बिजनेस स्टैंडर्ड - सिर चढ़कर बोलता तकनीक का जादू
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सिर चढ़कर बोलता तकनीक का जादू

खालिद अंजार /  03 01, 2018

तकनीक

तकनीक में हुई प्रगति सरकार और आम आदमी के लिए जादू की छड़ी साबित हुई है

नीक के लिए 10 साल हमेशा ही बहुत बड़ा अरसा होता है। जहां दो-तीन साल के भीतर ही कोई  तकनीक पुरानी पड़ जाती हो और उसकी जगह कई गुना बेहतर तकनीक छा जाती हो, वहां एक दशक में तो सूरत एकदम ही बदल जाती है। पूरी दुनिया में तो तकनीक का पहिया तेजी से दौड़ ही रहा है, भारत में भी पिछले 10 साल में तकनीक की सूरत एकदम बदल गई है। तेज रफ्तार वाला इंटरनेट, 4 जी स्मार्टफोन और कमोबेश हरेक विषय पर डिजिटल सामग्री अब इफरात में मिल रही है और उसकी कीमत भी बेहद कम है। जाहिर है कि आम आदमी दोनों हाथों से डिजिटल क्रांति के फल बटोर रहा है और महानगरों की कैद से बाहर आकर छोटे शहरों और कस्बों में भी तकनीक का इस्तेमाल खूब बढ़ गया है।

तकनीकी विकास का सबसे बड़ा असर तो खरीदारी के तरीके पर दिख रहा है। घर के राशन से लेकर कपड़ों और उपकरणों के लिए बाजारों की खाक छानने वाले उपभोक्ता अब ऑफलाइन यानी पुराने अंदाज की परंपरागत दुकानों से कन्नी काटकर ई-कॉमर्स के प्लेटफॉर्म पर सवार हो रहे हैं। इसीलिए खुदरा क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा भी ई-कॉमर्स या ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल में तब्दील होता दिख रहा है। यह स्वाभाविक भी है क्योंकि तकनीकी विकास के बाद अब लोग अपने घरों या दफ्तरों में बैठे-बैठे कंप्यूटर या स्मार्टफोन के जरिये ई-कॉमर्स वेबसाइट पर जाकर मनचाहे सामान की ऑनलाइन खरीद करना पसंद करते हैं। ई-कॉमर्स कंपनियों के पास ग्राहकों के बारे में जानकारी यानी डेटा का पूरा भंडार मौजूद है।

तकनीकी प्रगति से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)  का चलन बहुत बढ़ गया है, जिसका इस्तेमाल कर ये कंपनियां डेटा के आधार पर पता लगा लेती हैं कि किस क्षेत्र, किस आयु वर्ग और किस आय वर्ग के उपभोक्ता किस प्रकार के उत्पाद पसंद करते हैं। इतना ही नहीं, अलग-अलग उपभोक्ता की पसंद और रुचि के बारे में पता लगाना भी अब चुटकियों का खेल हो गया है। यह पता लग जाता है तो उपभोक्ताओं को खरीद के सटीक विकल्प मुहैया कराना और कारोबार बढ़ाना भी आसान हो जाता है।

तकनीक आम आदमी की जिंदगी तक ही सीमित नहीं रही है। सुदूर अंतरिक्ष में भी उसका दखल बढ़ रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पिछले एक दशक में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में मील के कई पत्थर तकनीक के बल पर ही चूमे हैं। उस दौरान 2008 में इसरो ने चंद्रमा के लिए चंद्रयान भेजा और 2014 में मंगल ग्रह के मार्स ऑर्बिटर मिशन को अंजाम दिया। पिछले साल के अंत में तो इसरो ने कमाल ही कर डाला। उसने एक साथ 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए अपना नाम इतिहास में दर्ज करा लिया।

कुल मिलाकर पिछले 10 वर्षों में भारत का तकनीकी विकास शानदार रहा है। ऐसे में आश्चर्य नहीं है कि सरकार के महत्त्वाकांक्षी 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' अभियान पूरी तरह से तकनीकी उपकरणों और माध्यमों पर ही निर्भर हैं। इनसे भारत की प्रगति को और भी रफ्तार मिलने की पूरी संभावना है। पिछले एक दशक में भारत की जिन उल्लेखनीय तकनीकी उपलब्धियों ने देश की सूरत बदलने का काम किया है, उनका खाका खींचने की कोशिश बिजनेस स्टैंडर्ड ने की है:

आईफोन से श्याओमी तक

अगस्त, 2008 में अमेरिका की दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी ऐपल ने भारत में अपना स्मार्टफोन आईफोन 3जी पेश किया था। यह पहला स्मार्टफोन था, जो तेज रफ्तार वाले इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल करने की क्षमता रखता था। हालांकि उस समय भारत में 3जी कनेक्टिविटी शुरू भी नहीं हो पाई थी। लेकिन एक दशक बाद हालत यह है कि भारत में तीव्र गति वाली इंटरनेट कनेक्टिविटी पर काम करने वाले स्मार्टफोन की कोई कमी नहीं है। इस दौरान भारत में स्मार्टफोन का बाजार इतनी तेजी से बढ़ा है कि आज इसने स्मार्टफोन बिक्री के मामले में अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है और पूरी दुनिया में दूसरे नंबर का स्मार्टफोन बाजार बन चुका है।

