बिजनेस स्टैंडर्ड - जिंस डेरिवेटिव कारोबार में बीएसई
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जिंस डेरिवेटिव कारोबार में बीएसई

राजेश भयानी / मुंबई January 29, 2018

देश के सबसे पुराने शेयर बाजार बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने आज जिंसों में प्रायोगिक कारोबार शुरू कर दिया। इससे जिंस डेरिवेटिव खंड हिचकोले खाने लगा है। इसकी वजह यह नहीं है कि एक एक्सचेंज जिंस डेरिवेटिव शुरू करने के लिए तैयार है, बल्कि यह है कि उसने सबसे कम लेनदेन शुल्क की पेशकश की है। यह शुल्क ब्रोकर-सदस्यों को चुकाना होता है। एक्सचेंज ने हरेक लेनदेन पर एक रुपये शुल्क की पेशकश की है, भले ही अनुबंध की कीमत कितनी भी हो।  बीएसई के अधिकारियों का मानना है कि ज्यादातर सदस्य स्वर्ण वायदा में हिस्सा लेंगे। स्वर्ण वायदा ऐसा पहला उत्पाद है, जिसे एक्सचेंज ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के ऐसे कारोबार को मंजूरी देने के बाद शुरू करने की योजना बनाई है। यह अक्टूबर, 2018 में शुरू होने की संभावना है। यह कारोबार इक्विटी बाजार में कारोबार के बाद होगा। प्रायोगिक कारोबारी सत्र से एक्सचेंज को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि क्या वह अन्य खंडों में समय को बढ़ाना चाहता है। जिंस डेरिवेटिव रात 11 बजे तक खुला रहता है।  
 
बीएसई पिछले दो वर्षों से जिंस डेरिवेटिव पर काम कर रहा है। इसने कुछ समय पहले ही इस खंड के लिए मुख्य कार्याधिकारी नियुक्त किया है। करेंसी डेरिवेटिव में लेनदेन शुल्क को पुनर्गठित करने के बाद पिछले महीने एक्सचेंज की बाजार हिस्सेदारी बढ़ी है। अब इसकी करेंसी डेरिवेटिव में 52.6 फीसदी हिस्सेदारी है, जो पिछले साल 44.6 फीसदी थी।  इसने अपनी म्युचुअल फंड सेवाओं में सुधार के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया है। एक्सचेंज ने पिछले सप्ताह बीएसई स्टार एमएफ पर ई-मैंडेट शुरू किया है। यह ऐसी प्रणाली है, जो पूरी मैंडेट पंजीकरण प्रणाली को डिजिटल बनाती है और फिजिकल मैंडेट की जरूरत को 
 
खत्म करती है। यह विशेष रूप से सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट योजनाओं के मामले में उपयोगी है, जिनमें फिजिकल मैंडेट देने की स्थिति में कुछ सप्ताह लगते हैं।  एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक आशिष चौहान ने कहा, '32 बैंक भारतीय राष्ट्रीय भुगतान परिषद के जरिये ई-मैंडेट की सेवाएं दे रहे हैं और चार बैंक प्रमाणन के चरण में हैं।' नई सुविधा के तहत करीब 550 ई-मैंडेट पहले ही पंजीकृत  हो चुके हैं।  चौहान का दावा है कि बीएसई के तकनीक महारत को जिंस डेरिवेटिव में अपनाया जा सकता है। एक्सचेंज टी-7 तकनीक का इस्तेमाल करता है, जो उसने अपने साझेदार डॉयचे बोर्स से हासिल की है। टी-7 खुली तकनीक है, इसलिए यह सस्ती है। अन्य एक्सचेंजों से इतर बीएसई की तकनीक मात्रा से नहीं जुड़ी है। इसका कहना है कि प्रतिक्रिया का समय 6 माइक्रो सेकंड है, जिससे एक मिनट में 3 करोड़ ऑर्डर लिए जा सकते हैं। 
 
ऑप्शन में भी तेज तकनीक की जरूरत होती है क्योंकि उसमें पुट एवं कॉल ऑप्शन होते हैं। चौहान ने कहा, 'बीएसई की सदस्य सभी बैंकों की सहायक कंपनियां जिंस डेरिवेटिव में ब्रोकिंग कर सकेंगी और उन्हें बीएसई के अन्य ब्रोकरों की तरह अलग सदस्यता लेने की जरूरत नहींं होगी।  नए सदस्यों के लिए भी बीएसई का सदस्यता शुल्क 10 लाख रुपये है।' उन्होंने कहा, 'अन्य एक्सचेंजों पर जिंसों सहित अन्य खंडों में मार्केट मेकिंग करने वालों के लिए बीएसई जिंस डेरिवेटिव पर ऐसा करना ज्यादा सस्ता होगा।' उन्होंने अपने निवेशक सुरक्षा फंड का भी जिक्र किया। यह फंड करीब 700 करोड़ रुपये का है। 
Keyword: jins, company, BSE,,
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