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क्यूआईपी की लगने वाली है कतार

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई January 22, 2018

भारतीय कंपनी जगत पूंजी जुटाने, कर्ज को समाप्त करने और दबाव वाली परिसंपत्तियों के संभावित अधिग्रहण की खातिर कोष बनाने के लिए पात्र संस्थागत नियोजन का रास्ता चुन रहा है। अगर बाजार में तेजी बनी रहती है तो वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले 40 से ज्यादा कंपनियां इसके जरिए 400 से 500 अरब रुपये तक जुटा सकती हैं। पिछले कैलेंडर वर्ष में सूचीबद्ध कंपनियों ने क्यूआईपी के जरिए 600 अरब रुपये जुटाए थे। नोमूरा इंडिया के निवेश बैंकिंग प्रमुख उत्पल ओजा ने कहा, पिछले साल कई आईपीओ पेश हुए और इस साल बाजार में क्यूआईपी समेत एफपीओ आदि का वर्चस्व देखने को मिल सकता है। आकर्षक मूल्यांकन का मतलब यह है कि कंपनियां कम हिस्सेदारी बिक्री से ज्यादा रकम जुटा सकती है और इस रकम का इस्तेमाल कर्ज घटाने आदि में कर सकती हैं।
 
वित्तीय व बुनियादी ढांचा क्षेत्र की कंपनियां रकम जुटाने के मामले में वर्चस्व स्थापित करेंगी। बैंकों को पूंजी की दरकार है क्योंकि अगले कुछ महीनों में ये अपने फंसे कर्ज पर बड़ी कटौती शुरू करेगा। बुनियादी ढांचा कंपनियों को बढ़ते ऑर्डर बुक के वित्त पोषण के लिए रकम की दरकार होगी क्योंकि सरकार सड़क, बंदरगाह व रेलवे के निर्माण पर जोर दे रही है। एचडीएफसी बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक की योजना आगामी हफ्तों में क्यूआईपी के जरिए 240 अरब रुपये से लेकर 270 अरब रुपये जुटाने की है। साल 2016 में बाजार में रहे उतारचढ़ाव ने कई सरकारी बैंकों की क्यूआईपी की योजना को झटका दिया था। हालांकि पिछले साल बाजार की रही सतत चाल और सरकार की तरफ से सार्वजनिक बैंकोंं को 2.1 लाख करोड़ रुपये की पूंजी दिए जाने की घोषणा ने सेंंटिमेंट काफी मजबूत किया है। पिछले साल जून में भारतीय स्टेट बैंक ने इसके जरिए 15,000 करोड़ रुपये जुटाए थे।
 
दिलचस्प रूप से क्यूआईपी का विकल्प चुनने वाली कई कंपनियां दबाव वाली परिसंपत्तियों के लिए बोली लगाने की खातिर ऐसा कर सकती हैं। एचडीएफसी के बोर्ड ने हाल में तरजीही आवंटन व क्यूआईपी आदि के जरिए 130 अरब रुपये जुटाने की मंजूरी दी है। इस रकम का इस्तेमाल अधिग्रहण का मौका तलाशने और रियल एस्टेट क्षेत्र में दबाव वाली परिसंपत्तियों के समाधान में होगा। यह जानकारी कंपनी ने दी। पिछले साल कोटक महिंद्रा बैंक ने 58 अरब रुपये जुटाए थे, जिसका एक हिस्सा दबाव वाली परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए था।
 
ओजा ने कहा, चूंकि एनसीएलटी की प्रक्रिया रफ्तार पकड़ रही है, लिहाजा कुछ कंपनियां शायद दबाव वाली परिसंपत्तियों के लिए बोली लगाने की खातिर रकम जमा कर रही है। न्यूनतम 25 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारिता के नियम का पालन करने वाली कंपनियां क्यूआईपी का इस्तेमाल कर सकती है।  क्यूआईपी के अलावा कई आईपीओ भी पेश होंगे क्योंकि प्राइवेट इक्विटी लगातार बाहर निकल रही हैं। 130 अरब रुपये के आईपीओ नियामकीय मंजूरी की प्रतीक्षा में है। सेबी के पास पिछले दो महीने में आठ कंपनियों ने 100 अरब रुपये जुटाने के लिए पेशकश दस्तावेज जमा कराए हैं।
 
बंधन बैंक करीब 25 अरब रुपये जुटाएगा, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज 30 अरब रुपये, एक्मे सोलर होल्डिंग्स 22 अरब रुपये, रिलायंस जनरल इंश्योरेंस 16 अरब रुपये जुटाएगी। अपोलो माइक्रो सिस्टम्स, न्यूजेन सॉफ्टवेयर, अंबर एंटरप्राइजेज पहले ही बाजार से रकम जुटा चुकी हैं। प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा, द्वितीयक बाजार का सेंंटिमेंट जब तक मजबूत बना रहेगा, आईपीओ की पेशकश जारी रहेगी। इस साल बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स करीब 4 फीसदी चढ़ा है। साल 2017 में सूचीबद्ध चार में से तीन कंपनियां हरे निशान में कारोबार कर रही हैं, जिससे लगता है कि ऐसी पेशकश की मांग बढ़ सकती है।
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