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आप जैसा चाहें और खाएं रेस्टोरेंट आपको खिलाएं

पवन लाल /  February 13, 2018

कई प्रकृति प्रेमियों की तरह अदिति डुगर और उनके पति हर साल एक बार लद्दाख की यात्रा करते हैं। लेकिन वे वहां केवल बर्फ से ढकी चोटियों और सुंदर नजारे देखने या फिर रोमांचक मोटरसाइकिल सवारी के लिए नहीं जाते हैं। वे वहां खासतौर पर हिमालयी बेर (सी-बकथॉर्न), याक चीज, लैवेंडर (बैंगनी रंग का सुगंधित फूल) और अजवाइन के फूल लेने जाते हैं ताकि वे 2016 में शुरू किए गए अपने रेस्तरां 'मास्क' की व्यंजन सूची में इसे शामिल कर सकें। इसी तरह रयान और कीनन थाम बंधु देश में कई रेस्तरां चलाते हैं जिनमें कोको, दि गुड वाइफ और नाइट क्लब ट्रिलॉजी जैसे रेस्तरां शामिल हैं जो देश के विभिन्न शहरों में मौजूद हैं। वे भी खाने के शौकीन लोगों को बेहतर चीजों की पेशकश करने के लिए कुछ अनूठे आइडिया पर काम करते हैं।

 
एक ऑनलाइन रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म इजीडाइनरडॉटकॉम के अध्यक्ष कपिल चोपड़ा कहते हैं कि अगले पांच सालों में लोग घर के बजाय बाहर ज्यादा खाना पसंद करेंगे। आखिर बाहर खाना खाने वाले लोग कितनी रकम खर्च करते हैं। नील्सन के शोध में कहा गया है कि देश के शहरी इलाके में लोग बाहर खाने पर साल भर में करीब 6,500 रुपये खर्च करते हैं। हालांकि इतनी रकम मास्क रेस्तरां में तीन लोगों को एक रात में ही खर्च करनी पड़ सकती है लेकिन इन रेस्तरां के लिए भी अलग तरह की संभावनाएं हैं क्योंकि 18 से 34 साल उम्र वर्ग के लोगों में खर्च करने की प्रवृत्ति ज्यादा है जो साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई करते हैं और खाने के खर्च का 13 फीसदी हिस्सा बाहर खाने पर खर्च करते हैं। यह 35-50 साल उम्र वर्ग के मुकाबले 5 फीसदी ज्यादा है जो इतना ही कमाते हैं। 
 
ऐसे में अब देश के रेस्तरां कारोबार में व्यापक बदलाव दिख रहा है जहां पहले इनकी ब्रांडिंग स्थानीय कारोबारों और परिवारों के लिए बना-बनाया खाना भेजने के लिए की जाती थी। पहले रेस्तरां कारोबार इंडियन, चाइनीज और कॉन्टिनेंटल पाक शैली के आधार पर आसानी से अलग वर्ग में बंटा हुआ दिखता था लेकिन अब इससे फ्यूजन व्यंजनों और दुनिया भर के खाने के मेन्यू, डिजाइन और सेवाओं के साथ नया प्रयोग करने की संभावनाएं बन रही हैं ताकि ग्राहकों को बार-बार अपने रेस्तरां में वापस बुलाया जा सके। 
 
सॉल्ट वॉटर कैफे, दि सोशल और स्मोकहाउस डेली की शुरुआत करने वाले इम्प्रेसारियो एंटरटेनमेंट ऐंड हॉस्पिटैलिटी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) रियाज अमलानी के मुताबिक अब रेस्तरां इस बात का अंदाजा लगाने की कोशिश करते हैं कि आखिरकार ग्राहकों की कैसी ख्वाहिश होती है और वे उसे 'मूड स्पेस' का नाम देते हैं। चाइना गार्डन, ऑलिव और इंडिगो जैसे रेस्तरां का जोर अब अलग-अलग दिनों में अलग फ्लेवर पर होता है जिसे उस दिन का खास स्वाद या खुशबू से जोड़ा जाता है। अमलानी कहते हैं, 'भारतीय उपभोक्ताओं को तीखा, चटपटा और सुगंधित खाना पसंद आता है।' उनका कहना है कि अब रेस्तरां ने भी उस बात पर गौर करते हुए अपने खाने में ऐसा बदलाव किया और इस बदलाव की बेहतरीन मिसाल बॉम्बे कैंटीन, मंकी बार हैं जिसने भारतीय पसंद के अनुसार ही पारंपरिक व्यंजनों से लेकर आधुनिक व्यंजन में बदलाव किया है। 
 
