बिजनेस स्टैंडर्ड - निफ्टी के लिए बढिय़ा दौर आ सकती है तेजी और
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निफ्टी के लिए बढिय़ा दौर आ सकती है तेजी और

बाजार संकेतक
देवांग्शु दत्ता /  April 30, 2018

बेन ग्राहम के शब्द उधार लें तो बाजार का मिजाज स्वेच्छाचारी और एक हद तक सनक से भरा होता है। जरा मारुति सुजूकी और ऐक्सिस बैंक के विरोधाभासी मामलों पर ध्यान दें। दोनों ने अपनी चौथी तिमाही जनवरी-मार्च 2018) के नतीजे गत सप्ताह घोषित किए।  मारुति ने सालाना आधार पर 10 फीसदी यानी 18.82 अरब रुपये का शुद्घ लाभ हासिल किया। उसकी शुद्घ बिक्री सालाना आधार पर 14.4 फीसदी बढ़कर 205.94 अरब रुपये हो गई। ऐक्सिस बैंक ने पहली बार 21.9 अरब रुपये का घाटा दिखाया और बताया कि उसका फंसा हुआ कर्ज बढ़कर 165.4 अरब रुपये हो गया है। जरा अंदाजा लगाइए कि इनमें से कौन से शेयर को बाजार की हिमायत मिली और किसे नुकसान? 

 
निवेशकों ने मारुति को झटका दिया और नतीजों के बाद कंपनी के शेयर 2 फीसदी गिरकर बंद हुए। ऐक्सिस बैंक पर निवेशकों ने दांव खेला और उसके शेयर फंसे हुए कर्ज के खुलासे के बावजूद 9.7 फीसदी तेजी पर बंद हुए। मारुति सुजूकी इंडिया ने इसलिए निराश किया क्योंकि उससे करीब 24 अरब रुपये के शुद्घ लाभ की उम्मीद थी। ऐक्सिस से निवेशक प्रसन्न हुए क्योंकि उनको लगा कि एनपीए को चिह्निïत करके कंपनी बैलेंस शीट में तेजी से सुधार लाएगी। ब्रोकरेज फर्म मारुति के साथ थीं। कंपनी ने जनवरी-मार्च तिमाही में 461,773 वाहन बेचे जो साल भर पहले की तुलना में 11.4 फीसदी अधिक थे। अधिकांश संस्थागत मशविरों में ऐक्सिस की ग्रेड कम की गई थी। 
 
यहां कंपनी का कदम काफी हद तक खुदरा और उच्च संपदा वाले व्यक्तियों की बदौलत था। अगर अप्रैल को भी शामिल कर लें तो घरेलू संस्थागत निवेशकों को काफी हद तक प्रमुख सूचकांक निफ्टी में तेजी के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। अप्रैल में निफ्टी 5.7 फीसदी के मजबूत स्तर पर था। घरेलू निवेशकों ने करीब 85 अरब रुपये का निवेश अकेले अप्रैल में किया। यह विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा की गई 55 अरब रुपये की बिकवाली से कहीं अधिक था। अप्रैल के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने रुपये में लिए गए ऋण में 100 अरब रुपये से अधिक की बिकवाली की। यह इस बात का संकेत है कि अब उन्हें आरबीआई की ओर से दरों में बढ़ोतरी की प्रतीक्षा है। 
 
जनवरी से रुपया डॉलर की तुलना में 5 फीसदी गिर चुका है। यूरो की तुलना में वह 6.5 फीसदी, येन के बरअक्स 8.2 फीसदी और पाउंड की तुलना में 8.5 फीसदी गिरा है। एफपीआई की ओर से शुद्घ बॉन्ड बाजार बिकवाली रुपये की कमजोरी का केवल एक कारक है।  चालू खाते का घाटा फिलहाल जीडीपी के 1.9 फीसदी के बराबर है और व्यापार घाटा 157 अरब डॉलर के बराबर। ये कुछ प्रमुख संकेतक हैं जो कमजोरी के बारे में बताते हैं। उम्मीद की जा रही है कि 2018-19 में चालू खाते का घाटा जीडीपी के 2.7 फीसदी के बराबर रहेगा। बशर्ते कच्चा तेल मौजूदा स्तर पर बना रहे। 
 
