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भारत में टेलीविजन कारोबार की आर्थिक अहमियत

वनिता कोहली-खांडेकर /  March 16, 2018

भारतीय फिल्म उद्योग प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर कितने लोगों को रोजगार देता है? भारत के विशाल टेलीविजन व्यवसाय का आर्थिक मूल्य कितना है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो भारत में टीवी एवं फिल्म कारोबार के आर्थिक पहलू से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। 

भारत में मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग का कुल आकार 1,473 अरब रुपये तक हो चुका है। फिक्की-फ्रेम्स ने इस उद्योग के बारे में तैयार अपनी नवीनतम रिपोर्ट में इसके आर्थिक पहलुओं से संबंधित सवालों पर पहली बार जवाब तलाशने की कोशिश की है। मुंबई के ग्रैंड हयात होटल में पिछले हफ्ते जारी की गईं दो रिपोर्ट इस लिहाज से काफी अहम हैं। पहली रिपोर्ट फिक्की-फ्रेम्स के लिए ईवाई ने तैयार की है जो डिजिटल विज्ञापन परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल माध्यम का विज्ञापन राजस्व अन्य माध्यमों की तुलना में दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है। 


लेकिन इस रिपोर्ट से उत्साहित मीडिया कारोबार सलाहकारों, निजी इक्विटी फंड और मीडिया खरीद फर्मों को कड़वी सच्चाई से भी रूबरू होने की जरूरत है। डिजिटल विज्ञापन का आधार बहुत छोटा होते हुए भी 25 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। इस समय डिजिटल विज्ञापन कारोबार करीब 119 अरब रुपये का है जो 10 फीसदी की दर से बढ़ रहे टीवी उद्योग के आकार का करीब 18 फीसदी ही है। अधिक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि टेलीविजन के उलट फिल्म एवं प्रिंट क्षेत्र की कंपनियों को अपनी वृद्धि से फायदा मिला है लेकिन डिजिटल क्षेत्र में कमाई का बड़ा हिस्सा गूगल, यूट्यूब और फेसबुक के हिस्से चला जाता है। 

दुनिया भर में डिजिटल कारोबार इसी तरह काम करता है। अमेरिका में भी गूगल और फेसबुक का कुल डिजिटल विज्ञापन राजस्व के 70 फीसदी हिस्से पर कब्जा है। ऐसे में भारतीय मीडिया उद्योग को भविष्य की तरफ करीबी नजर रखनी चाहिए। इसीलिए विज्ञापन राजस्व में बढ़ोतरी का अनुमान लगाने वाला रुझान एक अच्छी खबर है। बाजार के बढऩे से डिजिटल माध्यम से जुड़े हरेक शख्स के बेहतर करने के अवसर बढ़ेंगे।

दूसरी रिपोर्ट डेलॉयट और मोशन पिक्चर डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (इंडिया) ने फिल्म और टेलीविजन उद्योग के आर्थिक योगदान पर तैयार की है। मुझे अरसे से इस तरह की रिपोर्ट आने का इंतजार था। इस कॉलम में अक्सर यह तर्क रखा जाता रहा है कि भारत का मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग अर्थव्यवस्था को दिए जाने वाले अपने असली योगदान के बरअक्स अपने हितों की पूर्ति के लिए लॉबी करने में काफी कमजोर है। इसके चलते इस उद्योग के साथ 'आकर्षक लेकिन नासमझ' क्षेत्र की तरह बरताव किया जाता रहा है। इसका मतलब है कि मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र आकर्षक भले ही है लेकिन करों को तर्कसंगत बनाने और ब्रॉडबैंड एवं सिनेमाघरों का विस्तार करने जैसे गंभीर मुद्दों पर उसके साथ चर्चा नहीं की जाती है। डेलॉयट-एमपीडीए की रिपोर्ट इस क्षेत्र की रोजगार देने की क्षमता, आर्थिक मूल्य संवद्र्धन और गुणक प्रभाव को भी ध्यान में रखती है।

पहले फिल्म जगत की बात करते हैं। यह सीधे तौर पर 2.4 लाख लोगों को रोजगार देता है और इसकी तीन गुनी संख्या में परोक्ष रोजगार भी देता है। फिल्म एवं टेलीविजन का कैमरा एवं हार्डवेयर निर्माण से लेकर पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर गुणक प्रभाव भी देखा जाता है। रिपोर्ट में राजकुमार हिरानी की बेहद सफल फिल्म '3ईडियट्स' पर एक रोचक केस स्टडी भी दी गई है। इस फिल्म के कुछ हिस्से लद्दाख में फिल्माए गए थे और क्लाइमैक्स दृश्य वहां की खूबसूरत पैन्गांग झील के किनारे शूट हुआ था।

डेलॉयट-एमपीडीए रिपोर्ट में कहा गया है कि 3ईडियट्स फिल्म के प्रदर्शन के बाद लेह-लद्दाख आने वाले पर्यटकों की संख्या वर्ष 2011 तक बढ़कर 1.80 लाख तक पहुंच गई थी जबकि वर्ष 2009 में यह संख्या महज 80,000 ही थी। यह सिलसिला आगे भी कमोबेश ऐसे ही जारी रहा है। लद्दाख में अपने प्रवास के दौरान हरेक पर्यटक ने औसतन 1,500 डॉलर खर्च किए। इस तरह फिल्म के परोक्ष असर से जम्मू कश्मीर सरकार को 9.56 अरब रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिला था। इसका मतलब है कि 3ईडियट्स ने बॉक्स ऑफिस पर भले ही 4.5 अरब रुपये की कमाई की हो लेकिन उसका समग्र आर्थिक योगदान काफी अधिक रहा।

हालांकि इस रिपोर्ट के नतीजों को रहस्य के आवरण से मुक्त करना होगा ताकि उपभोक्ताओं और नीति-निर्माताओं को सरल तरीके से उसके मायने समझाने लायक बनाया जा सके। ब्रिटेन के प्रोड्यूसर्स अलायंस फॉर सिनेमा ऐंड टेलीविजन जैसी संस्थाएं वर्षों से ऐसे संदेश ब्रिटिश नीति-निर्माताओं तक पहुंचाने की कोशिश करती रही हैं। इसके पीछे ब्रिटिश रचनात्मक उद्योग को वैश्विक पटल पर लाने की मंशा रही है।

भारत के मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग का आर्थिक योगदान बढ़ाने की दिशा में उठाए गए ये कुछ शुरुआती कदम हैं। इससे इस तथ्य को स्वीकार किया जाएगा कि यह उद्योग भारत के सकल घरेलू उत्पाद में अपने अंशदान को एक फीसदी से भी कम के मौजूदा स्तर से काफी आगे ले जा सकता है। हालांकि यह सफर काफी लंबा होने जा रहा है। 
Keyword: भारतीय, फिल्म, उद्योग, प्रत्यक्ष, परोक्ष,
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