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बदलाव की उचित योजना

संपादकीय /  February 14, 2018

हाल के दिनों में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को कुछ तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आधार डाटा लीक होने की कई घटनाएं सामने आई हैं। कई ऐसी खबरें  सामने आई हैं जिनमें मामूली पैसे देकर आधार आंकड़े हासिल किए गए या फिर काल्पनिक किरदारों को आधार संख्या जारी कर दी गई। इन घटनाओं से न केवल आधार की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए बल्कि इस व्यवस्था में जनता का भरोसा भी कमजोर हुआ है।  इस संदर्भ में प्राधिकरण ने गत सप्ताह घोषणा की कि वह आधार नामांकन के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के उपयोग को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ अपने समझौते का नवीनीकरण नहीं करेगा। उसने यह भी कहा कि आधार डाटा अद्यतन करने की कार्रवाई सही दिशा में है। प्राधिकरण ने कहा है कि आधार नामांकन और उसमें संशोधन करने से जुड़े केंद्रों में भ्रष्टाचार और नामांकन प्रक्रिया के उल्लंघन की कई शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में वह सीएससी के साथ समझौते को आगे बढ़ाना नहीं चाहता।

 
शुरुआती दिनों में सीएससी प्राधिकरण की योजना के लिए काफी अहम रहे क्योंकि प्राधिकरण तेजी से नामांकन करना चाहता था। खासतौर पर देश के दूरदराज इलाकों में। आज हालात बदल चुके हैं और 119 करोड़ भारतीय पहले ही आधार हासिल कर चुके हैं। कई लोगों ने सीएससी और ग्रामीण स्तर पर उससे जुड़े उद्यमियों को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। खासतौर पर देखें तो उन पर सेवाओं के लिए जरूरत से ज्यादा शुल्क लेने और रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं। इसके अलावा डाटा चोरी के आरोप भी लगे। प्राधिकरण के पास जल्द कदम उठाने के अलावा चारा भी नहीं था। 
 
बहरहाल, प्राधिकरण ने अभी जो कदम उठाया है, लगता नहीं कि उससे समस्या हल होगी। सीएससी के बाद वैकल्पिक व्यवस्था अपनाना आवश्यक है। यह सच है कि ढेर सारे लोगों को पहले ही आधार जारी किया जा चुका है। परंतु इसमें दी गई व्यक्तिगत जानकारी में सुधार की मांग निरंतर बनी रहती है। मसलन पते या फोन नंबर में बदलाव अथवा सुधार। एक अनुमान के मुताबिक सीएससी ने बीते पांच साल में 5.6 करोड़ सुधार किए हैं। चूंकि आधार प्राप्त लोग देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में आते-जाते रहते हैं तो यह मांग बढऩी ही है। अब जबकि सीएससी सेवा में नहीं होंगे और लोगों से इन सेवाओं के लिए नगर निगम या राज्य कार्यालयों में आने को कहा जा रहा है तो यह स्पष्ट नहीं है कि उनको समय पर सेवा मिल पाएगी या नहीं। देश में करीब 11,000 सीएससी हैं और पता नहीं अन्य सरकारी विभाग इस मांग को पूरा कर पाएंगे या नहीं।
 
इन हालात में यह स्पष्ट है कि लाखों भारतीय, खासतौर पर कमजोर तबके के लोगों को बिना किसी गलती के परेशान होना पड़ेगा। इसके अलावा प्राधिकरण का सुझाव है कि डाटा लीक होने के लिए समस्या निवारण खोज व्यवस्था का दुरुपयोग हुआ है। माना जा सकता है कि यह एक तरह की स्वीकारोक्ति है कि प्राधिकार ने आधार नामांकन प्रक्रिया के लिए सीएससी नेटवर्क पर भरोसा कर गलती की। इसके लिए चुना हुआ समय भी विचित्र है। प्राधिकरण ने गत अगस्त में कहा था कि वह सीएससी के साथ मिलकर नामांकन के लिए मोबाइल वैन का इस्तेमाल करेगा। कई सीएससी ने इस दिशा में काफी निवेश भी किया है। विभागीय मंत्री ने रोजगार मुहैया कराने में उनकी भूमिका की भी सराहना की थी। अब जबकि प्राधिकरण ने सीएससी को त्याग दिया है तो यह भी पता नहीं है कि उसमें समस्या का समय पर पता लगाने या बदलाव की योजना बनाने की कितनी क्षमता है।
Keyword: aadhaar, data, UIDAI, CSC,,
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