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आधार की आलोचना की तो होंगे 'परेशान'

रॉयटर्स /  February 13, 2018

देश की विशिष्ट पहचान परियोजना, 'आधार कार्ड' में खामियों का खुलासा करने वाले शोधकर्ताओं और पत्रकारों का कहना है कि उनके काम की वजह से सरकारी एजेंसियां उन पर आपराधिक मामले दर्ज करा रही हैं या फिर उन्हें परेशान कर रही हैं। पिछले महीने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने 'द ट्रिब्यून' अखबार में प्रकाशित एक खबर के लिए अदालती मुकदमा ठोक दिया। इस खबर में बताया गया था कि आधार कार्ड का डेटाबेस 500 रुपये में खरीदा जा सकता है।  रॉयटर्स ने आठ अतिरिक्त शोधकर्ताओं, सक्रिय कार्यकर्ताओं और पत्रकारों से बात की जिन्होंने आधार से जुड़ी खबर लिखने के बाद सरकारी एजेंसियों द्वारा परेशान किए जाने की शिकायत की है। उनका कहना है कि यूआईडीएआई और दूसरी सरकारी एजेंसियां आधार कार्यक्रम की आलोचना को लेकर अतिसंवेदनशील हैं। आधार एक बायोमेट्रिक पहचान कार्ड है और यह देश की डिजिटलीकृत अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन रही है। इसके 1.1 अरब यूजर हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा डेटाबेस है। 

 
सरकार ने विभिन्न तरह के लेन-देन के लिए आधार संख्या जोडऩे की औपचारिकता पूरी करने की बात कही है जिनमें बैंक खाते से जुड़े काम, कर भुगतान, सब्सिडी पाने, मोबाइल नंबर हासिल करने, प्रॉपर्टी करार या शादी का पंजीकरण कराने जैसे काम शामिल हैं। ट्रिब्यून ने कहा कि उसके एक संवाददाता ने कुछ पैसे देकर उस पोर्टल तक पहुंच बनाई जिससे किसी भी आधार कार्डधारक से जुड़ा डेटा हासिल हो सकता है। यूआईडीएआई ने नई दिल्ली में पुलिस साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराते हुए अखबार, रिपोर्टर और अन्य लोगों पर अवैध तरीके से कंप्यूटर नेटवर्क में सेंध लगाने और फर्जीवाड़े के आरोपों के साथ मुकदमा दर्ज कराया।  मीडिया संगठनों ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा कि यूआईडीएआई का यह कदम उस पत्रकार को धमकी देने के लिए उठाया गया जिसकी खबर आम लोगों के हित में थी। वहीं यूआईडीएआई का कहना है, 'मीडिया में ऐसा माहौल बन रहा है कि यूआईडीएआई मीडिया, व्हिसलब्लोअर या खबर देने वालों को ही निशाना बना रही है जबकि यह सच नहीं है। अनुचित तरीके से डेटाबेस में सेंध लगाने के लिए कार्रवाई की जा रही है।'
 
डेटा लीक
 
पिछले मई में एक स्वतंत्र एडवोकेसी ग्रुप, सेंटर फॉर इंटरनेट ऐंड सोसाइटी (सीआईएस) ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें कहा गया कि सरकार की वेबसाइटों की असावधानी से लाखों लोगों की आधार संख्या लीक हुई है। इस रिपोर्ट के लेखक श्रीनिवास कोडाली कहते हैं कि यूआईडीएआई ने सीआईएस को कुछ दिनों के भीतर ही एक कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में यह आरोप लगाया गया था कि रिपोर्ट में जिन डेटा का हवाला दिया गया है वह तभी उपलब्ध हो सकता है अगर कोई वेबसाइट में अवैध तरीके से सेंध लगाएगा। कोडाली के मुताबिक दो और नोटिस मिले जो समूह के निदेशक और दो शोधकर्ताओं को भेजे गए थे जिनमें और ज्यादा आरोप लगाए गए थे। इस समूह के एक स्रोत जिन्होंने उस पत्र को देखा था, उनका कहना है कि सीआईएस को गृह मंत्रालय के उस विभाग की तरफ से इसकी फंडिंग को लेकर सवाल भेजे गए जो एनजीओ को विदेशी अनुदान पाने की अनुमति देता है। सूत्र का कहना है कि यह सीआईएस की फंडिंग को लेकर धमकी ही थी। सीआईएस और दूसरे कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की शिकायतों से जुड़े आरोपों पर टिप्पणी करने के लिए यूआईडीएआई को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं आया। जनवरी में एक आर्थिक अखबार के एक कॉलम में यूआईडीएआई के प्रमुख अजय पांडेय ने कहा, 'आधार धारकों का डेटा सुरक्षित है। किसी कथित सेंधमारी के दावे या अफवाह पर यकीन नहीं करना चाहिए।' दूरसंचार नियामक संस्था के प्रमुख आर एस शर्मा कहते हैं कि आधार के खिलाफ गुप्त रूप से अभियान चलाया जा रहा था क्योंकि यह कदम उन लोगों के हितों के खिलाफ है जो फर्जी नामों के साथ आभासी अर्थव्यवस्था में मौजूद हैं।
 
बेंगलूर के शोधकर्ताओं जिन्होंने सीआईएस की रिपोर्ट में योगदान दिया था उनका कहना है कि रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद ही पुलिस और सरकार ने परेशान करना शुरू कर दिया। शोधकर्ताओं का कहना है, 'पुलिस स्टेशन के लोग अक्सर आपके पास आते हैं। कई दफा गृह मंत्रालय के लोग भी आते हैं।' एक व्यक्ति ने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने यह सवाल तक पूछ लिया, 'तुर्की की आपकी यात्रा कैसी रही?' निश्चित तौर पर इस सवाल के जरिये यह बताया गया कि उनकी निगरानी की जा रही थी।  एक समाजविज्ञानी और आधार से जुड़ी किताब के लेखक समीर कोछड़ ने पिछले साल यह बताया था कि इस बायोमेट्रिक सुरक्षा में सेंध लगाई जा सकती है। कोछड़ को दिल्ली पुलिस की तरफ से कम से कम तीन नोटिस मिले जिनमें यह आरोप लगाया गया था कि तीन अलग-अलग कानून के तहत उन्होंने 14 धाराओं का उल्लंघन किया। कोछड़ के वकील ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। आलोचकों ने चेतावनी दी है कि आधार का इस्तेमाल सरकार निगरानी करने के लिए कर सकती है जबकि डेटा सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े नियमन पर अभी काम बाकी है।
Keyword: aadhaar, data, UIDAI,,
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