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गारंटी पत्रों की देनदारी पर होगी बैठक

सोमेश झा / नई दिल्ली 03 18, 2018

पंजाब नैशनल बैंक का घोटाला

घोटाले के बाद देनदारी के निपटान की कोशिश
बैंकों के बीच इस मसले के समाधान के लिए आरबीआई जल्द ही बुला सकता है बैठक
घोटाले से जुड़े आधे एलओयू के लिए पीएनबी को 31 मार्च तक करना है भुगतान
अगर पीएनबी घोटाले से प्रभावित अन्य बैंकों को रकम का भुगतान करने में नाकाम रहता है तो सभी बैंकों के खाते में 2018-19 की पहली तिमाही में यह गैर-निष्पादित आस्तियां हो जाएंगी
इंडियन बैंक एसोसिएशन ने पीएनबी कर्मचारियों की तरफ से मोदी व चोकसी के बदले 30 भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को जारी एलओयू से जुड़े दावे के समाधान के लिए कई दौर की बैठक आयोजित की हैं

पंजाब नैशनल बैंक के 129 अरब रुपये के घोटाले में प्रभावित सभी बैंकों के साथ भारतीय रिजर्व बैंक जल्द बैठक कर सकता है ताकि नीरव मोदी व मेहुल चोकसी की कंपनियों को जारी फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग को लेकर देनदारी पर गतिरोध दूर किया जा सके। एक सूत्र ने कहा, बैंकों के बीच इस मसले के समाधान के लिए आरबीआई जल्द ही बैठक बुला सकता है।  घोटाले से जुड़े आधे एलओयू (60 अरब रुपये) के लिए पीएनबी को 31 मार्च तक भुगतान करना है। अगर पीएनबी घोटाले से प्रभावित अन्य बैंकों को रकम का भुगतान करने में नाकाम रहता है तो सभी बैंकों के खाते में 2018-19 की पहली तिमाही में यह गैर-निष्पादित आस्तियां हो जाएगी।

इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) ने पीएनबी कर्मचारियों की तरफ से नीरव मोदी व मेहुल चोकसी के बदले 30 भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को जारी एलओयू से जुड़े दावे के समाधान के लिए कई दौर की बैठक आयोजित की है। आईबीए ने सरकार व आरबीआई को घोटाले के चलते विभिन्न बैंकों के बीच विवाद के बारे में जानकारी दी है। पीएनबी ने हालांकि बार-बार कहा है कि वह एलओयू से जुड़ी वाजिब प्रतिबद्धता का पूरा सम्मान करेगा, लेकिन अन्य बैंकों ने क हा है कि पीएनबी सभी लेनदेन के लिए पूरी तरह उत्तरदायी है।

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार 5 करोड़ रुपये से ऊपर वाले कर्ज खाते की जांच के लिए अधिकृत नहीं है और ऐसे में वह बैंकों के बीच विवाद का समाधान नहीं कर सकती। एक सरकारी बैंक के अधिकारी ने कहा, वित्त मंत्रालय भी उम्मीद कर रहा है कि आरबीआई इस मामले में दखल देगा। हम उम्मीद कर रहे हैं कि नियामक जल्द बैठक बुलाएगा।

भारतीय स्टेट बैंक के उप-प्रबंध निदेशक एम एस शास्त्री ने गुरुवार को कहा था, चूंकि सभी एलओयू पीएनबी ने जारी किए थे, बैंकों ने इसके बदले भुगतान किया और सभी बैंक उम्मीद कर रहे हैं कि पीएनबी सभी एलओयू का भुगतान करेगा। हालांकि पीएनबी के कार्यकारी निदेशक संजीव शरण ने कहा, मामले की जांच हो रही है और यह प्रक्रिया के दायरे में है। ऐसे में इसका नतीजा अभी नहीं निकाला जा सकता। हम काम पर लगे हुए हैं।

प्रभावित बैंकों ने कहा, पीएनबी ने एलओयू जारी करते समय कहा था कि सभी लेनदेन ट्रेड क्रेडिट के लिए आरबीआई के दिशानिर्देश के अनुसार हुए हैं। एक वरिष्ठ बैंकर ने कहा, पीएनबी ने एलओयू जारी करते समय इस तरह का आश्वासन दिया है। यह सभी लेनदेन के लिए उत्तरदायी है। अन्य बैंकरों ने गारंटी, सह-स्वीकार्यता और लेटर आॉफ क्रेडिट पर आरबीआई की तरफ से जुलाई 2015 में जारी सर्कुलर सामने रखा है, जिसमें केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सभी बैंकों को लेटर ऑफ क्रेडिट से जुड़ी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना होगा, चाहे ऐसा लेनदेन धोखाधड़ी वाला ही क्यों न हो। 

पीएनबी ने भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को एलओयू जारी किया था और यह नीरव मोदी व मेहुल चोकसी की कंपनियों को कर्ज देने के लिए था। यह बैंक गारंटी के तौर पर काम करता है। भारतीय स्टेट बैंक, इलाहाबाद बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया समेत भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने पीएनबी के नेस्ट्रो खाते में रकम का हस्तांतरण किया और ये कर्ज अंतत: मोदी व चोकसी प्रवर्तित कंपनियों को दिए गए। एलओयू की व्यवस्था के तहत जिनके पास एलओयू होता है वह इसे जारी करने वाले बैंक के पास भुगतान के लिए भेजता है और अपना बकाया वापस ले लेता है। पीएनबी की तरफ से जारी एलओयू की अवधि मोटे तौर पर एक साल की है। आरबीआई ने इस घोटाले के बाद एलओयू जारी करने पर पाबंदी लगा दी है।
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