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सेबी को अधिक ताकतवर बनाने की तैयारी

बीएस संवाददाता /  February 11, 2018

वित्त विधेयक 2018 में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव के साथ कई अन्य कानूनों में भी बदलाव का प्रावधान किया गया है। इनमें भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड कानून 1992, प्रतिभूति अनुबंध नियमन कानून 1956 (एससीआरए) और डिपॉजिटरीज ऐक्ट 1996 शामिल हैं। प्रस्तावित संशोधनों पर एक नजर इस प्रकार हैं:

 
एसीआरए में संशोधन
 
सरकार ने सूचना प्रस्तुत करने में विफलता, निवेशक की शिकायतों को दूर करने में विफलता और सूचीबद्धता नियमों पर अमल करने में विफलता जैसे मामलों में जुर्माना लगाने की शक्ति के साथ भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को सशक्त करने का प्रस्ताव दिया है।
 
सेबी अधिनियम में संशोधन
 
जुर्माना लगाने की शक्ति  
 
सेबी को अब दिशानिर्देश जारी करने के साथ-साथ जुर्माना लगाने के लिए कहीं अधिक सशक्त किया जा रहा है। हालांकि सेबी जुर्माना लगाने की शक्ति का इस्तेमाल पहले से ही करता रहा है लेकिन मौजूदा खामियों को दूर करने के लिए इस कानून की धारा 11 के तहत विशेष प्रावधान जोडऩे का प्रस्ताव है।
 
वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ), रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट्ïूस (रीट्ïस), निवेश सलाहकारों, अनुसंधान विश्लेषकों पर जुर्माना लगाने की शक्ति: इस कानून की धारा 15ईए और 15ईबी के तहत सेबी को एआईएफ, रीट्ïस, बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट्ïस (आईआईटी), निवेश सलाहकारों और अनुसंधान विश्लेषकों द्वारा किए गए डिफॉल्ट के लिए जुर्माना लगाने की शक्ति देने का प्रस्ताव है।
 
दिशानिर्देशों के अनुपालन में विफलता के लिए एआईएफ, आईआईटी और रीट्ïस पर 1,00,000 रुपये प्रति दिन तक जुर्माना लगाने के लिए सेबी को सशक्त किया जा रहा है। जुर्माने की रकम अधिकतम 1 करोड़ रुपये अथवा अर्जित लाभ का तीन गुना होगी।
 
इसी प्रकार, सेबी दिशानिर्देशों के अनुपालन में विफलता के लिए निवेश सलाहकारों और अनुसंधान विश्लेषकों पर 1,00,000 रुपये प्रति दिन तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है जो अधिकतम 1 करोड़ रुपये होगा।
 
स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाने की शक्ति 
 
स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉरपोरेशन द्वारा एजेंटों अथवा प्रतिभूति बाजार से संबद्ध लोगों के साथ मामले निपटाते समय दिशानिर्देशों का उल्लंघन किए जाने पर 5 करोड़ रुपये से 25 करोड़ रुपये के बीच अथवा अर्जित लाभ के मुकाबले 3 गुना रकम (जो भी अधिक हो) जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
 
मृत व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधि को भरना पड़ेगा जुर्माना
 
अपने तरह के अनोखे प्रावधान के तहत वसूली अधिकारी को शक्ति दी गई है कि यदि व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो जुर्माने की रकम की वसूली उनके कानूनी प्रतिनिधि से की जाएगी। प्रतिभूति कानून एवं लेनदेन सलाहकार फर्म कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स के पार्टनर एवं प्रमुख (प्रतिभूति कानून) दीपिका साहनी ने कहा, 'इस संशोधन में यह भी प्रावधान किया गया है कि जुर्माने की रकम की वसूली केवल मृतक की संपत्ति से की जाएगी।'
 
पूर्णकालिक सदस्यों का सशक्तीकरण
 
इस कानून की धारा 11बी के प्रावधानों में संशोधन के तहत पूर्णकालिक सदस्यों को जुर्माना लगाने की शक्ति दी गई है। अब तक पूर्णकालिक सदस्य केवल उपचारात्मक एवं निषेधात्मक निर्देष ही जारी करते रहे हैं। जुर्माना न्याय अधिकारियों द्वारा लगाया जाता रहा था जिसके लिए एक अलग कार्यवाही की जाती थी।
 
डिपॉजिटर्स ऐक्ट में प्रमुख संशोधन
 
स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाने की शक्ति की ही तरह सेबी को डिपॉजिटरी पर भी जुर्माना लगाने के लिए सशक्त किया गया है। अपने कामकाज के दौरान कानून के अनुपालन में डिपॉजिटरी की विफलता की सूरत में सेबी जुर्माना लगा सकेगा। गांधी ऐंड एसोसिएट्ïस के संस्थापक विशाल गांधी ने कहा, 'इस प्रकार के गंभीर जुर्माने के प्रावधान के साथ ये संशोधन कानून को हल्के में लेने वाले किसी भी व्यक्ति पर एक प्रमुख निवारक की भूमिका निभाएंगे।'
Keyword: sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),
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