जीपीआरएस से 4जी तक

इंटरनेट के तीव्र विस्तार ने भारत को तकनीकी प्रगति के पथ पर तेजी से बढऩे में मदद की है। वर्ष 2008 में तो कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि भारत में तेज रफ्तार वाला इंटरनेट भी आ सकता है। उस समय इंटरनेट का मतलब 2जी तकनीक पर आधारित जीपीआरएस और एज सुविधाओं तक ही सीमित हुआ करता था। लेकिन पिछले 10 वर्षों में दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने 3जी और फिर 4जी सेवाएं लाकर भारत में इंटरनेट की सूरत ही बदलकर रख दी। अब तो भारत में 5जी कनेक्टिविटी भी लाने की चर्चा चल रही है जिससे इंटरनेट की गति और भी अधिक तेज हो जाएगी। आज के समय में भारत के 4जी नेटवर्क की गति भले ही दुनिया में सबसे तेज नहीं है, लेकिन यह सबसे अधिक किफायती इंटरनेट सेवा जरूर है। रिलायंस जियो जैसी कंपनियों ने जब से डेटा के बाजार में कदम रखा है तब से दूरसंचार कंपनियों के बीच कीमतों को लेकर गलाकाट मुकाबला चल रहा है। नतीजा यह हुआ है कि आज उपभोक्ताओं को बेहद किफायती दर पर इंटरनेट सेवाएं मिल रही हैं।

दूरदर्शन से नेटफ्लिक्स तक

लंबे समय तक भारतीय दर्शकों के लिए दूरदर्शन ही मनोरंजन एवं समाचार का इकलौता जरिया हुआ करता था। कई पीढि़यां तो समाचार और मनोरंजन के लिए दूरदर्शन पर ही आश्रित रही हैं। लेकिन 2008 तक भारत में केबल टीवी का काफी हद तक विकास हो चुका था। बहरहाल इंटरनेट की पहुंच बढ़ने से पिछले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन ने मनोरंजन एवं समाचार के लिए टेलीविजन की जगह लेनी शुरू कर दी है। टीवी के मशहूर शो भी या तो यूट्यूब जैसे ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग पोर्टल पर नजर आने लगे हैं या फिर वे विलुप्त ही हो चुके हैं। आज के दौर में नेटफ्लिक्स, एमेजॉन प्राइम वीडियोज और हॉटस्टार जैसे इंटरनेट पर डिजिटल सामग्री मुहैया कराने वाले प्लेटफॉर्म हैं। इन्होंने तय समय पर टीवी शो का प्रसारण करने वाली पुरानी परिपाटी को तोड़ दिया है और दर्शकों को अपनी सहूलियत के मुताबिक मनचाहे वक्त पर मनमर्जी के कार्यक्रम देखने की छूट दे दी है।

किराने की दुकान से एमेजॉन

पिछले 10 वर्षों में भारतीय बाजार में ई-कॉमर्स का उदय एकदम नई घटना है। ऑनलाइन खरीदारी का विकल्प मिलने से न केवल ग्राहकों का खरीदारी अनुभव बेहतर हुआ है बल्कि इसने समूचे विकल्पों को हमारे मोबाइल फोन तक लाने का काम किया है। आज के समय में पेंसिल से लेकर घर के फर्नीचर तक सारा सामान ई-कॉमर्स साइट पर खरीदा जा सकता है। इतना ही नहीं, सामान पसंद नहीं आए तो आम तौर पर उसे बिना किसी अतिरिक्त खर्च के बदलने की भी सुविधा मिलती है।

रिक्शा से उबर तक

एक दशक पहले टैक्सी-कैब सेवाओं का इस्तेमाल करना खासा महंगा हुआ करता था। इस वजह से लोग बसों, रिक्शा और ऑटो रिक्शा जैसे परंपरागत परिवहन साधनों पर ही निर्भर रहने के लिए मजबूर होते थे। लेकिन पिछले 10 वर्षों में मोबाइल ऐप पर आधारित कैब सेवाओं के विस्तार ने हमारे आवागमन के अनुभव को ही बदलकर रख दिया है। उबर और ओला जैसी कैब कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में शहरों में रहने वाले भारतीयों के पसंदीदा परिवहन विकल्प बनकर उभरी हैं। खास बात यह है कि कैब सेवाएं काफी सस्ती भी हैं। कभी-कभी तो एक टैक्सी की सवारी ऑटो रिक्शा की सवारी से भी सस्ता पड़ती है।

तकनीक का भविष्य

अगर पिछले एक दशक में तकनीकी प्रगति की रफ्तार और उसकी व्यापकता को ध्यान में रखें तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि हमें आने वाले दशक में यहां कुछ क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी सभी उपकरणों और सुविधाओं को इंटरनेट से जोडऩे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर चौतरफा मचे हंगामे को देखते हुए इस बात की पूरी संभावना है कि आने वाले समय में ये तकनीकी परिदृश्य के केंद्र में रहेंगे। इसके अलावा संवर्धित वास्तविकता और आभासी वास्तविकता को स्वीकार करने में तेजी आने से स्मार्ट कंप्यूटिंग गणना ग्लास और हेडसेट से भी आगे निकल जाएगी। तकनीकी विकास के इन नए पहलुओं को तूफानी रफ्तार वाले 5जी इंटरनेट की शुरुआत से काफी संबल मिलेगा।


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