बिजनेस स्टैंडर्ड - जूट उद्योग को 800 करोड़ रुपये का नुकसान
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जूट उद्योग को 800 करोड़ रुपये का नुकसान

जयजित दास / भुवनेश्वर 02 28, 2018

उपभोक्ता मामले एवं खाद्य वितरण मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2018 के खरीफ सत्र और 2018-19 के रबी फसल सत्र के लिए 2,58,000 जूट बोरियों की गांठों की जगह दूसरे पदार्थों से बनी बोरियों के प्रयोग को मंजूरी दी है। सरकार के इस निर्णय से जूट उद्योग को बड़ा झटका लगा है। गौरतलब है कि जूट बोरियों की एक गांठ का वजन 180 किलोग्राम होता है। रबी सत्र की फसलों की भराई के लिए कुल 11.2 लाख गांठों की आवश्यकता है, जिसमें सरकार ने 10 प्रतिशत की छूट (डायलूशन योजना) दी है। इस छूट के कारण अब जूट बोरियों की जगह उच्च सघनता की प्लास्टिक बोरियां (एचडीपीई) और पॉलिप्रोपीन (पीपी) से बनी बोरियों का प्रयोग किया जा सकता है। वस्त्र मंत्रालय पहले ही इसकी अनुमति दे चुका है। रबी और खरीफ सत्र को मिलाकर लगभग 17 लाख जूट बोरियों की गांठों की आवश्यकता होगी। दोनों फसल सत्र के लिए कुल डायलूशन 15 प्रतिशत के करीब होगा।
 
इस डायलूशन योजना से जूट उद्योग को लगभग 800 करोड़ रुपयों का नुकसान होने की संभावना है। अनाज की भराई के लिए सरकार उद्योगों से बड़ी मात्रा में बी-ट्विल बैग (एक दूसरे प्रकार की जूट बोरी) खरीदती है। उद्योग से जुड़े एक स्रोत ने बताया, 'यह डायलूशन योजना दुर्भाग्यपूर्ण है। जूट उद्योग सरकार की मांग पूरी करने में सक्षम है, इसके बावजूद यह घोषणा की गई। प्लास्टिक बोरियों का रास्ता खोलकर एक तरह से जूट उद्योग पर उत्पादन में कमी करने का दबाव डाला जा रहा है।' इस योजना को मंजूरी देने के बाद उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 2018-19 के रबी सत्र के लिए जरूरी परिवर्तन कर दिए हैं। मंत्रालय ने राज्य सरकारों और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से कहा है कि वह संशोधित खाद्य आपूर्ति योजना के तहत बोरियों के लिए समय पर फंड की आपूर्ति सुनिश्चित करे। साथ ही सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी तरह से खरीद प्रभावित नहीं हो। जूट आयुक्त कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, रबी फसल के लिए पैकिंग सामान की बैकलॉग स्थिति (25 फरवरी को) 3.12 लाख गांठें हैं। वहीं, खरीफ फसलों के लिए बैकलॉग स्थिति 83,375 गांठें हैं।
 
Keyword: joot, cotton, bag, FCI,,
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