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इंडिया रेटिंग्स ने दी थी उच्च रेटिंग

देव चटर्जी / मुंबई February 16, 2018

फिच के मालिकाना हक वाली इंडिया रेटिंग्स ने नीरव मोदी की मुख्य कंपनी फायरस्टर इंटरनैशनल प्राइवेट लिमिटेड को उच्च रेटिंग दी थी जबकि कंपनी उच्च कर्ज से जूझ रही थी। पंजाब नैशनल बैंक समेत अन्य भारतीय लेनदारों ने इस रेटिंग पर भरोसा करते हुए मोदी की कंपनी को कर्ज दिया। इंडिया रेटिंग्स के अधिकारियों ने कहा कि मोदी की कंपनी के अधिकारियों के साथ वे दिसंबर 2017 तक संपर्क में थे ताकि कंपनी के बारे में और जानकारी मिल सके और इस तरह से फायरस्टार इंटरनैशनल व समूह की सभी कंपनियों को 15 फरवरी के घटनाक्रम के बाद निगरानी वाली रेटिंग में डाल दिया, जब पंजाब नैशनल बैंक ने स्टॉक एक्सचेंजों को नुकसान के बारे में सूचना दी।
 
संपर्क किए जाने पर इंडिया रेटिंग्स के अधिकारियों ने कहा कि कंपनी की नीति के तहत हम किसी विशेष रेटिंग पर टिप्पणी नहीं करते। दिलचस्प रूप से एक साल पहले फरवरी 2016 में केयर रेटिंग्स ने फायरस्टार इंटरनैशनल की खराब होती वित्तीय सेहत पर चेतावनी जारी की थी। इसने कहा था कि फायरस्टार इंटरनैशनल का परिचालन मार्च 2015 तक विस्तृत परिचालन चक्र के हिसाब से हो रहा था, जिसके चलते बैंकों से मिली कार्यशील पूंजी का पूरा इस्तेमाल ऐसे समय में हो पाया जब परिचालन का प्रदर्शन फिसल रहा था। तब केयर ने कंपनी की 24.6 अरब रुपये की कर्ज प्रतिभूतियों की रेटिंग डाउनग्रेड कर दी थी। केयर ने फायरस्टार डायमंड्स लिमिटेड के खिलाफ भी चेताया था और कहा था कि कंपनी अपने कर्ज का पुनर्भुगतान शायद न कर पाए जब तक कि मूल कंपनी गारंटर नहीं बनती।
 
लेकिन 7 जून 2016 को केयर ने कहा कि बैंकों की तरफ से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद इसने तत्काल प्रभाव से फायरस्टार इंटरनैशनल को मिली बैंक सुविधा पर दी गई रेटिंग वापस ले ली है। यह इसलिए हुआ क्योंकि फायरस्टार इंटरनैशनल ने केयर के मुकाबले इंडिया रेटिंग्स पर ज्यादा भरोसा किया। जब केयर रेटिंग्स ने फरवरी 2016 में चेताया तो इंडिया रेटिंग्स ने एक साल बाद मार्च 2017 में कहा कि उसने स्थिर परिदृश्य के साथ कंपनी की ऋण प्रतिभूतियों की रेटिंग इंड-ए के तौर पर की है। यह रेटिंग फायरस्टार इंटरनैशनल का वित्तीय प्रदर्शन इंडिया रेटिंग्स की उम्मीद के मुताबिक रहना प्रतिबिंबित करता है, जैसा कि वित्त वर्ष 2016 में एकीकृत एबिटा मार्जिन 5.8 फीसदी रहने से संकेत मिलता है, जो वित्त वर्ष 2015 में 5.7 फीसदी रहा था।
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