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बजट में नहीं मिली राहत तो जीएसटी कीजिए सहायक

दिलीप कुमार झा / मुंबई February 04, 2018

केंद्रीय बजट में राहत पाने में असफल रहे द्वितीयक धातु उत्पादक सोमवार को वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकात करेंगे। ये उत्पादक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के मौजूदा 18 फीसदी के स्तर को कम करके 12 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं ताकि धातु रीसाइक्लिंग में शामिल छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) को बंद होने से बचाया जा सके। द्वितीयक धातु उत्पादकों ने केंद्रीय बजट से पहले मेटल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमआरएआई) के तत्वावधान में सरकार से धातुओं के कबाड़ पर 2.5 फीसदी का आयात शुल्क हटाने का अनुरोध किया था। यही वह एकमात्र कच्चा माल है जो उन्हें 'शून्य शुल्क' पर एफटीए (मुक्त व्यापार समझौते) वाले देशों के तैयार उत्पाद के आयात से मुकाबला करने के लिए समान स्तर उपलब्ध कराएगा। हालांकि, बजट 2018 उल्ट शुल्क संरचना के नुकसान को पूरा करने में असफल रहा है।
 
चूंकि उपभोक्ता उद्योग एफटीए देशों से शून्य शुल्क पर प्राथमिक उत्पाद प्राप्त करने का तरजीह देते हैं, इसलिए पिछले कुछ सालों में द्वितीयक धातुओं की मांग में गिरावट आई है। इसके अलावा, सरकार ने प्राथमिक धातु उत्पादन के समान धातु रीसाइक्लिंग पर 18 फीसदी जीएसटी भी लगाया है। इस तरह, खनिज और ऊर्जा संरक्षण के रूप में कबाड़ के रीसाइक्लिंग में कई लाभ होने के बावजूद, जीएसटी के कारण प्राथमिक उत्पादकों के मुकाबले में द्वितीयक धातु उत्पादक प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाते हैं। एमआरएआई के अध्यक्ष संजय मेहता ने कहा कि हम सोमवार को वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकात कर रहे हैं। हम मौजूदा 18 फीसदी जीएसटी को कम करके 12 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही, एफटीए के अंतर्गत भारत में प्राथमिक धातुओं का निर्यात करने वाले देशों की समीक्षा चाहते हैं।
 
इसके अलावा, द्वितीयक धातु उत्पादकों ने सरकार से जीएसटी के अंतर्गत इनपुट के्रडिट रिफंड जारी करने का अनुरोध किया है, जिससे उत्पादन की लागत बढ़ रही है और एसएमई बड़े उत्पादकों से मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। उद्योग जीएसटी के अंतर्गत सरकार के पासअटके हुए रिफंड पर कर्जदाताओं का ब्याज चुका रहा है। 
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