बिजनेस स्टैंडर्ड - भारतीय शेयर बाजारों के कदम से लगेगी रोक
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, May 21, 2018 06:41 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

भारतीय शेयर बाजारों के कदम से लगेगी रोक

बाअदब
सोमशेखर सुंदरेशन /  02 20, 2018

यह एक अप्रत्याशित एवं असाधारण कदम है। बाजार में सक्रिय सभी स्टॉक एक्सचेंजों ने एक समझौता किया है। उन्होंने एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की जो बाजार को दी जाने वाली वाणिज्यिक सूचना से कहीं अधिक एक कानून जैसा दिखा। देश के तीनों बड़े स्टॉक एक्सचेंजों ने एक साथ यह ऐलान किया कि वे विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों को कीमतों से संबंधित आंकड़े देना बंद करने जा रहे हैं। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, ऐसा देखा गया है कि विभिन्न कारणों से भारतीय प्रतिभूतियों पर आधारित डेरिवेटिव कारोबार दुनिया के कुछ देशों में बड़े स्तर पर हो रहा है जिसके चलते भारत से मुद्रा तरलता का प्रवाह हो रहा है जो भारतीय बाजारों के हित में नहीं है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) अधिनियम की धारा 11 और 11बी बाजार नियामक को प्रतिभूति बाजार के हित में दिशानिर्देश जारी करने की शक्तियां देती है।

 
संक्षेप में , भारतीय एक्सचेंजों ने यह घोषणा की है: 
 
भारतीय एक्सचेंज एवं उसके अनुषंगी सीधे या परोक्ष तौर पर कीमत संबंधी आंकड़े किसी भी ऐसे विदेशी स्टॉक एक्सचेंज या प्लेटफॉर्म को नहीं देंगे जो भारत के बाहर किसी भी डेरिवेटिव कारोबार में संलिप्त हैं। 
 
भारतीय एक्सचेंज, उनके अनुषंगी और उनके थर्ड पार्टी वेंडर भारत के बाहर सूचकांक की गणना करने वाले सूचकांक प्रदाताओं को कीमत के बारे में कोई भी आंकड़ा नहीं देंगे।
 
अगर वैश्विक प्रतिभूति सूचकांकों का 25 फीसदी या अधिक भारांक भारतीय प्रतिभूतियों का हो तो भी भारतीय एक्सचेंज उन्हें कीमतों से संबंधित जानकारी नहीं देंगे।
 
भारतीय एक्सचेंजों से कीमत संबंधी आंकड़े हासिल करने वालों को विदेशों में बाजार से जुड़ी निवेश योजना (स्ट्रक्चर्ड उत्पाद) या पी-नोट्स कारोबार के लिए आंकड़ों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
 
कीमत संबंधी आंकड़े मुहैया कराने से संबंधित सभी मौजूदा समझौतों को तत्काल खत्म किया जाएगा और उसके लिए नोटिस अवधि भी दी जाएगी। एक महीने के भीतर सभी समझौते या तो निरस्त कर दिए जाएंगे या उन्हें इस विज्ञप्ति के आशय के मुताबिक संशोधित किया जाएगा।
 
बाजार बंद होने के दो घंटे बाद प्रतिभूतियों का अंतिम बंद भाव स्टॉक एक्सचेंजों की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा और मीडिया संगठनों को भी भेजा जाएगा।
 
साफ है कि स्टॉक एक्सचेंजों का यह बयान एक तरह से शेयरों की कीमत के खुलासे पर पाबंदी लगाने की बात करता है। ऐसा समझौता वैश्विक बाजार में कीमत खुलासे की प्रतिस्पद्र्धा को प्रभावित कर सकता है। इस समझौते के बाद भारतीय प्रतिस्पद्र्धा आयोग और सेबी के बीच बाजार गतिविधियों को लेकर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन विदेशी बाजारों के प्रतिस्पद्र्धा नियामक और प्रतिभूति नियामक सीसीआई और सेबी से इस बारे में स्पष्टीकरण मांग सकते हैं। ऐसा लगता है कि विदेशी व्यापार से संबंधित विवाद के बीज डाल दिए गए हैं।
 
