बिजनेस स्टैंडर्ड - पीएनबी को चुकाना होगा बकाया
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, February 24, 2018 01:30 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम मुद्रा खबर

पीएनबी को चुकाना होगा बकाया

अभिजित लेले / मुंबई/नई दिल्ली 02 15, 2018

अन्य बैंक ने नीरव की कंपनियों को दिया कर्ज वापस मांगा

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) को सलाह दी है कि वह गारंटी पत्र (एलओयू) के एवज में किए जाने वाले बैंकों के दावों का भुगतान करे। इसके साथ ही आरबीआई ने पीएनबी से 2011 से लेकर अब तक इस मामले का पूरा विवरण मांगा है। एलओयू के माध्यम से करीब 114 अरब रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद स्थिति को संभालने के लिए बैंकिंग नियामक आगे आया और सभी कर्जदाताओं को ऐसे एलओयू की सख्त निगरानी करने को कहा है। आरबीआई ने बैंकों से कहा कि इस तरह के पत्र जारी करते समय पूरी जांच-पड़ताल की जाए। मुंबई में सार्वजनिक बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आरबीआई ने पीएनबी से कहा है कि वह एलओयू से संबंधित सभी तरह की देनदारियों को अदा करे।

पीएनबी की शाखा में कनिष्ठ स्तर के अधिकारी ने फर्जी तरीके से नीरव मोदी समूह की फर्मों - सोलर एक्सपोर्ट, स्टेलर डायमंड्स और डायमंड्स आर अस से बिना किसी गारंटी के विदेश की भारतीय बैंक की शाखाओं से बायर्स क्रेडिट लेने के लिए एलओयू जारी कर दिया। इन फर्मों का इस शाखा में केवल चालू खाता था और उसे किसी तरह की फंड या गैर-फंड आधारित लिमिट नहीं दी गई थी।

कंसल्टिंग फर्म एलिया कंसल्टिंग के मुख्य कार्याधिकारी दीपक भवनानी ने कहा, 'घोटाले की जांच करने के अलावा आरबीआई को बैंकिंग प्रणाली की खामियों का भी पता लगाना होगा जिससे जोखिम प्रबंधन तंत्र को ज्यादा बेहतर बनाया जा सके।' विभागीय पड़तालों के जरिये इस पूरे गोरखधंधे की जांच की जाएगी ताकि असली लाभार्थियों का पता लगाया जा सके। हालांकि इस पैसे की आवाजाही के तौर-तरीके को समझने और कानून तोडऩे के लिए जिम्मेदार लोगों की शिनाख्त करने में समय लग सकता है।

इस बीच बैंकों ने नीरव मोदी की कंपनियों को दिए गए कर्ज को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि एलओयू के जरिये की गई धोखाधड़ी उजागर होने के बाद बैंक नीरव की कंपनियों को दिए गए सारे कर्ज वापस लेने पर सहमत हो गए हैं। इस प्रक्रिया में अगला कदम यह है कि सवालों के घेरे में आई कंपनी और उसके प्रवर्तक सभी कर्जों के निपटारे के लिए बैंकों से संपर्क साधें। अगर वे बैंकों के समक्ष कोई समुचित कर्ज समाधान प्रस्ताव पेश करते हैं तो उस प्रस्ताव की व्यवहार्यता का अध्ययन किया जाता है और वित्तीय क्षमता का भी आकलन किया जाता है। लेकिन इस मामले की आपराधिक प्रवृत्ति को देखते हुए कर्ज समाधान विकल्प अपनाने के अवसर कम ही नजर आ रहे हैं।

पीएनबी ने मुंबई स्थित अपनी एक शाखा में 11,400 करोड़ रुपये की जालसाजी होने की शिकायत दर्ज कराई है। इधर, अन्य बैंकों का भी नीरव मोदी की कंपनियों में पैसा फंसा हुआ है। इलाहाबाद बैंक का करीब 40 अरब रुपये फंसा है, वहीं ऐक्सिस बैंक का 30 अरब रुपये और यूनियन बैंक का 20 अरब रुपये अटका है और बाकी रकम भारतीय स्टेट बैंक की है।
 

Keyword: bank, loan, debt, PNB, fraud, nivar modi, RBI,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या नीरव-चोकसी की सभी संपत्तियां जब्त करे सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.