बिजनेस स्टैंडर्ड - व्हिसल ब्लोअर के दौर में देश का कारोबारी जगत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, May 24, 2018 11:08 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

व्हिसल ब्लोअर के दौर में देश का कारोबारी जगत

जिंदगीनामा
कनिका दत्ता /  04 25, 2018

दुनिया भर की कंपनियों में उनके कामकाज के विभिन्न पहलुओं की देखरेख और निगरानी आदि करने के लिए अंकेक्षक, स्टॉक एक्सचेंज, बोर्ड, नियामक, राजस्व और अन्य प्रवर्तन निकाय होते हैं। इनमें से किसी ने धोखाधड़ी रोकने के लिए कुछ खास नहीं किया। सन 1990 के दशक के आखिर और 2000 के दशक के आरंभ के कुछ प्रमुख वैश्विक मामलों पर नजर डालें तो ऐसा ही लगता है। बैरिंग्स, एनरॉन-आर्थर एंडरसन, वल्र्ड कॉम, केमार्ट आदि कुछ ऐसे ही मामले हैं। बीते दो दशक के दौरान व्हिसल ब्लोअर के रूप में गड़बडिय़ां उजागर करने वाली एक नई कौम सामने आई है। क्या ये कारोबारी प्रशासन के ढांचे को बदल सकते हैं? 

 
सजग कारोबारी घरानों के प्रशासनिक ढांचे में व्हिसल ब्लोअर की शक्ति को पहचाना जाने लगा है। अधिकांश बड़ी भारतीय आईटी फर्म और बैंकों ने कर्मचारियों के लिए आचार संहिता में व्हिसल ब्लोअर नीति शामिल कर ली है। इसमें दो राय नहीं है कि ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य संस्थान को संभावित घोटालों से अवगत रखने का है।  एक ओर कई ऐसे संस्थान हैं जो कारोबारी प्रदर्शन पर तयशुदा मानकों के अनुरूप दृष्टिï रखते हैं, वहीं व्हिसल ब्लोअर के बारे में कुछ तय ढंग से नहीं कहा जा सकता है। कोई भी कर्मचारी जिसने आचार संहिता पर हस्ताक्षर किए हों या फिर संगठन के बाहर का कोई व्यक्ति जो अंशधारक, आपूर्तिकर्ता या निवेशक आदि हो वह यह काम कर सकता है। इन दिनों आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोछड़ और उनके पति के कारोबारी सौदों के बीच हितों के टकराव को लेकर जो आरोप हैं उनके मूल में एक व्हिसल ब्लोअर है जिसने 2016 में इसका खुलासा किया था। व्हिसल ब्लोअर अरविंद गुप्ता कोई असंतुष्ट कर्मचारी नहीं हैं बल्कि वह वीडियोकॉन समूह के एक पुराने निवेशक हैं। उन्होंने कहा कि वह दीपक कोछड़ की कंपनियों और वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत के बीच पुराने लेनदेन और हस्तांतरण को देखकर चकित रह गए थे। उन्होंने कोई खुफिया जानकारी नहीं जुटाई बल्कि उन दस्तावेजों का अध्ययन किया जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थे लेकिन किसी ने जिन पर ध्यान नहीं दिया था। उन्होंने यह जवाबदेही अपने ऊपर क्यों ली? यह स्पष्ट नहीं है लेकिन देश के निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक को लेकर उपजे इस विवाद ने इसके संचालन की उन कमियों को उजागर किया है जिन्हें उसे जल्दी से जल्दी दूर करना होगा।
 
अंदरूनी व्हिसल ब्लोअर द्वारा किए गए खुलासे केवल प्रतिष्ठा को ही नुकसान पहुंचाएं यह भी आवश्यक नहीं। दिनेश ठाकुर का मामला याद कीजिए। उन्होंने रैनबैक्सी के प्रवर्तकों द्वारा कंपनी को जापानी कंपनी दाइची सांक्यो को बेचे जाने के बाद यह खुलासा किया था कि कंपनी औषधि सुरक्षा परीक्षणों में गड़बड़ी करती रही है। यह उस वक्त किसी भी भारतीय दवा कंपनी का सबसे बड़ा सौदा था और इस खुलासे के बाद अमेरिकी संघीय औषधि प्रशासन न केवल नाराज हुआ बल्कि उसने रैनबैक्सी समेत तमाम भारतीय औषधि उद्योग की जांच कड़ी कर दी।
 
