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... और अब हापुड़ एक्सचेंज भी होगा बंद

दिलीप कुमार झा / मुंबई 02 04, 2018

खत्म हो रहा वायदा

अंतिम चालू एक्सचेंज है हापुड़ कमोडिटी एक्सचेंज
एचसीएक्स ने 1923 में शुरू किया था सरसों में वायदा कारोबार
हर रोज होता था औसतन 1 अरब रुपये का व्यापार
सेबी ने सरसों अनुबंध के नवीनीकरण को नहीं दी मंजूरी
सरसों के छोटे एवं सीमांत किसानों को होगी समस्याएं

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हापुड़ कमोडिटी एक्सचेंज लिमिटेड (एचसीएक्स) के सरसों अनुबंध के नवीनीकरण को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है, जिससे यह एक्सचेंज बंद हो सकता है। एक दशक पहले 22 क्षेत्रीय एक्सचेंज थे, जिनमें हापुड़ कमोडिटी एक्सचेंज अंतिम चालू एक्सचेंज है।

कमोडिटी पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीपीएआई) के अध्यक्ष संजय रावल ने कहा, 'क्षेत्रीय जिंस एक्सचेंजों के दिन लद चुके हैं। नियामक चाहता है कि क्षेत्रीय जिंस एक्सचेंज अनुबंध के दूसरे पक्ष पर आधारित कारोबार को अपनाएं और उनके पास संगठित क्लीयरिंग कॉरपोरेशन होने चाहिए। दरअसल सेबी की मंशा है कि क्षेत्रीय जिंस एक्सचेंज एक कंपनी के रूप में काम करें। एकल जिंस एक्सचेंज अगर एक कंपनी की तरह परिचालन कुशलता हासिल करने में नाकाम रहते हैं तो उनके लिए कारोबार से बाहर निकलना ही ज्यादा उचित है।' 

सेबी की वेबसाइट के मुताबिक जिंसों में वायदा कारोबार की सुविधा मुहैया कराने का एचसीएक्स का लाइसेंस 28 फरवरी को खत्म हो रहा है। लेकिन सेबी ने सरसों अनुबंधों के नवीनीकरण से इनकार कर दिया है। यह अनुबंध ओपन पोजिशन के आसानी से निपटान के साथ पिछले सप्ताह खत्म हो गया। एचसीएक्स ने सरसों में वायदा कारोबार करीब एक सदी पहले 1923 में शुरू किया था। एक्सचेंज पर रोजाना सरसों का औसतन करीब 1 अरब रुपये का कारोबार होता था, जिसे प्रमुख उत्पादक राज्यों के कारोबारी भाग लेते थे। 

हालांकि एचसीएक्स के बंद होने से उन छोटे एवं सीमांत सरसों उत्पादक किसानों के लिए समस्याएं पैदा होंगी, जो भारी सदस्यता शुल्क और बड़े कारोबारी लॉट के कारण राष्ट्रीय जिंस एक्सचेंजों की सदस्यता नहीं ले सकते। पुराने कारोबारियों के लिए कंप्यूटर साक्षरता भी राष्ट्रीय एक्सचेंजों पर जाने में एक बड़ी बाधा है। एचसीएक्स के सचिव एम पी सिंह ने कहा, 'ठीक से कारोबार करने के बावजूद हम बंद होने के दिन गिन रहे हैं। सेबी ने सरसों अनुबंधों के नवीनीकरण को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। यह अनुबंध पिछले सप्ताह खत्म हो गया, जिसमें ओपन पोजिशन की बिना किसी शिकायत के डिलिवरी हुई है। सेबी के सरसों अनुबंधों के नवीनीकरण को मंजूरी देने से इनकार करने के कारण एचसीएक्स पर कारोबार थम सा गया है। एचसीएक्स 1923 से अपना जिंस वायदा कारोबार चला रहा है। एक्सचेंज के सामने एकमात्र दिक्कत सेबी का 1 अरब रुपये के नेटवर्क का मापदंड है, जिसे हम लगातार प्रयासों के बावजूद हासिल नहीं कर पा रहे हैं।'

इस समय एक्सचेंज के 200 सदस्य हैं, जो एचसीएक्स के शेयरधारक भी हैं। लेकिन इन शेयरधारकों के कम पूंजी आधार के कारण सदस्य एक्सचेंज में नई पूंजी नहीं डाल पा रहे हैं। इस तरह एचसीएक्स सेबी के 1 अरब रुपये के न्यूनतम नेटवर्थ के मापदंड से महज 20 से 30 फीसदी दूर है। सितंबर 2015 में सेबी में पूववर्ती नियामक वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के विलय के बाद चार क्षेत्रीय एक्सचेंज न्यूनतम नेटवर्थ का मापदंड पूरा नहीं कर पाने की वजह से बंद हो चुके हैं।  इन एक्सचेंजों में इंडिया पेपर ऐंड स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन (आईपीएसटीए), राजकोट कमोडिटी एक्सचेंज  (आरसीएक्स), बॉम्बे कमोडिटी एक्सचेंज और कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया शामिल हैं।

सेबी ने दोनों नियामकों के विलय के तत्काल बाद दिसंबर, 2015 में जिंस एक्सचेंजों के लिए 'निकासी का रास्ता' पेश किया था। सितंबर, 2015 के बाद जिंस एक्सचेंजों को प्रतिभूति एक्सचेंज माना जा रहा है। दिसंबर, 2015 में पांच क्षेत्रीय एक्सचेंजों ने निकासी रास्ता अपनाया था, जिनमें से चाार पहले ही अपना परिचालन बंद कर चुके हैं। 

नियामक ने अपने कई आदेशों में कहा है कि जिन्हें अपना कारोबार जारी रखने की मंजूरी दी गई है, वे अपने नाम में 'एक्सचेंज' शामिल नहीं करेंगे। इसलिए अपना परिचालन बंद करने वाले बहुत से एक्सचेंजों को एक बार फिर अपना नया नाम रखना पड़ेगा। इन्हें एक एसोसिएशन की तरह वायदा को छोड़कर सामान्य कारोबार करने की मंजूरी है। सेबी की शर्त की वजह से एचसीएक्स अपना पहले वाला नाम 'चैंबर ऑफ कॉमर्स' को फिर से अपना सकता है।
Keyword: hapur, exchange, SEBI,,
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