सरकारी एजेंसियों को जल्द ही इस मामले में खुद को पाक-साफ करने की जरूरत महसूस हो सकती है और इसके लिए वे इसे विदेशी प्रतिस्पद्र्धा का सामना करने के लिए घरेलू स्टॉक एक्सचेंजों के बीच का निजी समझौता करार दे सकते हैं। सरकारी एजेंसियां इस करार को अपनी सहमति देने का भी रुख अपना सकती हैं। लेकिन जैसे ही वे यह दावा करेंगी कि इस समझौते को उनका वरदहस्त हासिल था तो इसका मतलब यह भी निकाला जाएगा कि सरकार भी इसके पक्ष में है। वैसे प्रतिस्पद्र्धा कानून और प्रतिभूति कानून दोनों में ही सरकार को नीतिगत मसलों पर दिशानिर्देश देने का अधिकार मिला हुआ है। सरकार पर अपनी शक्ति का इस्तेमाल करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव भी पड़ सकता है ताकि सरकार इन नियामकों को संलिप्त होने का आदेश दे। इससे पहले बाजार नियामक और बीमा क्षेत्र नियामक के बीच यूलिप योजनाओं को लेकर हुए विवाद के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय दबाव देखा गया था।
 
स्टॉक एक्सचेंजों की तरफ से जारी विज्ञप्ति के भाव को परे रखकर देखें तो उसका विषयवस्तु एक आपात उपाय की तरह लगता है। ऐसे नीतिगत उपायों के पीछे निषेध, सेंसरशिप और पाबंदी का ही दर्शन होता है। सोने के आयात पर प्रतिबंध और रातों-रात बड़े नोटों को चलन से बाहर कर देने जैसे उपाय इसी सोच की देन हैं। ऐसे उपायों से आर्थिक गतिविधियां भूमिगत होने लगती हैं। शराबबंदी करने वाले राज्यों में शराब की अवैध बिक्री इसका सटीक उदाहरण है। भारतीय कंपनियां तेजी से वैश्विक हो रही हैं लिहाजा भारत में उनके शेयरों के भाव को लेकर वैश्विक स्तर पर रुचि पैदा होना लाजिमी है। भारतीय प्रतिभूतियों के भाव से संबंधित प्रत्यक्ष आंकड़ों की मांग आगे चलकर बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में विदेशी प्रतिस्पद्र्धा का सामना करने का बेहतर नीतिगत तरीका यह होता कि भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों को भारत के भीतर विदेशी प्रतिभूतियों के कारोबार का मौका मिले। ये सौदे भारतीय रुपये में किए जा सकते थे और विदेशी प्रतिभूतियों एवं विदेशी सूचकांकों को शामिल किया जाता। साहू समिति ने 'भारत डिपॉजिटरी रिसीट' नाम से ऐसी ही एक अवधारणा पेश की थी लेकिन नियामकों ने उसका तीव्र विरोध किया था। 
 
यह दलील जोर पकड़ रही है कि हमें भारतीय बाजार को विदेशी हाथ में जाने से रोकना चाहिए। पहले भारतीय कंपनियों को विदेशी एक्सचेंजों में सूचीबद्ध होने से रोकने के लिए भी ऐसी ही दलीलें दी गई थीं। विदेशी एक्सचेंजों को भारतीय बाजार के आंकड़े नहीं दिए जाने से खुद भारतीय बाजार जोखिम में पड़ सकता है। यह एक तरह से 1991 से पहले के दौर की तरह है जब भारतीय बाजार के संरक्षण के नाम पर आयात और निर्यात के लिए लाइसेंस जरूरी किया गया था लेकिन असल में उसने घरेलू बाजार को नुकसान ही पहुंचाया।
 
(लेखक अधिवक्ता और स्वतंत्र परामर्शदाता हैं)
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या मुखौटा फर्मों पर रोक के लिए बने सख्त कानून?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.