अगर जीएसटी संग्रहण में इजाफा नहीं होता है तो राजकोषीय घाटा बजट में तय लक्ष्य से परे हो जाएगा। फिच रेटिंग ने भारत को निम्रतम निवेश ग्रेड में बरकरार रखते हुए और सॉवरिन ऋण रेटिंग को न बदलते हुए भी राजकोषीय फिसलन की आशंका जताई थी। एसऐंडपी ने भी न्यूनतम निवेश ग्रेड रेटिंग बरकरार रखी हालंाकि मूडीज ने गत नवंबर में इसमें सुधार किया था। कच्चे तेल की आयात लागत 2017-18 में 2016-17 की तुलना में 26 फीसदी अधिक रही। भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत अप्रैल में एक बार फिर बढ़ी। बहरहाल, कोरिया में भूराजनैतिक तनाव कम होने से कच्चे तेल की दरें कुछ कम होंगी। हालांकि यह विचित्र लग सकता है क्योंकि कोरिया तेल का उत्पादन नहीं करता। 
 
अमेरिका में भी मुद्रास्फीतिक दबाव नजर आ रहे हैं। 10 वर्ष का मानक सरकारी बॉन्ड अब 3 फीसदी से अधिक का प्रतिफल दे रहा है और फेडरल रिजर्व का 2 फीसदी मुद्रास्फीति का लक्ष्य हाल ही में पीछे छूट गया।  इसका अर्थ यह हुआ कि निवेशक अमेरिकी बॉन्ड पर नजर रखेंगे। यूरो क्षेत्र और जापान में मुद्रास्फीति के कम दबाव को देखते हुए बहुत संभव है कि संबंधित केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति में सख्ती करेंगे। ऐसे में जब तक बैंक ऑफ जापान और यूरोपीय केंद्रीय बैंक अपने नीतिगत कदम और समय-सीमा की घोषणा नहीं कर देते तब तक एफपीआई समेत हर कोई तीसरी दुनिया के ऋण से जुड़ी प्रतिबद्घताओं को लेकर हिचकिचाहट में रहेगा।
 
अगला पखवाड़ा कर्नाटक विधानसभा चुनावों की खबरों से भरा रहेगा। बहरहाल मौजूदा ध्यान कारोबारी नतीजों पर है। आरआईएल का राजस्व 29 फीसदी बढ़कर 12 खरब रुपये रहा। कंपनी का शुद्घ मुनाफा 94.6 अरब रुपये रहा जो सालाना आधार पर 17.5 फीसदी बढ़ा। सकल रिफाइनिंग मार्जिन अक्टूबर-दिसंबर 2017 की तुलना में कुछ कम हुआ।  आरआईएल की दूरसंचार अनुषंगी रिलायंस जियो ने 71.28 अरब रुपये का लाभ दिखाया जो पिछली तिमाही से 3.6 फीसदी अधिक था। कंपनी ने 2.65 करोड़ ग्राहक जोड़कर उनकी कुल संख्या 18.66 करोड़ कर ली। प्रति उपभोक्ता औसत राजस्व गिरकर 137 रुपये हो गया लेकिन वह अब भी भारती एयरटेल के 116 रुपये से ज्यादा है। 
 
एयरटेल ने चौथी तिमाही में मुनाफे में 73 फीसदी कमी दर्ज की। हालांकि उसके अफ्रीकी कारोबार में सुधार हुआ। राजस्व में सालाना आधार पर 3.4 फीसदी की कमी आई और वह 196 अरब रुपये रहा। भारती इन्फ्राटेल टावर कारोबार के इंडस टावर के साथ विलय से जरूर लागत में कमी आएगी और भारती समूह के लिए टावर कारोबार में कुछ हिस्सा बेचने की गुंजाइश बनेगी।  तकनीकी रूप से यह निफ्टी के लिए बहुत अच्छा महीना साबित हुआ। सूचकांक 10,7000 के 200 दिन के औसत स्तर से 5.7 फीसदी उछला। अल्पावधि का रुझान बढिय़ा है और आने वाले दिनों में यह 10,900 से 11,000 के बीच पहुंच सकता है। 
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