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कर से विदेशी निवेशक आहत

पवन बुरुगुला / मुंबई February 02, 2018

लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ कर दोबारा लागू करने के सरकार के फैसले से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के बीच घबराहट है, जिन्होंंने इस पर राहत के लिए शुक्रवार को वित्त मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया। सूत्रों ने कहा कि एफपीआई भारत में निवेश पर अन्य एशियाई व उभरते बाजारों के मुकाबले बढ़ती लागत से चिंतित हैं। विदेशी निवेशक इससे भी चिंतित हैं कि क्या ग्रैंडफादरिंग उन पर भी लागू होगी। एलटीसीजी कर की खबर चारों तरफ रही है, लेकिन एफपीआई को उम्मीद थी कि लंबी अवधि के शेयर निवेश के लाभ पर यथास्थिति रहेगी। विदेशी फंड एलटीसीजी छूट हासिल करने के लिए एक साल की निवेशित अवधि को दो या तीन साल करने की संभावना जता रहे थे।
 
ज्यादातर विदेशी फंडों ने एसटीटी को समाप्त किए बिना एलटीसीजी कर को दोबारा लागू करने से नाराज हैं। साल 2004 में एसटीटी को पूंजीगत लाभ के बदले लागू किया गया था। गुरुवार को पेश आम बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एसटीटी की व्यवस्था में कोई बदलाव किए बिना एलटीसीजी कर लगाने का प्रस्ताव रखा है और इस तरह से भारतीय बाजार को दोनों कर लागू करने वाला एकमात्र बाजार बना दिया है। हीलियस कैपिटल के संस्थापक समीर अरोड़ा ने कहा, एलटीसीजी कर लागू करना बजट का वास्तविक नकारात्मक पहलू है। यह मानना गलत है कि एलटीसीजी कर लागू करने से निवेशक प्रभावित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि भारत अन्य बाजारों के हाथोंं निवेश गंवा सकते हैं क्योंकि निवेशकों के शुद्ध रिटर्न में कमी होगी।
 
विगत में विदेशी निवेशकों ने एलटीसीजी कर लगाने के बजाय एसटीटी बढ़ाने की वकालत की थी, जो एफपीआई के लिए प्रशासनिक व अनुपालन की मुश्किलें पैदा करता है। निशीथ देसाई एसोसिएट्स के संस्थापक निशीथ देसाई ने कहा, एलटीसीजी कर लागू करने से विदेशी निवेशक प्रभावित होंगे और इसके परिणामस्वरूप शेयर कारोबार भारत से अन्य देशों मसलन सिंगापुर जा सकता है जहां कर की बेहतर दरें हैं और वित्तीय योजनाएं भी अच्छी हैं।  विशेषज्ञों ने कहा कि एफपीआई के बीच घबराहट की अन्य वजह यह हो सकती है कि क्या ग्रैंडफादरिंग का प्रावधान उन पर लागू होगा। ग्रैंडफादरिंग के तहत 31 जनवरी तक मार्क टु मार्केट लाभ को कर से सुरक्षा मिली हुई है। 31 जनवरी के बाद होने वाली कीमत बढ़ोतरी पर महंगाई का ध्यान रखे बिना कर लागू होगा।
 
देसाई ने कहा, एफपीआई से संबंधित प्रावधान में ग्रैंडफादरिंग का जिक्र नहीं है, लेकिन जेटली के भाषण से संकेत मिलता है कि यह फायदा एफपीआई समेत सभी करदाताओं को मिलेगा। कराधान के लिहाज से चुनौतियोंं के अलावा एफपीआई इससे भी चिंतित हैं कि इस कर का अंतिम फायदा आखिर किस तरह निवेशकों को मिलेगा। सामान्य अवधारण के उलट एफपीआई एकल इकाई नहीं है बल्कि सामान्य तौर पर पूलिंग व्हीकल है या वे अपने निवेशकों के लिए ब्रोकरेज के तौर पर काम करते हैं। हालांकि मौजूदा कराधान कानून एफपीआई को एकल करदाता मानता है क्योंकि सभी ट्रेड एक ही डीमैट खाते के जरिए होते हैं। लेकिन ज्यादातर एफपीआई के लिए मुश्किल यह है कि करदेयता का हस्तांतरण आखिरी लाभार्थी को कैसे होगा।
 
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