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अचानक मांग बढ़ी नकदी घटी

सोमेश झा और अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 04 17, 2018

आपूर्ति होगी सुनिश्चित


करीब आधे दर्जन राज्यों में नकदी की किल्लत को दूर करने के लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) हरकत में आए हैं। उनका कहना है कि फसल खरीद और शादी-विवाह का मौसम होने की वजह से नकदी की मांग बढ़ी है, वहीं कुछ एटीएम के सही ढंग से काम नहीं करने से भी नकदी की समस्या देखी जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और वित्तीय सेवा विभाग के सचिव राजीव कुमार के साथ इस मसले पर आज बैठक की।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नकदी की किल्लत को 'अस्थायी' बताया और देश के कुछ हिस्सों में नकदी की 'असामान्य' मांग को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में नकदी की पर्याप्त आपूर्ति की जा रही है।

नकदी किल्लत के बहाने विपक्षी दलों ने सरकार पर निशासा साधते हुए कहा कि यह नोट बंदी का दंश है। विपक्षी नेताओं ने इसे वित्तीय आपातकाल करार दिया। रिजर्व बैंक ने स्पष्टï किया कि वॉल्ट और करेंसी चेस्ट में पर्याप्त नकदी है और चारों प्रेस में नोटों की छपाई की रफ्तार बढ़ा दी गई है।

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने नकदी की अचानक मांग के पीछे कई कारण बताए। उन्होंने कहा कि कृषि और शादी-विवाह का मौसम होने और एफआरडीए बिल को लेकर कुछ राज्यों के लोगों में डर की वजह से लोग ज्यादा पैसे निकाल रहे हैं। इसके साथ ही आरबीआई द्वारा राज्यों में नोटों की आपूर्ति  एकसमान नहीं होने तथा 2,000 रुपये के नोटों की जमाखोरी की वजह से भी कुछ हद तक नकदी की किल्लत हुई है।

आरबीआई के आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'नोटों के परिवहन में समस्या की वजह से कुछ हिस्सों में नकदी की किल्लत देखी जा रही है, वहीं कई एटीएम को भी नए नोटों के अनुकूल बनाया जा रहा है। आरबीआई इन दोनों पहलुओं पर नजर रख रहा है।'

रिजर्व बैंक द्वारा वित्त मंत्रालय को हाल ही में सौंपे विश्लेषण के आधार पर बिज़नेस स्टैंडर्ड ने शुक्रवार को खबर प्रकाशित की थी कि आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में जमा की तुलना में निकासी ज्यादा हो रही है जिससे नकदी का संकट हो गया हैै। वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'पिछले तीन महीनों में देश में नकदी की मांग अचानक बढ़ गई है। इस माह के शुरुआती 13 दिनों में ही नोटों की आपूर्ति बढ़ाकर 450 अरब रुपये की गई है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में नोटों की मांग असामान्य रूप से बढ़ गई है।'  

गर्ग ने कहा कि आमतौर पर हर महीने करीब 200 अरब रुपये के नोटों की आपूर्ति की जाती है। लेकिन अप्रैल के पहले दो हफ्ते में 450 अरब रुपये के नोटों की आपूर्ति की गई है, जिससे संकेत मिलता है कि नकदी की मांग काफी ज्यादा बढ़ी है। कुमार ने कहा कि 5 से 7 दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी क्योंकि 500 रुपये के नोटों की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट किया, 'देश में नकदी की स्थिति की समीक्षा की। कुल मिलाकर जरूरत से ज्यादा नकदी चलन में हैं और बैंकों के पास भी पर्याप्त नकदी उपलब्ध है। कुछ क्षेत्रों में नकदी की मांग में अचानक और अप्रत्याशित बढ़ोतरी की अस्थायी स्थिति से तेजी से निपटा जा रहा है।'

नवंबर 2016 में नोटबंदी की घोषणा से पहले जितने नोट चलन में थे, उसकी तुलना में आज 102 फीसदी नोट चलन में हैं। 4 नवंबर, 2016 को 17.74 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में थे और इस समय 18.04 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में हैं। अलबत्ता नोटबंदी से जीडीपी और चलन में नकदी का अनुपात 11.6 फीसदी था जो अब घटकर 10.7 फीसदी हो गया है।

सामान्यत: हर साल चलन में नोटों की संख्या में 11 से 13 फीसदी की बढ़ोतरी होती है। इस बार ऐसा नहीं हुआ है और इसका ही नतीजा है कि देश में मांग के मुताबिक नकदी नहीं है। आरबीआई की करेंसी चेस्ट में महज 1.75 अरब रुपये की नकदी है जो अगले कुछ दिनों में एटीएम में पहुंच जाएगी। गर्ग ने कहा कि आरबीआई ने पिछले कुछ दिनो से 2,000 रुपये के नोटों की छपाई बंद कर दी है क्योंकि उसके पास 6.7 लाख करोड़ रुपये का पर्याप्त भंडार है। सरकार को संदेह है कि 2,000 रुपये के नोटों की जमाखोरी नकदी की कमी का एक कारण हो सकता है।

गर्ग ने कहा, 'हमने पाया है कि 2,000 रुपये के जितने नोट चलन में हैं, उनकी तुलना में बैंकों में कम नोट आ रहे हैं। हम इसकी जांच करेंगे लेकिन आप मान सकते हैं कि बड़े नोट जमाखोरी के लिए सबसे उपयुक्त हैं।'आरबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि अमूमन बिहू, विशू, संक्रांति, बंगाली नव वर्ष जैसे नए साल के त्योहारों के कारण नए वित्त वर्ष की शुरुआत में नकदी संकट की समस्या होती है।  

अधिकारी ने कहा, 'लॉजिस्टिक की समस्या को दूर करने के लिए आरबीआई बैंकों के साथ मिलकर काम कर रहा है। नकदी की कमी की समस्या से जूझ रहे इलाकों में बैंकों को पर्याप्त नकदी आपूर्ति के लिए नकदी प्रबंधन कंपनियों के साथ मिलकर काम करने को कहा गया है।' सरकारी बैंकों के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि बैंकरों की संस्था भारतीय बैंक्स एसोसिएशन ने देश की कुछ शाखाओं में जारी नकदी संकट के बारे में आरबीआई को लिखा है। एक वरिष्ठï बैंकर ने कहा कि कर्नाटक में आगामी विधानसभा चुनावों के कारण नकदी की जमाखोरी हो सकती है। 

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