ठाकुर को इस सजगता का इनाम भी मिला। अमेरिका ने रैनबैक्सी पर 50 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया और ठाकुर को 4.8 करोड़ डॉलर की राशि इनाम में दी। ध्यान देने वाली बात है कि भारतीय औषधि नियामक घरेलू बाजार में होने वाले छल कपट को लेकर उनके ऐसे ही खुलासों को लेकर नाखुश ही रहा। इस घोटाले से भारत की कारोबारी प्रतिष्ठा पर भी आंच आई। बाद में दाइची ने भी रैनबैक्सी को सन फार्मा को बेच दिया। व्हिसल ब्लोअर ने इन्फोसिस को जितना प्रभावित किया उतना शायद ही कोई अन्य भारतीय कंपनी इनसे प्रभावित हुई होगी। इन्फोसिस में 2003 से ही व्हिसल ब्लोअर पॉलिसी है। वर्ष 2013 में एक अमेरिकी कर्मचारी ने वीजा से जुड़ी धोखाधड़ी उजागर की थी। इसके बाद संघीय जांच आरंभ हुई और बाद में एक समझौता हुआ जिसमें व्हिसल ब्लोअर को पुरस्कृत किया गया। वर्ष 2016 के बाद से इन्फोसिस एक अन्य विवाद में उलझी हुई है जो कंपनी के तत्कालीन सीईओ विशाल सिक्का द्वारा एक इजरायली कंपनी के अधिग्रहण से जुड़ा था। इस मामले में एक गुमनाम शिकायत की गई और ऐसा लगता है कि मामले का व्हिसल ब्लोअर कोई आर्थिक लाभ नहीं चाहता। हाल ही में उसने इस सौदे की जांच शेयर बाजार नियामक से कराने की मांग की है।
 
ये तीन प्रमुख मामले हैं लेकिन इनसे कारोबारी प्रशासन के और जवाबदेह होने की भावना नहीं उत्पन्न होती। ध्यान रहे कि इन तीनों मामलों में ऐसी कंपनियां शमिल हैं जो वैश्विक निवेशकों और ग्राहकों वाली बड़ी कंपनियां हैं जिन्हें पेशेवर अंदाज में चलाया जाता है। परंतु भारतीय कारोबारी जगत काफी हद तक परिवार संचालित है। यह एक ऐसा ढांचा है जो कर्मचारियों को सच बोलने के लिए कतई प्रोत्साहित नहीं करता। टाटा समूह के मामले में हम ऐसा देख चुके हैं। भारत में जहां सरकारी कंपनियां तक सार्वजनिक जांच परख के लिए उपलब्ध नहीं हैं वहां निजी कारोबारी जगत स्वैच्छिक पारदर्शिता की अपेक्षा करना बेमानी होगा। देश के एकदम शुरुआती व्हिसल ब्लोअर में भारतीय स्टेट बैंक के एक मझोले दर्जे के कर्मचारी का नाम आता है जिसने 1990 के दशक में हर्षद मेहता की वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया था। आज उसे कोई याद नहीं करता। इंडियन ऑयल के षणमुगम मंजूनाथ जैसे कई व्हिसल ब्लोअर को तो अपनी जान देकर कीमत चुकानी पड़ी। संसद ने व्हिसल ब्लोअर संरक्षण अधिनियम पारित तो किया है लेकिन अभी उसे लागू होना है। इसे जिस तरह कमजोर किया गया उससे यही अंदाजा मिलता है कि सरकारी संस्थानों या परियोजनाओं की अनियमितता उजागर करने वालों को शायद ही कोई प्रोत्साहन मिले। अगर सरकारी व्हिसल ब्लोअर को नजीर मानें तो उन्हें अपनी जान के लिए डरना चाहिए। 
Keyword: Whistleblower, company,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या तेल कंपनियों से कम लाभांश बिगाड़ेगा सरकार का गणित?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.