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बैलेंस्ड फंड से निकलिए मगर सोच समझकर

संजय कुमार सिंह और तिनेश भसीन /  March 25, 2018

पिछले वर्ष बैलेंस्ड फंड अथवा इक्विटी केंद्रित हाइब्रिड फंड निवेशकों के दुलारे बने हुए थे। लेकिन अब इन्हें बेरुखी झेलनी पड़ रही है और इसीलिए इस साल जनवरी के मुकाबले फरवरी में उनकी बिक्री 31 फीसदी गिर गई। इस कमी का मुख्य कारण बजट में 10 फीसदी लाभांश वितरण कर (डीडीटी) लगाया जाना है, जो 1 अप्रैल से लागू होगा। शेयर बाजार में गिरावट इसका दूसरा कारण है। मौजूदा निवेशकों को इन फंडों में निवेश करने के आरंभिक कारणों पर दोबारा नजर डालनी चाहिए और अगर जरूरत लगे तो बाहर निकलने की समुचित रणनीति अपनानी चाहिए।

 
पहली बार शेयरों में निवेश करने जा रहे निवेशक यदि बैलेंस्ड फंड की तरफ देख रहे हैं तो वे इसमें निवेश कर सकते हैं। फंड्सइंडिया डॉट कॉम की अनुसंधान प्रमुख विद्या बाला कहती हैं, 'अगर आपने पहले कभी शेयरों में निवेश नहीं किया है तो शुरुआत के लिए बैलेंस्ड फंड बेहतर हैं। विशुद्घ इक्विटी फंडों के मुकाबले इनमें कम उतार-चढ़ाव होता है और निवेश को ये कई शेयरों में बांट भी देते हैं। 1,000-2,000 रुपये के साथ नए निवेशकों को एक ही पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट दोनों में संपत्ति आवंटन का फायदा मिल जाता है।' संपत्ति आवंटन का ध्यान फंड मैनेजर रखते हैं, इसलिए निवेशकों को बार-बार इसे संतुलित करने की चिंता नहीं करनी पड़ती।
 
जिन्होंने पहले ही बैलेंस्ड फंड में निवेश कर लिया है, उन्हें इस पर दोबारा नजर डालने की जरूरत है। अगर आपने ऊपर बताए कारणों से इसे खरीदा था यानी कम रकम के बाद पहली बार निवेश किया था तो निवेश बनाए रखें। लेकिन जिन निवेशकों ने इन फंडों के लाभांश विकल्प को कर मुक्त आय के स्रोत के रूप में बेच दिया है, उन्हें बाहर आ जाना चाहिए। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया में निदेशक - मैनेजर रिसर्च कौस्तुभ बेलापुरकर कहते हैं, 'किसी भी इक्विटी केंद्रित योजना का लाभांश स्थिर नहीं होता है, फंड के प्रदर्शन और बाजार की हालत पर निर्भर करता है।' जब बाजार चढऩा बंद हो जाता है और इन फंडों की अतिक्ति आय बंद हो जाती है तो मासिक लाभांश भी बंद हो जाता है।
 
जिन निवेशकों को लाभांश नहीं चाहिए, वे इन फंडों के ग्रोथ विकल्प को अपना सकते हैं। बेलापुरकर कहते हैं, 'याद रखिए एक विकल्प से दूसरे विकल्प में जाना नया निवेश माना जाएगा और उस पर कर लग सकता है।' साल भर पूरा होने से पहले ही विकल्प बदलने वालों पर 15 फीसदी अल्पावधि पूंजीगत लाभ कर लगेगा। बेलापुरकर की राय में साल भर पूरा होने के बाद ही विकल्प बदलना चाहिए।  अगर आपके निवेश को 1 साल पूरा हो गया है और आप 31 मार्च से पहले विकल्प बदल लेते हैं तो कोई दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर नहीं देना पड़ेगा। 31 मार्च के बाद ऐसा करने पर 10 फीसदी कर लगेगा। हालांकि उसके बाद भी आप कर से बच सकते हैं क्योंकि 1 लाख रुपये तक के पूंजीगत लाभ पर कोई कर नहीं लगेगा। इससे अधिक लाभ होने पर भी आपको बहुत चोट नहीं लगेगी क्योंकि ग्रांडफादरिंग का प्रावधान आपको बचा लेगा।  
 
मान लीजिए आप सेवानिवृत्त हैं और आपको नियमित मासिक आय चाहिए तो भी आपको बैलेंस्ड फंड से किनारा कर लेना चाहिए। साल भर पूरा नहीं हुआ है तो 15 फीसदी अल्पावधि पूंजीगत लाभ कर चुकाइए और बाहर निकल आइए। रकम लिक्विड फंड, अल्ट्रा-शॉर्ट टर्म डेट फंड या शॉर्ट टर्म डेट फंड में लगाइए और सिस्टेमैटिक विदड्रॉअल प्लान चुनिए। अगर आपको अधिक प्रतिफल चाहिए और अधिक उतार-चढ़ाव सहने की कुव्वत भी आपके भीतर है तो मासिक आय योजनाओं में जाइए, जो 25-30 फीसदी निवेश इक्विटी में और बाकी डेट में लगाती हैं।
Keyword: balanced fund, share market,,
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