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सरकारी बैंकों के शेयरों पर धोखाधड़ी का असर जारी

पवन बुरुगुला / मुंबई February 19, 2018

सरकारी बैंक के शेयरों पर पंजाब नैशनल बैंक की धोखाधड़ी का असर जारी रहा और निफ्टी पीएसयू इंडेक्स 2.5 फीसदी टूटकर चार महीने के निचले स्तर पर आ गया। सोमवार से अब तक यह इंडेक्स 10 फीसदी टूटा है, जब देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक पीएनबी का 113 अरब रुपये का घोटाला सामने आया था। पिछले एक हफ्ते में कम से कम एक दर्जन सरकारी बैंकों के शेयर 10 फीसदी या इससे ज्यादा टूटे हैं और पीएनबी को सबसे ज्यादा चोट पहुंची है। पीएनबी का शेयर सोमवार को 7.3 फीसदी और टूट गया और इस तरह से एक हफ्ते की पूरी गिरावट 28 फीसदी तक पहुंच गई। धोखाधड़ी का दूसरे बैंकों पर भी असर पड़ा और बैंक ऑफ बड़ौदा 12 फरवरी से अब तक 14.6 फीसदी टूटा है। एसबीआई का शेयर इस अवधि में 7.2 फीसदी फिसला है जबकि पूरे पीएसबी का बाजार मूल्यांकन 489 अरब रुपये ढहा है। 
 
सोमवार को यूको बैंक के शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा क्योंंकि शनिवार को एक्सचेंज को भेजी सूचना में बैंक ने कहा कि इसकी हॉन्ग कॉन्ग शाखा ने पीएनबी की तरफ से जारी एलओयू के जरिए कर्ज दिया है। कारोबारी सत्र में यह शेयर नौ फीसदी तक टूट गया था, लेकिन अंत में सुधरकर 4.5 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। बैंक शेयरों में कमजोरी का बाजार पर असर पड़ा और मिश्रित वैश्विक संकेतों के बावजूद सेंसेक्स 236 अंक टूटकर 33,774 अंक पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 74 अंक की गिरावट के साथ 10,378 पर बंद हुआ। एफपीआई ने शुद्ध रूप से 9 अरब रुपये की बिकवाली की जबकि देसी संस्थागत निवेशकों ने 5.8 अरब रुपये के शेयर खरीदे। बाजार के भागीदारों का कहना है कि पीएसबी शेयरों पर अल्पावधि से मध्यम अवधि में दबाव बना रहेगा क्योंकि निवेशकों की इनमें रुचि नहीं है और इन शेयरों में जोखिम के कारक काफी ज्यादा हैं। विश्लेषकों ने कहा, इस मामले में किसी विपरीत प्रगति से बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है।
 
यह कमजोरी मोटे तौर पर देसी बाजार में ही नजर आ रही है क्योंकि फरवरी की गिरावट से वैश्विक बाजार उबरने लगे हैं। पिछले एक हफ्ते में विकसित बाजारों में से पांच फीसदी से ज्यादा की मजबूती आई है। ज्यादातर एशियाई बाजारों ने भी भारत के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। बाजार के भागीदारों ने कहा कि हालिया घटनाक्रम मसलन पीएनबी घोटाला और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ कर दोबारा लागू किए जाने के चलते भारतीय इक्विटी अभी कई अवरोधों का सामना कर रहा है।
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