बुनियादी रूप से खाने में दो मॉडल काम करते हैं। एक कम पूंजीगत खर्च और ज्यादा कारोबार वाला मॉडल और दूसरा कम कारोबार लेकिन ज्यादा खर्च वाला मॉडल। अमलानी का कहना है कि नए स्वाद के उभार से अब वैसे रेस्तरां ज्यादा कामयाब हो रहे हैं जो लोकप्रिय चीजों की पेशकश करते हैं।  मिसाल के तौर पर थाम के कोको का एक बार है वहीं दूसरी और रिजर्व स्टाइल वाला रेस्तरां है जहां अमीर ग्राहक आते हैं। ग्राहकों को लंच के साथ कारोबारी बातें करने के लिए बेहतर जगह दी जाती हैं जहां वाईफाई जैसी सुविधा भी है। निश्चित तौर पर यहां ग्राहकों की कमी नहीं है। सोशल में ओपन स्टाइल वाले कैजुअल कैफे हैं और यहां युवाओं के लिए वक्त बिताने के लिए पर्याप्त जगह भी है। वे यहां अपना कंप्यूटर चला सकते हैं या फिर घंटों फोन पर बात कर सकते हैं भले ही उन्होंने सिर्फ एक बियर ही क्यों न ऑर्डर की हो। फिलहाल 18 सोशल रेस्तरां हैं और वह 10 और लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं। वहीं दूसरी ओर डुगर का कहना है कि वह दूसरे शहर में मास्क की शुरुआत करने की कोई योजना नहीं बना रही हैं। उनका कहना है, 'यह एक ऐसा कारोबार है जिसे एक शेफ द्वारा चलाया जाता है और इतनी आसानी से इसका दोहराव करना मुश्किल है।' प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल की नजर भी रेस्तरां कारोबार पर है लेकिन पिछले कुछ सालों में इसमें निवेश की रफ्तार कम हुई थी। हालांकि पिछले कुछ महीने से इसमें धीरे-धीरे तेजी आ रही है। पिछले साल दिसंबर में राबो बैंक ने ऑलिव रेस्तरां में आदित्य बिड़ला की पीई हिस्सेदारी खरीदी, एल-कैटरटन ने इम्प्रेसियो में बहुलांश हिस्सेदारी खरीद ली जबकि जीतू विरवानी के नेतृत्व वाले एंबेसी ग्रुप ने जेएसएम कॉर्प में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी जो हार्डरॉक कैफे और कैलिफोर्निया पिज्जा किचन का संचालन करती है। लाइटहाउस एडवाइजर्स इंडिया ने वाउ!मोमो को 150 जगहों पर स्थापित करने के लिए 46 करोड़ रुपये का निवेश किया है जो फास्टफूड की पेशकश करता है। इस कंपनी के पार्टनर सचिन भारतीय कहते हैं, 'अगर कोई मॉडल मुनाफा देने या विस्तार करने और ग्राहकों को बार-बार अपने पास बुलाने में सक्षम है तब निवेशकों की तरफ से पर्याप्त दिलचस्पी देखी जा सकती है।' बेशक ग्राहकों का अनुभव मायने रखता है और रेस्तरां मालिक हर चीज का ख्याल रखते हैं ताकि वे ग्राहकों को यादगार अनुभव दें सकें क्योंकि इस पर ही उनका मुनाफा और निवेशकों का आकर्षण निर्भर करता है। चोपड़ा कहते हैं, 'निश्चित तौर पर यह एक मुश्किल कारोबार है। हर एक सफलता के साथ 9 असफल चीजें होती हैं।' बेशक एक रेस्तरां से ब्रांड तैयार करना किसी कमजोर दिल वाले का काम नहीं है।
 
Keyword: restaurant, food,,
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