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जीएसटी में बिलों का मिलान होगा आसान

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 02 22, 2018

नीलेकणी मॉडल लागू करने की तैयारी

► क्रेता-विक्रेता को अब खुद अपने स्तर पर करना होाग बिलों का मिलान
शनिवार को होने वाली मंत्रिसमूह की बैठक में हो सकता है इस पर निर्णय

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत करदाताओं को बड़ी राहत देने के लिए इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणी के प्रस्तावित मॉडल को लागू करने की तैयारी की जा रही है। नीलकेणी ने जीएसटी के तहत कर चोरी को रोकने के लिए 'बिलों के मिलान' का जो मॉडल दिया था, उसमें मामूली फेरबदल के साथ लागू किया जाएगा, जिससे करदाताओं के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने में सुगमता होगी। बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह की बैठक शनिवार को होने जा रही है, जिसमें जीएसटी रिटर्न दाखिल करने को आसान बनाने के उपाय को अंतिम रूप दिया जाएगा। उसके बाद इसे 10 मार्च को जीएसटी परिषद की बैठक में पेश किया जाएगा।

जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट दावे के लिए बिलों का मिलान जरूरी है और अब यह काम जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) के बजाय करदाताओं को खुद करना पड़ सकता है। सरकार के एक अधिकारी ने कहा, 'अधिकतर राज्य इसके पक्ष में हैं। यह बहुत ही आसान है। इससे रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया एक ही चरण में हो जाएगी। मंत्रिसमूह इस पर शनिवार को अंतिम निर्णय लेगा। इसमें रिटर्न दाखिल करने की जरूरत नहीं होगी बल्कि केवल बिलों को अपलोड करना होगा।' अगर इसे मंजूरी मिलती है तो करदाताओं को एक ही जीएसटी रिटर्न दाखिल करना होगा जबकि अभी जीएसटीआर 1, 2, 3 तथा जीएसटीआर-3बी दाखिल करना होता है। आसान शब्दों में कहें तो बिलों का मिलान क्रेता-विक्रेता स्तर पर ऑफलाइन किया जाएगा न कि जीएसटीएन स्तर पर। प्रस्ताव के अनुसार विक्रेता को क्रेता के बिलों का मिलान कर अपलोड करना होगा।

बिलों के बेमेल होने के मामले में क्रेडिट के अटकने की स्थिति में मंत्रिसमूह क्रेता को अंतरिम आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट जारी करने की अनुमति देने पर निर्णय कर सकता है। सरकार के एक अधिकारी ने कहा, 'ऑफलाइन व्यवस्था में विक्रेता द्वारा अपलोड किए गए बिलों क्रेता को भी दिखेंगे। क्रेता को केवल उन्हीं बिलों को अपलोड करना होगा जो विक्रेता से छूट गए हों।'

नीलेकणी मॉडल में सुझाव दिया गया है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट बिलों को अपलोड करने के बाद मिल जाएगा और इसके लिए रिटर्न दाखिल करने की जरूरत नहीं होगी। नीलेकणी पिछले साल आईटी कंपनी इन्फोसिस में लौट आए थे, जो जीएसटीएन को क्रियान्वित कर रही है। जीएसटी परिषद ने नवंबर की बैठक में करदाताओं को राहत देते हुए बिलों के मिलान की व्यवस्था को मार्च तक के लिए टाल दिया था। पहले की व्यवस्था में जीएसटीआर 1 (बिक्री) और 2 (खरीद) फॉर्म खुद जीएसटीआर-3 से मैच होते थे, जिससे सुनिश्चित होता था कि करदाताओं द्वारा किया गया दावा सही है। 

वर्तमान में करदाताओं को इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे के लिए केवल जीएसटीआर 3बी और जीएसटीआर 1 ही दाखिल करना पड़ रहा है। जीएसटी राजस्व में कमी को देखते हुए सरकार बिलों के मिलान की व्यवस्था को फिर से लागू करने पर काम कर रही है। नवंबर में जीएसटी राजस्व घटकर 808.08 अरब रुपये रह गया था, लेकिन दिसंबर में यह बढ़कर 880 अरब रुपये हो गया।सरकार के अधिकारी ने कहा, 'अगर क्रेता विक्रेता द्वारा छूटे गए बिलों को अपलोड करता है, तो इनपुट टैक्स क्रेडिट अंतरिम आधार पर क्रेता को जारी किया जाएगा।'

इसके साथ ही विक्रेता को छूटे गए बिलों को अपलोड करने के बारे में विक्रेता को बताना होगा। अगर विक्रेता तय समय में बिलों को अपलोड नहीं करता है तो इनपुट टैक्स क्रेडिट वापस ले लिया जाएगा और विभाग इसकी जांच शुरू कर देगा। अधिकारी ने कहा अगर क्रेता फर्जी बिल अपलोड करता है या विक्रेता बिल अपलोड नहीं करता है तो इसकी जांच की जाएगी। पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा, 'प्रस्तावित व्यवस्था पहने से कहीं आसान नजर आ रही हैै। हालांकि उद्योग को इसे समझने और अमल में लाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।' ईवाई के पार्टनर बिपिन सपरा ने कहा कि प्रस्ताव से अनुपालन में आसानी होगी लेकिन इसमें खरीदार को कानून के अनुसार क्र्रेडिट लेने, उससे इनकार या उसे वापस करने की आजादी दी जानी चाहिए।

Keyword: मॉडल, जीएसटी, इन्फोसिस, नंदन नीलेकणी, कर चोरी, इनपुट टैक्स क्रेडिट, जीएसटीएन,
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