बिजनेस स्टैंडर्ड - ... तब कच्चे तेल में दिखेगी धार
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... तब कच्चे तेल में दिखेगी धार

निर्माल्य बेहड़ा / भुवनेश्वर March 04, 2018

देश के पश्चिमी क्षेत्र में वर्ष 2030 तक कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता सर्वाधिक होने की संभावना है। यहां की रिफाइनिंग क्षमता 24.2 करोड़ टन प्रति वर्ष की सीमा को छू सकती है जो कि मौजूदा 12.14 करोड़ टन प्रति वर्ष की क्षमता से लगभग दोगुनी है।'
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की 'वर्ष 2040 तक रिफाइनिंग क्षमता में वृद्धि पर कार्य समूह' की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की गुजरात रिफाइनरी 2030 तक 1.8 करोड़ टन प्रति वर्ष के स्तर पर पहुंच जाएगी, जिसकी मौजूदा क्षमता 1.37 करोड़ टन प्रति वर्ष है।   
देश की ऊर्जा खपत में आश्चर्यजनक वृद्धि की वजह से कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।
ऊर्जा उपभोग 2015 से बढ़कर वर्ष 2035 तक 129 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाएगा और 2035 तक भारत के दुनिया की कुल ऊर्जा का 10 फीसदी का उपभोग करने की संभावना है।
इसी तरह, एचपीसीएल (हाल ही में जिसका अधिग्रहण ओएनजीसी ने किया है) की मुंबई स्थित रिफाइनरी की क्षमता मौजूदा 75 लाख टन प्रति वर्ष से बढ़कर वर्ष 2030 तक 95 लाख टन प्रति वर्ष होने का अनुमान है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज और एस्सार वर्ष 2030 तक अपनी क्षमता को बढ़ाकर क्रमश: 9.82 करोड़ टन प्रति वर्ष 4.5 करोड़ टन प्रति वर्ष कर लेंगी। वेस्टकोस्ट वर्ष 2030 तक 6 करोड़ टन प्रति वर्ष की क्षमता जोड़ेगी। 
भारत के उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में रिफाइनिंग क्षमता क्रमश: 6.95 करोड़ टन प्रति वर्ष, 7.26 करोड़ टन प्रति वर्ष, 3.8 करोड़ टन प्रति वर्ष और 1.6 करोड़ टन प्रति वर्ष के स्तर पर पहुंच जाएगी। वर्ष 2030 तक देश की कुल रिफाइनिंग क्षमता 43.8 करोड़ टन प्रति वर्ष होने की संभावना है।
घरेलू मांग को पूरा करने के लिए वर्ष 2040 तक देश में कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता बढ़कर 53.3 करोड़ टन प्रति वर्ष होने की संभावना है। यह संभावित आंकड़ा मौजूदा 24.76 करोड़ टन प्रति वर्ष की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।  
यदि 25 फीसदी निर्यात को अलग कर दिया जाए, तो भारत की रिफाइनिंग क्षमता का परिदृश्य वर्ष 2035 तक 55.4 करोड़ टन प्रति वर्ष और वर्ष 2040 तक 66.7 करोड़ टन प्रति वर्ष पर पहुंचने की 
संभावना है।
भारत में 24.76 करोड़ टन प्रति वर्ष की मौजूदा रिफाइनिंग क्षमता 2020 तक बढ़कर 25.9 करोड़ टन प्रति वर्ष और 2030 तक 43.9 करोड़ टन प्रति वर्ष होने की संभावना है, जबकि इन अवधियों में पेट्रोलियम उत्पाद (पीओएल) की मांग का रुख क्रमश: 22 करोड़ टन, 27.1 करोड़ टन और 33.5 करोड़ टन प्रति वर्ष रहने के आसार हैं।
भारत में कुल 23 रिफाइनरी हैं जिनमें से 18 सार्वजनिक क्षेत्र में, दो संयुक्त क्षेत्र में और तीन निजी क्षेत्र में हैं।
Keyword: रिफाइनिंग क्षमता, आईओसीएल,
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