुनावों के बाद आपको भाजपा या फिर कांग्रेस के साथ गठबंधन करना पड़ेगा?
 
शिवसेना भाजपा से खफा है। तेलुगू देशम पार्टी भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग हो गई है। कुमारस्वामी (पूर्व मुख्यमंत्री और देवेगौड़ा के बेटे) जब भाजपा से जुड़े तो उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। सभी तरह के क्षेत्रीय दल या तो भाजपा या फिर कांग्रेस से आजिज आ चुके हैं। मुझे भी कांग्रेस का समर्थन कर काफी कुछ झेलना पड़ा। इस तरह के कटु अनुभव के बाद अब मैं और कोई बुरा अनुभव नहीं चाहता हूं। 
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रचार का क्या असर होगा?
 
पिछले चार सालों के दौरान मोदी के नाम पर जिस करिश्मे का प्रचार किया जा रहा था अब ऐसा नहीं है। अब वह पहले की तरह लोकप्रिय नहीं हैं। इसलिए अब इस तरह की बातों का कोई मतलब नहीं है। 
 
चुनाव के बारे में आपका क्या आकलन है?
 
विधानसभा की 224 सीटें हैं। पुराने मैसूर क्षेत्र (दक्षिण में) में 108, हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में 52 सीटें हैं। दक्षिणी कर्नाटक में हमें 80 फीसदी वोट मिलेंगे जबकि हैदराबाद-कर्नाटक में हम 20-22 सीटें जीत लेंगे। हमारी स्थिति ठीक है। आप यह पूछ सकते हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है? वर्ष 2013 में जब मैं बीमार था और कुमारस्वामी ही हमारे एकमात्र स्टार प्रचारक थे। हमें कुछ हजार वोटों से भी कम अंतर से 48 निर्वाचन क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा। इस बार मैं मौजूद हूं। पार्टी ने मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ भी गठबंधन किया है। बसपा 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और इससे हमें उन सीटों पर जीत हासिल करने में मदद मिलेगी जहां हम कम अंतर से हारे थे। बसपा भी कुछ सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी कर्नाटक में रहने वाले तेलुगूभाषी लोगों को मेरी पार्टी को वोट देने की गुजारिश की है। मेरे दोस्त असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपने समर्थन की घोषणा की है और वह भी प्रचार करेंगे। हम बेहतर प्रदर्शन करेंगे और सरकार बनाएंगे। 
 
लेकिन क्या आपको लगता है कि सिद्धरमैया सरकार के खिलाफ कोई सत्ताविरोधी लहर है? सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं की तारीफ की जा रही है। 
 
 सबसे खराब सरकारों में से एक सिद्धरमैया की सरकार भी है। इन योजनाओं में व्यापक तौर पर 60-70 फीसदी तक चोरी हो रही है। एक बार जब योजनाओं की शुरुआत होती है तब लूट की साझेदारी शुरू हो जाती है। ये योजनाएं अब निरर्थक साबित हो चुकी हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है। यहां दिनदहाड़े हत्या हो रही है। वरिष्ठ नागरिकों की हत्या की गई है।
 
क्या आप यह कहना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री कमजोर हैं?
 
मैं ऐसा नहीं सोचता कि वह कमजोर हैं। उन्होंने अपने समर्थकों के पक्ष में इस तरह की खुली छूट दी है। उनके मंत्री भी उन्हें रोक नहीं पा रहे हैं। जैसा राजा वैसी प्रजा। 
 
आप इस सरकार की तुलना येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के साथ कैसे करेंगे?
 
येदियुरप्पा ने कुछ गलतियां कीं। इसके बाद वह जेल गए। लेकिन येदियुरप्पा उतने शातिर नहीं हैं जितने सिद्धरमैया हैं। लूट शुरू करने से पहले सिद्धरमैया ने लोकायुक्त को खत्म कर इसे निष्प्रभावी बना दिया। उन्होंने एक भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो का गठन किया जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री कर रहे हैं। येदियुरप्पा ने अपने कार्यकाल की शुरुआत भ्रष्टाचार से की। सभी लोग उनके सरकार बचाने के अभियान 'ऑपरेशन लोटस' को याद करते हैं जब विधायकों को खरीदने के लिए 5-10 करोड़ रुपये खर्च किए गए। मेरी अपनी पार्टी के 7 विधायक भी उसमें शामिल थे। अगर येदियुरप्पा और सिद्धरमैया ने बेहतर शासन व्यवस्था दी होती तो लोग कुमारस्वामी की तरफ नहीं देखते। मैं ऐसा इसलिए नहीं कह रहा हूं क्योंकि वह मेरा बेटा है। वास्तव में कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने 18 महीने के कार्यकाल के दौरान अच्छा काम किया है।
 
भाजपा और कांग्रेस आप पर यह आरोप लगाती है कि आप परिवार वाली पार्टी चला रहे हैं
 
मैं इससे सहमत हूं। लेकिन ऐसा हमेशा से नहीं था। मैंने लोगों पर भरोसा किया जिन्होंने मुझ पर पीछे से वार किया। तब मुझे किस पर भरोसा करना चाहिए?
 
क्या इस चुनाव में पैसा भी अहम भूमिका निभा रहा है?
 
आज मैं अपनी पार्टी के चुनाव अभियान के लिए पूंजी देने में सक्षम नहीं हूं। आप मेरा यकीन करें हमारे पास बिल्कुल पैसे नहीं है। कभी-कभी मुझे नींद नहीं आती। कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में लोग हमारी मदद कर रहे हैं। इस सरकार ने कर्नाटक में सबकुछ बरबाद कर दिया है। यहां कहीं प्रशासन नाम की चीज नहीं है केवल पैसा, पैसा और पैसे का ही बोलबाला है।
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