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कई देशों के मुकाबले काफी व्यस्त है दिल्ली हवाईअड्डा

अरिंदम मजूमदार / नई दिल्ली February 13, 2018

पिछले वर्ष घरेलू यात्रियों में भारी वृद्घि के चलते दिल्ली हवाईअड्डा 6 करोड़ यात्रियों वाले हवाईअड्ïडों के समूह में शामिल हो गया। इस श्रेणी में यह एशिया के शीर्ष छह और दुनिया के शीर्ष 20 सबसे व्यस्त हवाईअड्ïडों में शामिल हो गया है। 2017 में दिल्ली हवाई अड्डे ने 6.35 करोड़ यात्रियों का प्रबंधन किया जो कि चांगी, इंचिओन और जकार्ता सैकरनो हत्ता जैसे दुनिया के कुछ व्यस्ततम हवाई अड्ïडों से अधिक है। दुनिया भर में 21 ऐसे हवाई अड्डे हैं जो कम से कम 6 करोड़ यात्रियों का प्रबंधन करते हैं। इनमें से 10 एशिया में, 5 उत्तरी अमेरिका में, 5 यूरोप में और 1 खाड़ी देशों में है। दिल्ली हवाई अड्डे पर यात्रियों की संख्या में यह वृद्घि इसके बावजूद दर्ज की गई जब पिछले वर्ष ट्रैफिक की वृद्घि दर घटकर 14 फीसदी रह गई जो कि उससे पिछले वर्ष 21 फीसदी थी। ट्रैफिक वृद्घि दर में कमी आने की मुख्य वजह है कम किराये वाले विमानन कंपनियों ने अपनी क्षमता में अपेक्षित वृद्घि नहीं की। उदाहरण के लिए प्रैट विटनी इंजन में तकनीकी खामी ने इंडिगो की क्षमता वर्धन योजना को प्रभावित किया।    
 
 हालांकि, वैश्विक हवाईअड्ïडों से उलट दिल्ली हवाईअड्डे की वृद्घि में एक बड़ी हिस्सेदारी घरेलू उड़ानों का है जिसके यात्रियों की संख्या 4.66 करोड़ है। यह संख्या कुल यात्रियों का 73 फीसदी है। भले ही कम किराये वाले विमानों की क्षमता वृद्घि एक कमजोर पक्ष रहा, फिर भी इंडिगो, स्पाइसजेट जैसी दिल्ली की इन विमान कंपनियों ने यात्रिकों की संख्या में इजाफा करने में उल्लेखनीय योगदान दिया। इसके अलावा, पूर्ण सेवा वाले विमान विस्तारा का लगातार प्रसार और राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इडिया के अपनी उड़ानों में नए अंतरराष्ट्रीय मार्गों को शामिल करने से भी वृद्घि को रफ्तार मिली है। दिल्ली हवाईअड्डा के एक वरिष्ठï कार्यकारी ने कहा, 'ट्रैफिक में यह वृद्घि मुख्य तौर पर घरेलू वृद्घि के कारण आई है। पहली बार यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लोगों की खर्च करने की क्षमता कई गुणा बढ़ गई है और इसी बीच कम किराये वाले वातावरण से भी वृद्घि जोर पकड़ रही है।'  
 
2017 में मंदी के बावजूद 11.67 करोड़ घरेलू यात्रियों ने कम किराये वाले विमानों से उड़ान भरी। कम किराये के पीछे की वजह ईंधन की कम कीमत रही। कम किराया वाले विमानों ने यात्रियों की बड़ी संख्या को अपनी तरह मोड़ा जिसमें बाजार की अग्रणी कंपनी इंडिगो ने 40 फीसदी यात्रियों को आकर्षित किया। साल के अंत में दिल्ली एयरपोर्ट पर अधिकतम भीड़ रही। उस महीने 60 लाख यात्रियों ने यात्रा की। इस दौरान कम किराये वाले तीनों विमानन कंपनियों- इंडिगो, स्पाइसजेट और गो एयर के 90 फीसदी विमान भरे रहे।  
 
हवाई कंपनियों के कार्यकारियों का कहना है कि क्षमता दबाव के चलते मुंबई हवाईअड्डे पर सीमित वृद्घि अवसर और उत्तर भारत में बड़े हवाईअड्डे के अभाव की वजह से दिल्ली हवाईअड्डे पर वृद्घि देखी जा रही है। एक वरिष्ठï विमानन कार्यकारी ने कहा, 'हवाई कंपनियां मुख्य तौर पर दो शहरों- दिल्ली और मुंबई को ध्यान में रखकर अपना नेटवर्क तैयार करती हैं। मुंबई में हम विमानों की संख्या और अधिक नहीं बढ़ा सकते जबकि उत्तर भारत में चंडीगढ़ और अमृतसर दिल्ली के विकल्प नहीं हो सकते, लिहाजा यहां अधिक यात्री जुटते हैं।'  
 
निस्संदेह विमानन कंपनियां नई दिल्ली से नए गंतव्यों के लिए उड़ान शुरू करने के प्रति तत्पर रहीं हैं। घरेलू क्षेत्र में स्पाइसजेट ने पोर्ट ब्लेयर और जैसलमेर के लिए नई उड़ान शुरू की वहीं उसकी प्रतिस्पर्धी इंडिगो और गो एयर ने मौजूदा मार्गों पर विमानों की संख्या बढ़ाई। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर जहां एयर इंडिया ने दिल्ली हवाईअड्डे से तीन नए गंतव्यों- कोपनहेगेन, स्टॉकहोम और वाशिंगटन को जोड़ सबसे आगे रहा, वहीं जेट एयरवेज और इंडिगो ने रियाद और दोहा तक की उड़ान शुरू की। विदेशी विमानन कंपनियों में अलिटालिया ने रोम तक की सीधी उड़ान सेवा शुरू की। कजाख्तान की विमानन कंपनी एयर अस्ताना ने अस्ताना तक की सीधी उड़ान की शुरुआत की जबकि अफगानी विमानन कंपनी काम एयर ने मजार-ए-शरीफ के लिए उड़ान शुरू की। 
 
जानकार बताते हैं कि हवाईअड्डे के भविष्य में वृद्घि की योजना की जांच हवाई कंपनियों की मजबूत वृद्घि योजना से होगी और वह इस पर निर्भर करेगा कि ये कंपनियां कितनी तेजी से आधुनिकीकरण करती हैं। दिल्ली हवाईअड्डे के वृहत्ï प्रसार वाली 16,000 करोड़ रुपये की योजना जिसके तहत एक नए टर्मिनल और एटीसी टॉवर, चौथे रनवे का निर्माण किया जाना है और नए पार्किंग एरिया का निर्माण और टर्मिनल क्षमता का विकास होना है, पहले से चली आ रही कानूनी लड़ाई में फंसकर अटकी हुई है।   विमानन ब्लॉग नेटवर्क थॉट्ïस की संस्थापक अमेया जोशी ने कहा, 'नए एटीसी टॉवर की शुरुआत पिछले वर्ष ही होनी थी, जिसके चलते विमान का परिचालन बढ़ जाता।' उन्होंने आगे कहा भले ही घरेलू क्षेत्र में मांग की कमी नहीं है, सीमित खंडों के साथ वृद्घि सीमित ही होगी।     
Keyword: aviation, विमानन delhi,,
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