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गलेगी आत्मनिर्भरता की दाल

दिलीप कुमार झा / मुंबई 01 28, 2018

दालों में होगा इजाफा

► कृषि के अनुकूल जलवायु और अधिक रकबे की वजह से रबी के रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना, भारत को नहीं रहना होगा दलहन आयात पर निर्भर
पिछले साल तक भारत को रहना पड़ा विभिन्न किस्मों की दालों के आयात पर निर्भर
1.6-1.65 करोड़ हेक्टेयर का कुल रकबा रहने का अनुमान
वित्त वर्ष 2018-19 में विपणन के लिए उपलब्ध रहेगा 25-30 लाख टन अतिरिक्त दहलन उत्पादन

पिछले साल तक आयात के बोझ तले दबा रहने वाला भारत वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान दलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करने जा रहा है। सर्वकालिक उच्च रकबे और कृषि के अनुकूल जलवायु के कारण खरीफ की अधिक उपज तथा रबी सीजन के रिकॉर्ड उत्पादन की वजह से ऐसा होने वाला है। पिछले साल यानी 2016-17 तक भारत विभिन्न किस्मों की दालों के आयात पर काफी निर्भर रहा। इसमें ऑस्ट्रेलिया से मटरा (छोले), म्यांमार से तुअर, कनाडा से अन्य किस्में शामिल हैं। साथ ही बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाले अफ्रीका के गैर-उपभोक्ता देश भी शामिल हैं। उद्योग की शीर्ष संस्था इंडिया पल्सेस ऐंड ग्रेंस एसोसिएशन (आईपीजीए) ने वित्त वर्ष 2017 के दौरान भारत के दलहन आयात को लगभग 57 लाख टन के स्तर पर रखा है जो पिछले वित्त वर्ष में आयातित लगभग 58 लाख टन के बराबर ही है।

व्यावसायिक सूचना एवं सांख्यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआईएस) के मुताबिक, भारत ने बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अप्रैल-नवंबर 2017 की अवधि में 2.47 अरब डॉलर मूल्य की दालों का आयात किया है। वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान भारत ने 4.24 अरब डॉलर की आयातित दालों का रिकॉर्ड बनाया था, जो पिछले वर्ष के 3.90 अरब डॉलर से अधिक रहा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि 2017 के खरीफ सीजन के दौरान दालों का उत्पादन 87.1 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 94.2 लाख टन से जरा-सा कम है।

कृषि जलवायु की दशा, रकबे और बेहतर बीज वितरण में वृद्धि के कारण हम कुल रकबा 1.6-1.65 करोड़ हेक्टेयर रहने का अनुमान लगा रहे हैं, जिसकी वजह से 2017 के रबी सीजन के दौरान 25-30 लाख टन अतिरिक्त दालों का उत्पादन होगा, जो वित्त वर्ष 2018-19 में विपणन के लिए उपलब्ध रहेगा।

इसका मतलब यह है कि भारत में दालों की कुल उपलब्धता लगभग 2.4-2.5 करोड़ टन रहेगी, जो भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास उपलब्ध लगभग 20 लाख टन के बफर स्टॉक से अधिक है। इसलिए, भारत को दालों का आयात करने की जरूरत नहीं है। भारत में बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली किस्मों के निर्यात से कुछ खास किस्मों की दालों की कमी को पूरा किया जा सकता है।

4-5 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि के साथ भारत को अपनी मांग की पूर्ति के लिए सालाना 2.4 करोड़ टन दालों की आवश्यकता होती है। कृषि मंत्रालय द्वारा एकत्रित किए गए आंकड़े बताते हैं कि रबी की दालों के अंतर्गत कुल रकबा करीब पांच प्रतिशत तक उछलकर 1.631 करोड़ हेक्टेयर के सर्वकालिक स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले पांच सालों के औसत से करीब 15 प्रतिशत अधिक बैठता है। क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया के सलाहकार (सीसीएफआई) एस गणेशन ने कहा कि इस वर्ष भारत से सबसे कम आयात की संभावना को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की सरकारों ने अपने किसानों को इस साल दालों की खेती न करने की सलाह दी है। कृषि उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने से पहले हमें बाजार की गतिविधि पर पर ध्यान देने की जरूरत है।
Keyword: agri, farmer, pulses,,
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