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आर्सेलर की राह होगी आसान

वीणा मणि और देव चटर्जी / नई दिल्ली 03 11, 2018

सिफारिशों को दिया जाएगा अंतिम रूप

दिवालिया कानून की धारा 29 में संशोधन की सिफारिशों पर होगा निर्णय
उच्च स्तरीय समिति की आज होगी बैठक
समिति 'संबंधित पक्ष' की परिभाषा में बदलाव का दे सकती है सुझाव
एस्सार स्टील खरीदने की होड़ में आर्सेलरमित्तल
आर्सेलर की बोली पर उठे थे सवाल

कंपनी मामलों के मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति की सोमवार को बैठक होगी जिसमें दिवालिया कानून की धारा 29ए को संशोधित करने के लिए सिफारिशों को अंतिम रूप दिया जाएगा। समिति 'संबंधित पक्ष' की परिभाषा में बदलाव का सुझाव दे सकती है जिससे आर्सेलरमित्तल जैसी कंपनियों को फंसी संपत्तियों पर बोली लगाने की अनुमति मिल जाएगी। एस्सार स्टील के लिए आर्सेलरमित्तल की बोली पर इसलिए सवाल उठाए जा रहे हैं क्योंकि कंपनी और उसके प्रवर्तक एल एन मित्तल का उत्तम गैल्वा स्टील्स और केएसएस पेट्रोन में निवेश था। ये दोनों कंपनियों अब गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) घोषित हो चुकी हैं।

समिति ऐसे लोगों से संबंधित मुद्दे को देख रही है जिन्हें फंसी संपत्तियों पर बोली लगाने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसका कारण यह है कि वे उन लोगों से जुड़े हैं जो संशोधित दिवालिया कानून के तहत बोली लगाने के पात्र नहीं हैं। यह समिति कंपनी मामलों के मंत्रालय को अपने सुझाव देगी। 

एस्सार स्टील पर बोली लगाने की समयसीमा समाप्त होने से पहले आर्सेलरमित्तल ने उत्तम गैल्वा में अपनी 29 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी थी। इसी तरह कंपनी के प्रवर्तक एल एन मित्तल ने भी केएसएस पेट्रोन में अपनी 33 फीसदी हिस्सेदारी कजाकस्तान में इसकी मूल कंपनी को बेच दी थी। आर्सेलरमित्तल का कहना है कि एस्सार स्टील के लिए उसकी बोली वैध है।

दिवालिया कानून की धारा 29ए में यह प्रावधान किया गया है कि नकारात्मक सूची में शामिल कोई भी व्यक्ति अपनी समाधान योजना पेश करने का पात्र नहीं होगा। इसमें कहा गया है कि एक साल से अधिक समय से एनपीए बनी किसी कर्जदार कंपनी से जुड़ा व्यक्ति दिवालिया समाधान प्रक्रिया से गुजर रही कंपनी पर बोली नहीं लगा सकता है।

मुंबई में कंपनी मामलों के शीर्ष वकीलों का कहना है कि दिवालिया कानून में ताजा संशोधन से कई और मामले अदालती लड़ाई में फंस सकते हैं क्योंकि नियम और कानून ऐसे समय बदले जा रहे हैं जब कम से कम 40 कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही हैं। रिजर्व बैंक ने इन कंपनियों को दिवालिया समाधान के लिए भेजा है।

आर्सेलरमित्तल और रूस के वीटीबी बैंक के बहुलांश हिस्सेदारी वाली न्यूमेटल मॉरीशस के बीच एस्सार स्टील को खरीदने को लेकर लड़ाई चल रही है। न्यूमेटल की बोली को भी अमान्य पाया गया है क्योंकि रेवंत रुइया से जुड़े एक ट्रस्ट की न्यूमेटल में 25 फीसदी हिस्सेदारी है। जब एस्सार स्टील को एनपीए घोषित किया गया तो रुइया परिवार इसका प्रवर्तक था। 

रुइया ट्रस्ट ने अपनी हिस्सेदारी वीटीबी बैंक को बेचने की पेशकश की है ताकि न्यूमेटल बोली लगाने की हकदार बन जाए। मित्तल और वीटीबी बैंक के अधिकारियों ने अपनी-अपनी बोली के लिए समर्थन जुटाने के वास्ते शीर्ष सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की है।

संसद के दिवालिया कानून में संशोधन को मंजूरी देने के बाद बैंकों के एस्सार स्टील के लिए दूसरे दौर की बोली आयोजित करने की संभावना है। समिति साथ ही छोटी और मझोली कंपनियों के लिए बोली के नियमों को अंतिम रूप दे रही है। इसके अलावा वह कंपनियों को गारंटी देने वालों, दिवालिया होने वाले लोगों के लिए दिवालिया आचारसंहिता का सुझाव देगी।
Keyword: दिवालिया कानून, एस्सार स्टील, आर्सेलरमित्तल, उत्तम गैल्वा स्टील्स, केएसएस पेट्रोन, निवेश, वीटीबी,
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