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आयात शुल्क की मार से भागे तिलहन

सुशील मिश्र / मुंबई 03 06, 2018

बिगड़ता मिजाज

खराब मौसम के कारण कम उत्पादन की आशंका से भी तिलहन के दाम बढ़े
तिलहन किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने पाम तेल पर आयात शुल्क बढ़ाया
वायदा बाजार में सरसों का दाम 47 रुपये बढ़कर 4,155 रुपये हुआ
दिसंबर में केन्द्र सरकार ने कच्चे पाम तेल पर आयात शुल्क 15 % से बढ़ाकर 30 % कर दिया था

राजस्थान में मौसम के बिगड़े मिजाज से तिलहन फसल के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। तिलहन किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के मकसद से केंद्र सरकार ने पाम तेल पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है। आयात शुल्क में बढ़ोतरी और फसल खराब होने से कम उत्पादन की बढ़ती आशंका के कारण सरसों और सोयाबीन के दाम बढ़ गए हैं। 

पाम तेल के आयात शुल्क में बढ़ोतरी का असर तिलहन फसलों की कीमतों पर पड़ा है। हाजिर बाजार में सोयाबीन के दाम बढ़कर 3,950 रुपये प्रति क्विंटल हो गए जबकि सरसों 4,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। वायदा बाजार में भी सोयाबीन और सरसों के भाव उछल गए। कृषि कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स पर सोयाबीन का भाव बढ़कर 3,800 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया, सोयाबीन रिफाइंड तेल 780 रुपये प्रति 10 किलोलीटर हो गया। वायदा बाजार में सरसों का दाम 47 रुपये बढ़कर 4,155 रुपये हो गया जबकि कारोबार के दौरान 4,200 रुपये के पार पहुंच गया था। तिलहन फसलों के दाम बढऩे की प्रमुख वजह आयात शुल्क में बढ़ोतरी और तिलहन उत्पादक राज्यों में बारिश से फसल खराब होने की आशंका को माना जा रहा है।

केंद्र सरकार ने कच्चे पाम तेल पर आयात शुल्क 30 फीसदी से बढ़ाकर 44 फीसदी कर दिया है। रिफाइंड पाम तेल पर आयात शुल्क 40 फीसदी से बढ़ाकर 54 फीसदी कर दिया गया है। गौरतलब है कि चालू फसल वर्ष में दिसंबर महीने में सरकार ने तिलहन फसलों के आयात शुल्क में जोरदार बढ़ोतरी की थी।

दिसंबर में केन्द्र सरकार ने सोयाबीन पर आयात शुल्क 30 फीसदी से बढ़कर 45 फीसदी, कच्चे पाम तेल पर 15 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी, रिफाइंड पाम तेल पर 25 फीसदी से बढ़कार 40 फीसदी, सूरजमुखी तेल पर 12.5 फीसदी से बढ़कर 25 फीसदी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद खाद्य तेल के आयात में जोरदार बढ़ोत्तरी हो रही थी। विदेशों से आयात होने वाले खाद्य तेलों पर लगाम लागने के लिए ही सरकार ने एक बार फिर आयात शुल्क में बढ़ोतरी की है।

खाने के तेलों में सबसे ज्यादा आयात पाम तेल का होता है आयात होने वाले तेलों में करीब 67 फीसदी पाम तेल रहता है जबकि 33 फीसदी में अन्य तेल होते हैं। बढ़ते आयात से घरेलू बाजार में सोयाबीन और सरसों के किसानों को काफी नुकसान होने की बात हो रही है इसीलिए आयात शुल्क बढ़ाने की मांग होती रही है। आयात शुल्क बढ़ाने से सरसों और सोयाबीन के दाम बढ़ गए। कारोबारी संगठनों की मानी जाए तो राजस्थान में बारिश और ओले गिरने से सरसों की करीब 30 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है। प्रमुख तिलहन उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में भी पिछले महीने बेमौसम बारिश और ओला गिरने से फसल को नुकसान हुआ था। ऐसे में इस साल उत्पादन अनुमान से भी कम होने की आशंका बढ़ती जा रही है। जिससे तिलहन फसलों के दाम में बढऩे की बात कही जा रही है। 

फसल सीजन 2017-18 में तिलहन का उत्पादन 298.8 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के 312.8 लाख टन से कम है। तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन का उत्पादन 113.9 लाख टन, मूंगफली का उत्पादन 82.2 लाख टन और अरंडी बीज का उत्पादन 15 लाख टन होने का अनुमान है। सरकार दलहन और तिलहन फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए इनके न्यूतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदारी करने को बढ़ावा देने की योजना पहले ही तैयार कर चुकी है ताकि किसानों को उनके फसल का सही मूल्य मिले। केंद्र सरकार ने चालू रबी सीजन में दलहन के साथ तिलहन फसलों की खरीद के लिए 19,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जबकि पिछले साल आवंटित राशि 9,500 करोड़ रुपये थी। चालू महीने में रबी तिलहन फसलों में सरसों और मूंगफली की नई आवक बढ़ेगी। 
Keyword: मौसम, तिलहन, किसान, फसल, आयात शुल्क, वायदा बाजार, सरसों, पाम तेल, सोयाबीन,
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