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जतिन मेहता को बचा रही है मोदी सरकार: कांग्रेस

अर्चिस मोहन / नई दिल्ली March 01, 2018

पीएनबी घोटाले के आरोपी नीरव मोदी की तरह आर्थिक घपले कर विदेश भाग जाने की घटनाओं पर रोक लगाने संबंधी विधेयक पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जिस दिन मुहर लगाई उसी दिन विपक्षी दल कांग्रेस ने जतिन मेहता का मामला उठाते हुए कहा कि बैंकों को 6,712 करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले इस ज्वैलर के फरार होने में पर्दे के पीछे से मोदी सरकार ने ही मदद की है। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने गुरुवार को कहा कि जतिन मेहता की धोखाधड़ी का तरीका भी नीरव और उसके रिश्तेदार मेहुल चोकसी जैसा ही है। सुरेजवाला के मुताबिक मेहता की तीन कंपनियों ने कैनरा बैंक की अगुआई वाले बैंक कंसर्टियम के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की है। इस बैंक कंसर्टियम में पीएनबी भी शामिल है जो नीरव और मेहुल की धोखाधड़ी के चलते पहले ही 12,700 करोड़ रुपये गंवा चुका है। मेहता की कंपनियों के नाम विनसम डायमंड्स ऐंड ज्वैलरी लिमिटेड, फॉरेवर प्रेशस ज्वैलरी ऐंड डायमंड्स लिमिटेड और सुराज डायमंड्स हैं।
 
कांग्रेस ने कहा कि मेहता ने भारतीय बैंकों से अपनी कंपनियों के नाम पर जारी लेटर ऑफ क्रेडिट का इस्तेमाल कर विदेशों से सोने का आयात किया और फिर उससे बने आभूषणों को दुबई की कंपनियों को निर्यात किया गया। सुरजेवाला कहते हैं, 'मेहता की कंपनियों ने बैंकों से लिया गया कर्ज लौटाने से मना कर दिया और सारा पैसा डूब गया।' उन्होंने कहा कि नीरव, मेहुल, रोटोमैक कंपनी, द्वारकादास सेठ ज्वैलर्स और अब मेहता की तरफ से किए गए घोटालों का कुल आकार पिछले 12 दिनों में बढ़कर 39,000 करोड़ रुपये तक हो चुका है। कांग्रेस प्रवक्ता ने मेहता को 'प्रधानमंत्री के साथ करीबी ताल्लुकात रखने वाले कारोबारी परिवार से संबंधित' भी बताया। 
 
सुरजेवाला ने कहा कि मेहता के विनसम ग्रुप ने बकाये कर्ज के भुगतान में जब चूक की थी तो कर्जदाता बैंकों ने फरवरी 2014 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा से उसकी शिकायत की थी। कंपनी मामलों के मंत्रालय के पास जमा कराए गए दस्तावेजों में भी इन शिकायतों का जिक्र था। उन्होंने कहा कि गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय को भी इस मामले की जानकारी दी गई थी। लेकिन शिकायत मिलने के साढ़े तीन साल तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। कांग्रेस का आरोप है कि कार्रवाई में लेटलतीफी को छिपाने के लिए सीबीआई के पास बैंकों की तरफ से 4 अप्रैल 2017 को नई शिकायत दर्ज करवाई गई। उसके अगले ही दिन सीबीआई ने छह एफआईआर दर्ज किए थे।
 
सुरजेवाला ने कहा, 'सीबीआई कार्रवाई में देर होने से मेहता पत्नी समेत भारत से फरार हो गया और 2 जून 2016 को भारत की नागरिकता भी छोड़ दी। मेहता दंपती कर चोरी के स्वर्ग माने जाने वाले कैरेबियाई द्वीप सेंट किट्स ऐंड नेविस जाकर बस गए। उसके  साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि भी नहीं है।' उन्होंने कहा कि मेहता की धोखाधड़ी का तरीका बाकी भगोड़े घोटालेबाजों की ही तरह है यानी 'नियमों की अवहेलना, पैसे हथियाना और विदेश भाग जाना'। कांग्रेस ने सवाल पूछा कि गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने मेहता और उसकी पत्नी को भारतीय नागरिकता छोडऩे की इजाजत कैसे दे दी? सुरजेवाला ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा, 'क्या मेहता दंपती को इसमें सरकार से ही मदद मिली थी?'
 
प्रमुख विपक्षी दल ने कहा कि मोदी सरकार नीरव, चौकसी और मेहता जैसे भगोड़े घोटालेबाजों को पकडऩे के बजाय कार्ती चिदंबरम को प्रताडि़त करने में लग गई है। कार्ती कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के बेटे हैं। करीब एक दशक पुराने मामले में उन्हें भारत लौटते ही ने गिरफ्तार कर लिया गया। सुरजेवाला कहते हैं, 'आखिर अभी तक मोदी सरकार की एजेंसियों की तरफ से मेहता दंपती के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस क्यों नहीं जारी किया गया है?' मेहता दंपती जिस सेंट किट्स में जाकर बस गए हैं वह देश इंटरपोल का हिस्सा है लिहाजा रेड कॉर्नर नोटिस पर कार्रवाई करना उसकी बाध्यता होगी। 
 
सुरजेवाला ने मेहता को बचाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा, 'जतिन मेहता को कौन बचा रहा है? क्या इसका कोई संबंध इस बात से है कि मेहता के बेटे की शादी उस औद्योगिक घराने में हुई है जो प्रधानमंत्री के बेहद करीब है? आखिर क्या वजह है कि पूरी मोदी सरकार मेहता और उसकी कंपनियों की धोखाधड़ी और उन पर कार्रवाई के समय सभी सरकारी एजेंसियां सोती हुई पाई गईं?'
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