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कृषि ऋण के लक्ष्य को 11 लाख करोड़ रुपये किया गया

भाषा / नई दिल्ली February 01, 2018

किसानों को एक बड़ी राहत देते हुए सरकार ने अगले वित्त वर्ष 2018-19 के लिए कृषि ऋण के लक्ष्य को 10 प्रतिशत बढ़ाकर 11 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज लोकसभा में वित्त वर्ष 2018-19 का बजट पेश करते हुए धान जैसी खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) उत्पादन की लागत से 50 प्रतिशत ऊपर तय करने की घोषणा की। वित्त मंत्री ने जोर दिया कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान किसानों की आय बढ़ाने पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का आह्वान किया है। जेटली ने कहा कि सरकार ने आगामी खरीफ (गर्मियों की) की फसलों मसलन मक्का, सोयाबीन और दलहन के लिए एमएसपी को उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना रखने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने का कि रबी यानी सर्दियों की फसलों के लिए एमएसपी में पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कीमतों में गिरावट के बाद भी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले।

नीति आयोग राज्य सरकारों के साथ इस बारे में संस्थागत व्यवस्था बनाने पर विचार करेगा। उन्होंने अगले वित्त वर्ष के लिए कृषि ऋण के लक्ष्य को 10 प्रतिशत बढ़ाकर 11 लाख करोड़ रुपये करने का भी प्रस्ताव किया। वित्त वर्ष 2014-15 में यह यह लक्ष्य 8.5 लाख करोड़ पहले था। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा सरकार 10,000 करोड़ रुपये का मत्स्यपालन तथा पशुपालन ढांचागत कोष भी स्थापित करेगी। जेटली ने बताया कि ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि विपणन) कार्यक्रम के तहत 585 में से 470 मंडियों को इलेक्ट्रानिक तरीके से जोड़ा गया है। शेष थोक बाजारों को मार्च, 2018 तक जोड़ा जाएगा। जेटली ने खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के लिए आवंटन को दोगुना कर 1,400 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया है।

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