बिजनेस स्टैंडर्ड - आंगडिय़ों की नाराजगी से हीरा मंद
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आंगडिय़ों की नाराजगी से हीरा मंद

सुशील मिश्र / मुंबई January 23, 2018

जीएसटी में राहत मिलने के बावजूद हीरा कारोबार में चमक वापस आती नहीं दिख रही है। आंगडिय़ों के हीरा कारोबार से बाहर होने से मुंबई और गुजरात के हीरा कारोबारी परेशान हैं। कारखानों और शोरूम में आपूर्ति का संकट खड़ा हो गया है। हीरा कारोबारी इस समस्या को सुलझाने के लिए माथापच्ची करने में लगे हैं तो प्रशासन पारदर्शिता लाने और कालेधन पर चोट की बात कर रहा है। हालांकि हीरे की ऑनलाइन ट्रेडिंग (वायदा) से बाजार को थोड़ी उम्मीद हो रही है। कर चोरी रोकने के लिए साल के आरंभ में जीएसटी विभाग ने आंगडिय़ों पर कार्रवाई करते हुए बड़ी छापेमारी की थी। आयकर विभाग और जीएसटी विभाग की इस कार्रवाई के बाद आंगडिय़ों ने अपना काम फौरी तौर पर बंद कर दिया है। मुंबई से रफ डायमंड लेकर सूरत पहुंचाने और पॉलिश हीरे सूरत से लाकर मुंबई पहुंचाने का काम इन्हीं आंगडिय़ों के हाथ में है। हीरे के साथ सोना और जरूरी कागजात पहुंचाने का भी काम यही लोग करते रहे हैं। हीरा कारोबारी संजय शाह कहते हैं कि प्रशासन के मन में यह बैठ गया है कि हीरे और सोने के काम में कर चोरी की जाती है। आंगडिय़ों को वह गलत नजरिये से देखते हैं जबकि सच्चाई यह नहीं है। इस समय वे डिलिवरी को तैयार नहीं है जिससे मुंबई और सूरत का करीब 90 फीसदी कारोबार प्रभावित हो रहा है। 
 
आंगडिय़ों की हीरा कारोबार में महत्त्वपूर्ण और सबसे भरोसेमंद भूमिका है। इनका काम होता है, पूरी ईमानदारी और गुपचुप तरीके से हीरे और नकद राशि को इधर से उधर ले जाना। हीरा कारोबारी नरेश मेहता कहते हैं कि मंदी की मार और जीएसटी की उलझन से उद्योग बाहर आना शुरू हुआ ही था कि आंगडिय़ों की अघोषित हड़ताल ने उद्योग को परेशान कर दिया। यह सबकुछ ऐसे वक्त पर हुआ है जब दुनिया में हीरों की मांग अब बढ़ रही है। दिसंबर 2017 में तराशे गए और पॉलिश किए हुए हीरों के निर्यात में 7.86 फीसदी का इजाफा हुआ है।
 
जेम्स ऐंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल कहते हैं कि 8 जनवरी को आयकर विभाग की छापेमारी से पूरा कारोबार ठप सा हो गया है। निर्यात भी प्रभावित हो रहा है। आंगडिय़ा हीरा कारोबार में पुल का काम करते हैं। सरकार अगर उनको थोड़ी सलाह देती तो यह नौबत नहीं आती। जेम्स ऐंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल गुजरात के चेयरमैन दिनेश नावडिया कहते हैं कि पहले हीरों की बिक्री पर 3 फीसदी जीएसटी लगाया गया जो बाद में रिफंड होता था। इससे व्यापारियों की कार्यशील पूंजी फंस जाती थी। हालांकि सरकार ने हीरा कारोबारियों की मुश्किलों को समझते हुए हीरे पर जीएसटी 3 फीसदी से घटाकर 0.25 फीसदी कर दिया। इससे हीरा उद्योग को बड़ी राहत मिली है। मगर अब आंगडिय़ों वाली यह नई मुश्किल आ गई।
 
हीरा कारोबार के जानकारों का कहना है कि यह समस्या पारदर्शिता की कमी के कारण आ रही है। आईसीईएक्स के प्रबंध निदेशक संजीत प्रसाद का कहना है कि निवेशकों, कारोबारियों और प्रशासन का भरोसा जीतने की जरूरत है। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग की जरूरत है। हीरा कारोबार के सामने सबसे बड़ी समस्या डिलिवरी की है। इसके लिए उद्योग में पारदर्शिता जरूरी है। आंगडिय़ों की मानी जाए तो वे हीरों के औसतन 2,000 पार्सल सूरत और मुंबई के बीच लाते और ले जाते हैं। पैकेट में क्या होता है, यह उन्हें नहीं पता रहता है। यह भरोसे पर  होने वाला कारोबार है, लेकिन सरकार उन्हें गलत निगाह से देखती है। ऐसे में जब तक निर्देश स्पष्ट नहीं होते तब तक काम नहीं करेंगे। 
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