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अमेरिका के पीछे चलने के दिन लदे : राजीव कुमार

इंदिवजल धस्माना /  March 23, 2018

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार बैंक निवेश कंपनी बनाने के पक्ष में हैं, जो सरकार के सरकारी बैंकों के शेयर अपने पास रखेगी। इसका सुझाव पी जे नायक समिति ने दिया था। कुमार ने इंदिवजल धस्माना से साक्षात्कार में कहा कि यह सरकारी कंपनियों की कार्यप्रणाली सुधारने के समाधानों का एक हिस्सा है

पंजाब नैशनल बैंक घोटाले के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के निजीकरण की मांग जोर पकड़ रही है। आप इस मसले पर सरकार को क्या सलाह देंगे? 


यह आसान मुद्दा नहीं है। पहला, देश में एक ऐसा कानून है, जो सरकार को सार्वजनिक बैंकों में अपनी हिस्सेदारी 50 फीसदी से कम करने से रोकता है। इस कानून में संशोधन करना होगा और राजनीतिक दलों के संसदीय गणित को देखते हुए ऐसा करना आसान नहीं है। यह कहना आसान है, लेकिन करना बहुत मुश्किल। पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने पिछली राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार में इस बारे में विचार किया था। इसकी व्यावहारिकता और सार्वजनिक बैंकों के सभी हितधारकों के सहमत नहीं होने के तथ्य को मद्देनजर रखते हुए मुझे नहीं लगता कि ऐसा हो पाएगा। मेरा मानना है कि इन बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार का समाधान वर्तमान ढांचे में ही खोजा जाना चाहिए। 

इसलिए समाधान को लेकर आपकी क्या राय है? क्या आप पी जे नायक समिति द्वारा सुझाए गए बैंक निवेश कंपनी के गठन के पक्ष में हैं?

यह समाधान का एक हिस्सा है। बैंक निवेश कंपनी गठित करने का मतलब है कि आपके पास विशेषज्ञों की एक संस्था होगी, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर नजर रख सकती है। मैं बैंक निवेश कंपनी गठित करने के पक्ष में हूं। इससे सरकार और बैंकों के परिचालन के बीच थोड़ा फासला बनाने में मदद मिलेगी, जिससे बैंकों का प्रबंधन सुधरेगा। दूसरा, पीएनबी घोटाले से यह चीज सामने आई है कि इनमें डिजिटल बैंकिंग को पूरी तरह नहीं अपनाया गया है। इसलिए हमें जाने-माने सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों का एक समूह बनाना चाहिए, जो बैंकों का आईटी ऑडिट कर सकें। आदर्श स्थिति तो यह है कि प्रत्येक सार्वजनिक बैंक की डिजिटल प्रणाली का पुनर्गठन किया जाना चाहिए। इस समय इन बैंकों में डिजिटल ढांचा पहले के ढांचे पर लागू किया गया है। अब नए बैंक आ रहे हैं। ऐसा ही सिंगापुर का एक नया बैंक सभी डिजिटल शाखाएं खोल रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ऐसे ही पुनर्गठन की जरूरत है। आईटी ऑडिट में ज्यादा समय नहीं लगेगा। 

ऐसे घोटालों को रोकने के लिए आरबीआई द्वारा एलओयू पर प्रतिबंध लगाया जाना सही कदम है? 

मैं भारतीय रिजर्व बैंक के इस कदम पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। 

पीएनबी घोटाले को लेकर आरबीआई और वित्त मंत्रालय में आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। आपके मुताबिक इनमें से कौन सही है? 

मैं इस मामले में नहीं पडऩा चाहता। 

विशेषज्ञों का कहना है कि हम बजट में सीमा शुल्क बढ़ाकर खुद संरक्षणवाद की तरफ वापस लौट रहे हैं, जबकि संरक्षणवाद विरोधी होने की बात करते हैं। क्या आप इससे सहमत हैं? 

मुझे नहीं लगता कि यह सही है। आयात शुल्क केवल कुछ जिंसों पर बढ़ाया गया था और इसकी अलग-अलग दरें थीं। हम उन मुक्त व्यापार समझौतों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं, जिन पर हमने हस्ताक्षर किए हैं। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की लघु मंत्रीस्तरीय बैठक ने भारत की नियम आधारित विश्व व्यापार प्रणाली के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाया है। बजट में यह कदम उठाने जाने का मकसद उन उद्योगों को राहत मुहैया कराना था, जो सस्ते आयात से प्रभावित हो रहे हैं। उद्योगों को यह राहत बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक और कौशल जरूरतें पूरी करने के लिए दी गईं ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकेंगे और घरेलू स्तर पर क्षमता में इजाफा हो। आपको इलेक्ट्रोनिक्स जैसे उद्योगों को राहत देनी होगी, लेकिन आप वाहन उद्योग के लिए ऐसा नहीं कर सकते। वाहन उद्योग में बीते समय में स्थानीय विनिर्माण को तरजीह दिए जाने से आज कंपनियां निर्यात कर पा रही हैं। इसी तरह की सफलता इलेक्ट्रॉनिक्स में भी हासिल की जा सकती है। हम अब भी उदार और खुली अर्थव्यवस्था हैं। 

क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा आयात शुल्क लगाए जाने से संरक्षणवाद और व्यापार युद्ध शुरू नहीं होगा? 

