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उत्पादन लक्ष्य से फिर चूक रही कोल इंडिया

अभिषेक रक्षित / कोलकाता 03 11, 2018

... बढ़ी कोयला आयात बढ़ने की संभावना

अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 के बीच 49.509 करोड़ टन रहा कोल इंडिया का उत्पादन
कोयला मंत्रालय द्वारा निर्धारित 53.132 करोड़ टन से 7 प्रतिशत कम रहा उत्पादन
बिक्री की मात्रा भी हुई 54.160 करोड़ टन के लक्ष्य से 3 प्रतिशत कम

आने वाले महीनों में तापीय कोयले का आयात बढऩे की संभावना है क्योंकि कोल इंडिया एक बार फिर अपने उत्पादन लक्ष्य से चूकने वाली है। इस कारण देश के तापीय विद्युत संयंत्रों में ईंधन की कमी हो रही है। दरअसल, यह चिंता की बात है, क्योंकि गर्मी के आने से भविष्य में कोयले की मांग बढऩे के आसार हैं। अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 के बीच कोयले का उत्पादन 49.509 करोड़ टन रहा, जो कोयला मंत्रालय द्वारा निर्धारित 53.132 करोड़ टन के लक्ष्य से सात प्रतिशत कम है। इसी प्रकार, इस अवधि के दौरान बिक्री की मात्रा 54.160 करोड़ टन के लक्ष्य से तीन प्रतिशत कम रखी गई है। चालू वित्त वर्ष में एक महीने से भी कम समय रह जाने के कारण विश्व की यह सबसे बड़ी कोयला खनिक 2017-18 के लिए अपने 60 करोड़ टन के वार्षिक लक्ष्य से चूकने वाली है।

दूसरी तरफ, विद्युत क्षेत्र में स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। 22 दिनों का औसत कोयला स्टॉक रखने के निर्धारित नियम की तुलना में 10 दिनों का स्टॉक होने की वजह से 28 फरवरी, 2018 को 51 विद्युत संयंत्र गंभीर या अति गंभीर रूप में वर्गीकृत किए जा चुके हैं। कोल इंडिया के एक अधिकारी ने कहा कि गंभीर या अति गंभीर रूप में वर्गीकृत किए गए सभी संयंत्र गैर-कोयला खदान वाले हैं, जिसका अर्थ यह है कि ये कोयला खदानों के संग्रह क्षेत्र में नहीं आते, इसलिए इनकी आपूर्ति या तो सड़क से या फिर रेल नेटवर्क के जरिये करनी पड़ती है।

इस क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, रेलवे रैक के लिए प्रमुख बाधा इनकी उपलब्धता में कमी और लदाई में लगने वाला समय है। विद्युत क्षेत्र के एक अधिकारी ने कहा कि अब जबकि रेक की उपलब्धता बढ़ गई है, तब भी महाराष्टï्र के खनिक हर रोज तकरीबन 250 रैकों की लदाई कर रहे हैं। लदाई के समय में सुधार किए जाने की जरूरत है। रेलवे नेटवर्क में भीड़-भाड़ होने के साथ-साथ खदान के निकासी स्थल से संयंत्र तक रेलवे ट्रैकों के संकरे होने की भी समस्या है।

इस भीड़-भाड़ को कम करने के लिए कोल इंडिया ने कोयले के तीन गलियारों - टोरी-शिवपुर, झारसुगुड़ा-बरपाली और मंड-रायगढ़ रेलवे लाइनों की परिकल्पना की थी, लेकिन इसमें संतोषजनक प्रगति नहीं हुई, यहां तक कि कंपनी के अधिकारी भी संतुष्ट नहीं हुए। कोल इंडिया के अधिकारी ने कहा कि अपर्याप्त उत्पादन ही अकेली दिक्कत नहीं है। इसके साथ-साथ हमें संयंत्रों को भी कोयला भेजना पड़ता है। उत्पादन और माल भेजने में भारी अंतर होने के मामले में कोयले का स्टॉक बढ़ जाएगा और इसी के अनुरूप आग जैसी दुर्घटनाओं का जोखिम भी।

Keyword: तापीय कोयले, आयात, कोल इंडिया, उत्पादन लक्ष्य,
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