बिजनेस स्टैंडर्ड - ई-वे बिल.. आसान हुई डगर मगर करना है लंबा सफर
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ई-वे बिल.. आसान हुई डगर मगर करना है लंबा सफर

सोमेश झा / रुद्रपुर (उत्तराखंड) 04 02, 2018

ट्रक पर रिपोर्टर

दिलशाद गार्डन (दिल्ली)-हापुड़ (उप्र)-मुरादाबाद (उप्र)-रामपुर (उप्र)-रुद्रपुर (उत्तराखंड)
दूरी करीब 250 किमी
बस से यात्रा का समय 4.5 घंटे
ट्रक से यात्रा का समय 6 घंटे से अधिक

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए ई-वे बिल व्यवस्था को नए सिरे से शुरू किया गया है लेकिन एक ट्रक के साथ यात्रा से साफ है कि इसकी सफलता का रास्ता लंबा और पेचीदा है। अगर कोई सोचता है कि ई-वे व्यवस्था लागू होने के बाद कोई चेकिंग नहीं होगी तो वह मुगालते में हैं। जहां तक चेक नाकों पर ट्रकों की लंबी कतारों का संबंध है तो जुलाई में जीएसटी के लागू होने के बाद से यह स्थिति नहीं है। वास्तव में कुछ ट्रांसपोर्टरों ने 1 अप्रैल को कामकाज बंद रखा। चूंकि वित्त वर्ष 2017-18 एक दिन पहले ही खत्म हुआ था और 1 अप्रैल को रविवार था, इसलिए ये ट्रांसपोर्टर उस दिन अपने वाहनों को नहीं भेजना चाहते थे। 

दिल्ली की एक लॉजिटिक्स कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि ई-वे बिल का असर सोमवार को देखने को मिलेगा। इस अधिकारी ने ई-वे की शुरुआत का असर जानने के लिए बिज़नेस स्टैंडर्ड के पत्रकारों को अपने ट्रकों में सफर कराने का वादा किया था। लेकिन यह योजना आगे नहीं बढ़ी क्योंकि रविवार को कंपनी ने अपना कामकाज बंद रखा। लेकिन कई ट्रांसपोर्ट कंपनियां ऐसी भी थीं जिनके यहां आम दिनों की तरह कामकाज हो रहा था। उनमें ओम लॉजिस्टिक्स भी शामिल थी। इसलिए इस संवाददाता ने उत्तर प्रदेश के रास्ते उत्तराखंड सामान ले जा रहे कंपनी के एक ट्रक में सफर करने का फैसला किया। 

दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा पर दिलशाद गार्डन के करीब स्थिति ओम लॉजिस्टिक्स के गोदाम पर कंपनी के कर्मचारी मंजीत करीब एक दर्जन ट्रकों के लिए ई-वे बिल बनाने में व्यस्त थे। ये ट्रक पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड जा रहे थे। ऑफिस में ई-वे बिल के बारे में कई दिशानिर्देश और नोटिस दीवार पर चस्पा थे। इनमें से एक में लिखा था, 'कृपया ट्रक में सामान भरने से पहले ई-वे बिल बनाना सुनिश्चित करें।' ई-वे बिल से मंजीत का काम बढ़ जाएगा क्योंकि उन्हें 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य के सामान के लिए चालान बनाना पड़ेगा लेकिन इससे ट्रांसपोर्टर का काम आसान हो जाएगा। उन्हें नाकों पर रुकना नहीं पड़ेगा और राज्य की सीमा पार करने के लिए चालान नहीं बनवाना पड़ेगा। 

मंजीत ने कहा कि ई-वे बिल से जांच में लगने वाले समय में कमी आने की संभावना है जिससे सामान की आवाजाही में कम समय लगेगा। उन्होंने ई-वे बिल पोर्टल से बनाए गए सभी बिलों का एक प्रिंटआउट निकाला। मंजीत ने कहा, 'बिक्री कर अधिकारी फिर भी इसे मांगेंगे। हमने पढ़ा है कि ई-वे बिल के प्रिंटआउट की जरूरत नहीं है लेकिन कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।'

मंजीत ने दस्तावेजों का पुलिंदा ड्राइवर अमित को पकड़ाया जो सामान लेकर रुद्रपुर जा रहे थे। रुद्रपुर दिल्ली से करीब 250 किमी दूर उत्तराखंड में है। ई-वे बिल व्यवस्था के तहत ट्रांसपोर्टरों को बिल ले जाने की जरूरत नहीं है और वे मोबाइल फोन में डिजिटल रूप में दस्तावेज दिखा सकते हैं। ट्रक ने आधी रात को अपना सफर शुरू किया और 200 मिनट बाद ही एक कर अधिकारी ने ट्रक रोककर दस्तावेजों के बारे में पूछताछ की। सावधानी से दस्तावेज देखने के बाद अधिकारी ने ड्राइवर को जाने की अनुमति दे दी। अपने स्मार्टफोन पर गीत सुनते हुए अमित ने कहा कि जुलाई में जीएसटी लागू होने के बावजूद बहुत कुछ नहीं बदला है। करीब 12 साल से दिल्ली-उत्तराखंड मार्ग पर ट्रक चला रहे अमित अब भी कर अधिकारियों को बिक्री कर अधिकारी कहते हैं। 40 किमी प्रति घंटे की औसत रफ्तार से ट्रक चलाते हुए अमित ने कहा, 'पहले बॉर्डर पर सामान का चालान बनाने में काफी समय लगता था। लेकिन अब समय घटा है।' 

ट्रांसपोर्टरों के लिए टोल प्लाजा पर लंबे समय तक इंतजार करना अब भी बहुत बड़ी समस्या है। हमारे ट्रक को उत्तर प्रदेश में एक टोल प्लाजा पर कम से कम आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा।  इस रूट पर दूसरी सबसे बड़ी बाधा सड़क की खराब स्थिति और रोशनी की कमी है। इसके बाद ट्रक को कहीं नहीं रुकना पड़ा लेकिन रुद्रपुर पहुंचने से पहले उसे एक क्षेत्रीय कर कार्यालय के बाहर रुकना पड़ा। इससे झल्लाए अमित ने अधिकारी से पूछा कि जब उसके पास सभी ई-वे बिल हैं तो फिर ट्रक रोकने की क्या जरूरत है। इस पर अधिकारी ने कहा, 'ट्रक को नहीं रोकना कहीं बड़ा अपराध है।' अधिकारी अमित को ऑफिस के भीतर ले गया और सामान के बारे में पूछताछ की, बिल की फोटोकॉपी ली और उसे जाने दिया। ये सबकुछ तब हुआ जबकि ई-वे बिल सूचना के ऑनलाइन दस्तावेज हैं। 6 घंटे की यात्रा के बाद जब हम रुद्रपुर पहुंचे तो अमित ने मुझसे पूछा, 'आप बताइए कि क्या बदला है।'
Keyword: ट्रक, वस्तु एवं सेवा कर, ई-वे बिल, ट्रक, चेक नाका, ट्रक, ट्रांसपोर्टर, GST, E-way Bill, Transporter,
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