बिजनेस स्टैंडर्ड - बैंकों के एकीकरण पर रहेगा जोर
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बैंकों के एकीकरण पर रहेगा जोर

ईशान बख्शी / नई दिल्ली February 02, 2018

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि सरकार बैकों के समेकन और आईडीबीआई के निजीकरण को लेकर प्रतिबद्घ है। उन्होंने कहा, 'मैं इन दोनों घोषणाओं का समर्थक हूं और जब बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत हो जाएगी तो उचित समय पर ये घोषणाएं की जाएंगी।' जेटली ने कहा कि दो कमजोर बैंकों के विलय या एक कमजोर बैंक का मजबूत बैंक के साथ विलय कोई विकल्प नहीं है। बजट 2018-19 को पेश किए जाने के एक दिन बाद जेटली ने कहा कि सरकार ने शुरू में स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए वैश्विक दृष्टिïकोण को अपनाने पर विचार किया था, लेकिन इसे लेकर राजकोषीय अस्पष्टïता को देखते हुए इसे सीमित कवरेज दिया गया। उन्होंने 10 करोड़ परिवारों या 50 करोड़ लोगों को हेल्थ कवर मुहैया कराने के लिए बजट में योजना की घोषणा की है। 
 
इस योजना को वित्त वर्ष 2019 में शुरू किए जाने की संभावना है और यह पूरी तरह राज्य द्वारा वित्त पोषित होगी। उन्होंने कहा, 'भारत में सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव हो रहा है। मौजूदा समय में इस योजना के लिए 20 अरब रुपये मुहैया कराए गए हैं।' 'ओपन' पत्रिका द्वारा आयोजित इंटरेक्टिव सेशन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को मजबूती प्रदान करने वाली योजना पर नीति आयोग, कृषि मंत्रालय और राज्यों द्वारा काम किया जाएगा।  उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार की प्रतिबद्घता उत्पादन लागत के 50 प्रतिशत से अधिक का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मुहैया कराना है।
 
उन्होंने कहा, 'ग्रामीण आबादी पर भारी दबाव बना हुआ है। उसे सरकारी मदद की जरूरत है। एमएसपी को उचित बनाया जाएगा। योजना के सुनियोजित ढंग से निर्माण पर कृषि मंत्रालय, नीति आयोग और राज्य सरकारों द्वारा मिलकर काम किया जाएगा।' बड़ी कंपनियों पर कर दर नहीं घटाए जाने समेत उद्योग से जुड़ी कुछ चिंताओं पर वित्त मंत्री ने तर्क पेश करते हुए कहा कि यह लाभ पहले ही मुहैया करा दिया गया था और कर दरों में कमी मौजूदा रियायतों की समाप्ति के साथ ही की जा सकती है। 
 
उन्होंने कहा, 'लेकिन भारत में ज्यादातर रियायतें 'सनसेट क्लॉज' (निर्धारित तारीख के बाद समाप्ति से जुड़े प्रावधान) से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने चेताया कि चूंकि निवेश अक्सर इन प्रावधान के आधार पर होते हैं, इन्हें अचानक वापस लिए जाने से पूर्वप्रभावी कार्य की शिकायतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा, 'चूंकि सनसेट तारीखों से जुड़े हुए हैं, इसलिए रियायतें स्वत: समाप्त हो जाएंगी। तब कर दर घटाना संभव होगा।' हालांकि उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में 2.5 अरब रुपये के दायरे से ऊपर वाली 7,000 कंपनियों के लिए प्रभावी कर दर छूट दिए जाने की वजह से सिर्फ 22 प्रतिशत है। लेकिन जब ये छूट समाप्त होंगी, उनकी कर दरें भी बढ़ जाएंगी। जीएसटी के संदर्भ में निचले स्तर के अनुपालन के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री ने कहा कि अभी कर-चोरी विरोधी सभी उपाय अमल में नहीं लाए गए हैं। उन्होंने कहा, 'जब ये सभी उपाय किए  जाएंगे तो अनुपालन में मजबूती आएगी और इससे राजस्व बढ़ाने में मदद मिलेगी।' 
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