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पीएनबी मामले में सरकार ने रिजर्व बैंक से मांगी सफाई

सोमेश झा / नई दिल्ली 02 19, 2018

पंजाब नैशनल बैंक धोखाधड़ी

वित्त मंत्रालय ने पत्र लिखकर आरबीआई से पूछा है कि नियामक के तौर पर पीएनबी मामले में किसी तरह की गड़बड़ी का पता लगाया या नहीं और वह किसी कार्रवाई की योजना बना रहा है या नहीं

केंद्र सरकार ने पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी मामले में बैंकिंग नियामक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को पत्र लिखकर यह पूछा है कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की फर्मों को गारंटी पत्र (एलओयू) जारी करने में किसी स्तर पर उसे फर्जीवाड़े का पता लगा था या नहीं। सरकार के एक वरिष्ठï अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, 'बैंकिंग नियमन अधिनियम के तहत बैंकों की जांच, नियमन, ऑडिट और निगरानी में आरबीआई की अहम भूमिका होती है। हमने कुछ दिन पहले आरबीआई को पत्र लिखकर पूछा है कि यह कथित घोटाला कैसे हुआ और वर्षों से यह सब कैसे हो रहा था। क्या नियामक ने कानून के तहत अपनी भूमिका का सही तरीके से निवर्हन किया है।' मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने आरबीआई के बाह्यï नियंत्रण को लेकर कई सवाल उठाए जाने के बाद केंद्र की ओर से औपचारिक पत्र भेजा गया है।

वित्त मंत्रालय ने अपने पत्र में बैंकिंग नियमन (बीआर) अधिनियम 1949 की धारा 35, 35ए और 36 का हवाला देते हुए नियामक के तौर पर आरबीआई की शक्तियों और कार्यों का उल्लेख किया है। वित्त मंत्रालय ने आरबीआई से पूछा है कि क्या उसने विदेशी विनिमय प्रबंधन अधिनियम, 1999 की धारा 12 के तहत अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए इस मामले में शामिल बैंकों की उसने जांच की है। सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय ने आगे आरबीआई से कहा है कि वह अपने मौजूदा नियमों एवं नियमनों की समीक्षा करे ताकि आगे से इस तरह की धोखाधड़ी न हो।

आरबीआई ने पीएनबी मामले में अब तक एक सार्वजनिक बयान जारी किया है और उसमें कथित घोटाले के लिए बैंक का आंतरिक नियंत्रण प्रणाली को दोषी ठहराया था। 16 फरवरी को आरबीआई ने कहा था, 'पीएनबी में धोखाधड़ी बैंक के एक या अधिक कर्मचारियों के भ्र्रष्टï आचरण से जुड़ा परिचालन जोखिम और आंतरिक नियंत्रण की विफलता का मामला है। आरबीआई ने पीएनबी की नियंत्रण प्रणाली का निगरानी मूल्यांकन कर रहा है और इस बारे में समुचित कदम उठाया जाएगा।'

सरकार ने कहा कि आरबीआई को बैंकिंग नियमन की धारा 35 के तहत किसी भी बैंक, उसके खातों की जांच करने का अधिकार है। सरकार के एक अधिकारी ने कहा, 'आरबीआई किसी भी समय बैंक और उसके खातों की जांच कर सकता है। हमने नियामक से पूछा है कि क्या उसने ऐसा किया है और क्या वह कोई कार्रवाई करने की योजना बना रहा है।'

सरकार ने यह भी कहा है कि आरबीआई की भूमिका सतर्क करने वाली या बैंकों को ऐसे किसी भी लेनदेन पर रोक लगाने वाली है। इसके साथ ही वह समय-समय पर बैंकों को सलाह भी देता है। सूत्रों ने कहा, 'नियामक अपने नियुक्त अधिकारियों के माध्यम से बैंकों के कामकाज या उसके अधिकारियों के आचरण के बारे में रिपोर्ट लेता रहता है। वह किसी भी बैंक से इसकी रिपोर्ट मांग सकता है।' मंत्रालय ने पत्र में इसका भी जिक्र किया है कि आरबीआई के पास बैंकों के रिटर्न, विवरण और जानकारी की जांच करने का अधिकार है। पीएनबी धोखाधड़ी के संदर्भ में सुब्रमण्यन ने शनिवार को कहा था, 'अगर ताजा मामले से यह सवाल उठता है कि सार्वजनिक बैंकों की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पर्याप्त मजबूत नहीं है, तो यह सवाल भी उठना लाजिमी है कि नियामक के तौर पर बाहरी नियंत्रण या निगरानी पर्याप्त सुदृढ़ है या नहीं।' 
Keyword: पीएनबी धोखाधड़ी, आरबीआई, बैंकिंग, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, एलओयू, ऑडिट,
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