बिजनेस स्टैंडर्ड - 'मोदीकेयर' पर 110 अरब होंगे खर्च
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, April 22, 2018 04:38 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

'मोदीकेयर' पर 110 अरब होंगे खर्च

साहिल मक्कड़ और वीणा मणि / नई दिल्ली February 02, 2018

नीति आयोग और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि बजट में घोषित स्वास्थ्य बीमा योजना से सरकारी खजाने पर 110 अरब रुपये से 120 अरब रुपये का बोझ पड़ सकता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को संसद में पेश 2018-19 के बजट में इस योजना की घोषणा की थी। इससे 50 करोड़ लोगों को फायदा होगा।  केंद्र सरकार का कहना है कि वह इस योजना के लिए 60 फीसदी राशि जुटाएगी जबकि बाकी 40 फीसदी राज्यों को वहन करना होगा। अलबत्ता अभी राज्यों ने इस योजना पर अपनी सहमति नहीं जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं है, साथ ही वे अपनी स्वास्थ्य बीमा योजना का छोड़कर केंद्र की नई स्वास्थ्य योजना में शामिल होने के लिए आसानी से तैयार नहीं होंगे। अभी करीब 24 राज्य अपने नागरिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजनाएं चला रहे हैं।
 
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) विनोद पॉल ने कहा, 'हम इस बारे में राज्य सरकारों से बात करेंगे।' उन्होंने कहा कि नई योजना के तहत देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों के सालाना 5 लाख रुपये तक का इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। इस योजना के अगले 6 से 7 महीने में शुरू होने की उम्मीद है। इससे इन अटकलों को भी बल मिला है कि यह योजना मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले शुरू होगी।  अधिकारियों का कहना है कि नई योजना को जल्दी शुरू करना और इसकी सफलता राज्य सरकारों पर निर्भर है। केंद्र राज्यों को ट्रस्ट मॉडल अपनाने या फिर बोली के आधार पर बीमा कंपनी को अनुबंध देने की सलाह देगी। ट्रस्ट मॉडल के तहत राज्य सरकार किसी सरकारी बीमा कंपनी को स्वास्थ्य कवर देने के लिए नियुक्त कर सकती है। नीति आयोग का अनुमान है कि नई स्वास्थ्य बीमा योजना पर पहले साल करीब 60 अरब रुपये का खर्च आएगा। सरकार का अंदाजा है कि प्रति परिवार प्रीमियम 1,000 से 1,200 रुपये के बीच आएगा। नीति आयोग में सलाहकार आलोक कुमार ने कहा, 'हम 50 प्रतिशत लाभार्थियों को इस दायरे में लाएंगे। हालांकि यह राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।' 
 
पॉल के मुताबिक यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार ने बजट में स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) के लिए रकम का आवंटन नहीं किया है। उन्होंने कहा, 'वित्त मंत्री ने राष्टï्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए 2,000 करोड़ रुपये दिए हैं। हमें स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर से भी रकम मिलने की उम्मीद है।' सरकार ने 2018-19 के बजट में स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया है और इससे करीब 11,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों ने कहा एनएचपीएस आरएसबीवाई को अपने में समाहित कर लेगी। गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले लोगों को द्वितीयक सुरक्षा देने के लिए 2008 में आरएसबीवाई की शुरुआत हुई थी। आरएसबीवाई के तहत लाभार्थियों को प्रति परिवार 30,000 रुपये का बीमा दिया गया और खर्च का वहन केंद्र और राज्यों ने 75:25 अनुपात में किया। अधिकारियों ने कहा कि आरएसबीआई को अपेक्षाकृत सफलता नहीं मिली है।
Keyword: budget, arun jaitley, health, insurance,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या राजनीति से प्रेरित है महाभियोग का नोटिस
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.