मुझे ऐसा नहीं लगता। अब वे दिन लद चुके हैं कि आज अमेरिका जो करता है, वह विश्व कल करेगा। अब विश्व, बाजारों और व्यापार पर अमेरिका के अत्यधिक दबदबे का दौर खत्म हो चुका है। मुझे लगता है कि टं्रप जो कर रहे हैं, उसकी देखादेखी यूरोप, चीन और जापान नहीं करेंगे। ऐसा नहीं है कि हम संरक्षणवादी दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं। यह अमेरिका की पुरानी आदत है। वह मुद्दों को द्विपक्षीय रूप से सुलझाता है। वे चीन के व्यापार अधिशेष को संतुलित करना चाहते हैं। चीन को थोड़ा नरम बनना पड़ेगा। 

भारत को लेकर आपका क्या कहना है? 

हमारा अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष उससे बहुत कम है, जो चीन का अमेरिका के साथ है। मुझे नहीं लगता कि हम द्विपक्षीय रूप से सौदेबाजी करेंगे। हालांकि हमारे लिए अमेरिका एक बड़ा बाजार है, लेकिन क्या हम झुकेंगे? मुझे नहीं लगता कि भारत पलटवार करेगा या नरम पड़ेगा। हमारा रुख यह रहा है कि हम बहुपक्षीय व्यापार नियमों के हिसाब से चलते हैं और ऐसे हथकंडे नहीं अपनाते। मेरा मानना है कि हम अपने रुख पर कायम रहेंगे। 

लेकिन इससे डब्ल्यूटीओ की साख कम होती है। क्या नहीं होती है? 

अमेरिका पहले भी ऐसा कर चुका है। वहां उदार विश्व व्यवस्था है। यह थोड़े समय की स्थिति है। मुझे नहीं लगता कि इसका विश्व पर लंबे समय तक असर पड़ेगा। 

आलोचक रोजगार पैदा न करने को लेकर सरकार पर हमले कर रहे हैं। हालांकि श्रम ब्यूरो के हाल के रोजगार के आंकड़ों में दिख रहा है कि विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार बढ़े हैं। देश में रोजगार की वास्तविक स्थिति क्या है? 

मैंने कभी कम रोजगार के आरोपों पर भरोसा नहीं किया। मैं घोष और घोष के अध्ययन के नतीजों में पूरा भरोसा रखता हूं। उन्होंने यह अध्ययन ईपीएफओ के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर जारी किया गया है। हालांकि मैं यह कहना चाहूंगा कि इन आंकड़ों में ओला, उबर और एमेजॉन जैसी नई नियोक्ताओं के आंकड़ों को शामिल नहीं किया गया। ये किसी भी रोजगार आंकड़े में शामिल नहीं किए जाते हैं। इसलिए नीति आयोग एक ऐसी इकाई बनाने की कोशिश कर रहा है, जो नए नियोक्ताओं से रोजगार के आंकड़े संग्रहित करेगी। आप जैसे लोग उस समय श्रम ब्यूरो के आंकड़ों पर भरोसा करते थे, जब ये रोजगार में गिरावट दर्शाते थे। अब भी इन आंकड़ों पर भरोसा किया जाना चाहिए क्योंकि अत्यधिक श्रमिकों की जरूरत वाले क्षेत्र और विनिर्माण क्षेत्र रोजगार में बढ़ोतरी दिखा रहे हैं। श्रम बल की ज्यादा जरूरत वाले क्षेत्रों के बढऩे में अभी बहुत संभावनाएं बाकी है, इसलिए आने वाले महीनों में इन क्षेत्रों में अच्छी वृद्धि देखने को मिलेगी। 

किसानों के लिए एमएसपी तय करने में नीति आयोग भी शामिल है। इसका डिजाइन कैसा होगा, क्या यह मध्य प्रदेश सरकार की भावांतर योजना की तर्ज पर होगा या केंद्र के वर्तमान मॉडल पर? 

हमने सभी राज्यों के कृषि सचिवों की एक बड़ी बैठक बुलाई है। हम जल्द से जल्द डिजाइन तैयार करने पर काम कर रहे हैं। तीन डिजाइन हैं। इनमें से एक भावांतर है, जिसका परीक्षण किया जा रहा है। दूसरी बाजार एश्योरेंस योजना है और तीसरी कीमत स्थिरता योजना के साथ निजी भागीदारी है। इन दिनों का परीक्षण किया जा रहा है।
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